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बदलेगी शहरी भारत की बदहाल तस्वीर

देश में अभी शहरी आबादी 31 फीसदी है, लेकिन इसकी भारत की जीडीपी में हिस्सेदारी 60 फीसदी से ज्यादा है।

बदलेगी शहरी भारत की बदहाल तस्वीर

स्मार्ट सिटी के लिए 98 शहरों की सूची जारी की गई है। दो शहरों का ऐलान बाद में किया जाएगा। पहले चरण में बीस और फिर अगले दो सालों में बाकी शहरों का विकास स्मार्ट सिटी के तर्ज पर किया जाएगा। इस योजना पर कुल 48 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। इन शहरों का चुनाव एक प्रतियोगिता के आधार पर किया गया है। इसके लिए केंद्र सरकार ने कुछ मानक निर्धारित किए थे। सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया था कि वे ऐसे शहरों की सूची बनाकर केंद्र सरकार के पास भेजें जो इन मानकों पर खरा उतरते हों। कहा जा रहा है कि जो सुविधाएं आजादी के बाद से अब तक लोगों को नहीं मिलीं, वे स्मार्ट सिटी में मिलेंगी।

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दरअसल, इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी भारत की बदहाल तस्वीर को बदलना और उन्हें लोगों के रहने लायक बनाना है। देश में अभी शहरी आबादी 31 फीसदी है, लेकिन इसकी भारत की जीडीपी में हिस्सेदारी 60 फीसदी से ज्यादा है। अनुमान है कि अगले 15 साल में शहरी आबादी की जीडीपी में हिस्सेदारी 75 फीसदी होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में उस स्तर के शहरों की मांग तेजी से बढ़ेगी। आज ग्रामीण क्षेत्रों से जिस तेजी से लोगों का रोजी-रोटी और बेहतर जीवन की तलाश में शहरों की ओर पलायन हो रहा है, उसे देखते हुए कहा जा रहा है कि बहुत जल्द ही शहरी और ग्रामीण आबादी का अनुपात बदल जाएगा। यानी गांवों से ज्यादा लोग शहरों में रहने लगेंगे। मगर क्या हमारे शहर इस बढ़ती आबादी का बोझ ढोने को तैयार हैं। सच कहा जाए तो नहीं। देश में नगरीकरण तेजी से हो तो रहा है, लेकिन वह व्यवस्थित न हो कर बेतरतीब है। उसमें न तो उस शहर का फायदा है, न ही वहां निवास करने वाली आबादी का। लोग बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन सुविधाओं का विस्तार नहीं हो रहा है। जिससे आधे से भी अधिक लोगों को जीवन जीने के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाएं नसीब नहीं हो पा रही हैं। देखा जाए तो आज शहर स्वयं अपनी संस्कृति बचाने को जद्दोजहद कर रहे हैं।

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दूसरी ओर आजादी के छह दशक बीतने के बाद भी देश की एक बड़ी आबादी बेघर है तथा सड़कों और झुग्गी-झोपड़ियों में जीवन जीने को अभिशप्त है। वह ऐसी हालत में नहीं है कि अपने लिए छत का इंतजाम कर सके। ऐसे में जहां हर साल सड़क दुर्घटनाओं में उनकी जान चली जाती है, तो दूसरी ओर प्रकृति के कहर का भी उन्हें शिकार होना पड़ता है। ऐसे में इस योजना का फोकस इन शहरों में मूलभूत सुविधाओं के विकास पर होना चाहिए। जिससे वहां के लोगों को अच्छी हवा, साफ पानी और दूसरी सभी नागरिक सुविधाएं यानी क्वालिटी ऑफ लाइफ मिल सके। मसलन इन स्मार्ट शहरों में किफायती घर हो। हर तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर हो। पानी और बिजली चौबीसों घंटे मिले। मनोरंजन, खेल के साधन हों। सुरक्षा हो। आसपास के इलाकों से अच्छी और तेज कनेक्टिविटी हो। अच्छे स्कूल और अस्पताल भी मौजूद हों। इन शहरों में या आसपास रहने वाले लोगों को रोजगार के पूरे मौके मिलें। साफ सफाई की उचित व्यवस्था बनानी होगी। तभी शहरों में रहने वाले लोगों का जीवन बेहतर हो सकेगा और स्मार्टसिटी की कल्पना साकार हो सकेगी।

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