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गिरफ्तारी सही, लेकिन चौकस रहने की जरूरत

मोदी पर आतंकी खतरा है, इसका पता तो उनकी बिहार के पटना में हुंकार रैली के दौरान विस्फोट से ही चल गया था।

गिरफ्तारी सही, लेकिन चौकस रहने की जरूरत
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी आतंकवादियों के निशाने पर हैं, इसे इंडियन मुजाहिदीन के चार आतंकियों की गिरफ्तारी ने सच साबित कर दिया है। मोदी पर आतंकी खतरा है, इसका पता तो उनकी बिहार के पटना में हुंकार रैली के दौरान विस्फोट से ही चल गया था, लेकिन खतरे की गंभीरता का अंदाजा इस गिरफ्तारी से लगता है, क्योंकि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जिन चार आतंकवादियों को राजस्थान के दो शहर जयपुर और जोधपुर से गिरफ्तार किया है, उनमें कथित पाकिस्तान का नागरिक जियाउर्रहमान उर्फ वकास अहमद नामक दुर्दांत आतंकी भी शमिल है जो पटना, मुंबई सीरियल ब्लास्ट, पुणे, बनारस, जामा मस्जिद शूटआउट और हैदराबाद में हुए धमाकों में वांछित है। दिल्ली पुलिस ने जैसा कहा है कि वकास इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी यासिन भटकल का करीबी है और उसका संबंध कुख्यात आतंकी संगठन अल कायदा से है। वकास को पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई का गुर्गा माना जाता है और कहा जाता है कि वह आतंकी संगठन लश्करे तैयबा के कैंप में 21 दिन का प्रशिक्षण ले चुका है। वह आईईडी (इंप्रोविस्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने में एक्सपर्ट है। ऐसे में वकास और उनके साथियों- मो. महरूफ, हनीफ, सकीब की गिरफ्तारी व उसके पास से 50 किलो विस्फोटक, करीब 400 डिटोनेटर, टाइमर, लैपटॉप आदि की बरामदगी से भारत में दहशत फैलाने की गहरी आतंकी साजिश का पता चलता है। पुलिस पूछताछ में आतंकियों ने खुलासा भी किया है कि उनकी योजना लोकसभा चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर विस्फोट करके कोहराम मचाने की थी। उसके निशाने पर राजस्थान में मोदी की रैली और पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण रॉयल ट्रेन, जोधपुर, अजमेर, जैसलमेर, बाड़मेर की ऐतिहासिक जगहें और बिड़ला मंदिर थे। वकास की गिरफ्तारी जहां खुफिया एजेंसी और पुलिस की कामयाबी है, जैसा गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा भी है, वहीं यह एक बार फिर सीमा पार के नापाक मंसूबों का नाकामी है। हालांकि केवल इस गिरफ्तारी भर से हमारी सुरक्षा एजेंसियों को इतराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि यह तो साफ हो गया है कि आतंकी की मंशा हमारे लोकसभा चुनावों में गड़बड़ी फैलाने की है। इसलिए वे चुप नहीं बैठेंगे। चार पकड़े गए तो क्या हुआ, वे अपने कुत्सित इरादे को अंजाम देने के लिए अन्य गुर्गों को टार्गेट पर लगाएंगे। इसलिए केंद्रीय खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा एजेंसियों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर नरेंद्र मोदी की सुरक्षा पर सरकार को अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। चूंकि चुनावी रैली के दौरान किसी भी नेता को निशाना बनान आसान है और देश सुरक्षा में ढिलाई की खामियाजा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के रूप में भुगत चुका है। राजीव को तमिल आतंकी संगठन लिट्टे ने चुनावी रैली के दौरान ही निशाना बनाया था। इसलिए समय की ताकीद है कि नरेंद्र मोदी समेत बड़े नेताओं की सुरक्षा में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जानी चाहिए।
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