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घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की संख्या बढ़ाने के निहितार्थ

जब चुनाव नजदीक आते हैं तो सरकार को लोगों की याद आती है।

घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की संख्या बढ़ाने के निहितार्थ
नई दिल्ली. यह मात्र संयोग नहीं हो सकता है कि दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में कांग्रेस के अधिवेशन में पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी खुलेआम महंगाई से त्रस्त गृहणियों का हवाला दे प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से घरेलू एलपीजी सिलेंडर का कोटा बढ़ाने की मांग करते हैं और उसके दो हफ्ते बाद ही प्रधानमंत्री की अगुआई में केंद्रीय मंत्रिमंडल सब्सिडीयुक्त सिलेंडरों की संख्या मौजूदा नौ से बढ़ाकर बारह करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा देती है।
अब जब अगले आम चुनावों में कांग्रेस की साख पर संकट आने की बात कुछ विश्लेषक कहने लगे हैं तो उससे ऐन वक्त पहले रियायती सिलेंडरों की संख्या बढ़ाने को महंगाई से आहत आम आदमी के गुस्से को कुछ कम करने की उसकी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। यूपीए सरकार ने 2012 में सब्सिडी के बढ़ते बोझ को देखते हुए सब्सिडीयुक्त घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की संख्या सीमित कर छह कर दी थी, परंतु विवाद बढ़ने के बाद इसे बढ़ाकर नौ की गई थी। हालांकि उसके बाद भी महंगाई को देखते हुए इसमें और इजाफा करने की मांग होती रही, पर सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ने का तर्क दे कर केंद्र सरकार टालती रही थी।
अब आम चुनाव नजदीक हैं और कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार की विभिन्न मोर्चों पर विफलताओं के बोझ तले दबी जनता छटपटाती प्रतीत हो रही है। वहीं उसकी कारगुजारियों से मतदाताओं में उसके प्रति एक ऊब देखी जाने लगी है। लिहाजा देश बदलाव के मूड में दिख रहा है। हाल के पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे इस बात की तस्दीक करते हैं। इन्हीं दिनों 2014 के लोकसभा चुनावों को लेकर विभिन्न एजेंसियों के चुनाव पूर्व सर्वे सामने आए हैं, जिसमें भी कांग्रेस पिछड़ती दिख रही है। जाहिर है ऐसे पूर्वानुमान सत्ताधारी दल को बेचैन करने के लिए काफी हैं। ऐसे में वह मतदाताओं को लुभाने के लिए कुछ और हथकंडे अपनाए तो किसी को आश्चर्य नहीं। हालांकि इसमें कोईदो राय नहीं है कि देर से ही सही सरकार का यह फैसला महंगाई से परेशान जनता को थोड़ी राहत देगी, परंतु इसकी टाइमिंग को देखते हुए उसकी नीयत पर शक होता है।
देश में इस तरह की राजनीति लंबे अरसे से चल रही है। जब चुनाव नजदीक आते हैं तो सरकार को लोगों की याद आती है। कई तरह की रियायतें देकर मतदाताओं को रिझाने की कोशिश की जाती है। बृहस्पतिवार को सरकार ने एक और फैसले के तहत आधार कार्डके जरिए देशभर में सीधे ग्राहकों के खाते में एलपीजी सब्सिडी देने की महत्वाकांक्षी योजना को स्थगित कर दिया। यह दिखाता है कि यूपीए सरकार जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर लोकलुभावन नीति लागू करने की खोखली कोशिश कर रही थी।
सरकारें व्यावहारिकता को ध्यान दिए बगैर योजनाओं की घोषणा कर देती हैं। यही वजह है कि वे अमल में नहीं आती हैं या आधी-अधूरी लागू होती हैं जिससे लोगों को लाभ कम, परेशानी ज्यादा होती है। किसी भी योजना को मूर्त रूप देने के लिए उसके लिए जरूरी ढांचा का भी विकास करना होता है, बिना हालात को जाने सरकार क्यों इसे बढ़ा चढ़ाकर पेश कर रही थी। नकदी अंतरण योजना को सरकार और राहुल गांधी गेमचेंजर बता चुके हैं। चुनावी मौसम में इससे सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर भी सवालिया निशान लग सकता है।
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