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आतंकवाद से सख्ती से निपटे विश्व जगत

इससे पहले पर्यटकों के बीच लोकप्रिय द्वीप देरबा में 2002 में अलकायदा ने आत्मघाती हमला किया था, उसमें भी 21 लोगों की मौत हो गई थी।

आतंकवाद से सख्ती से निपटे विश्व जगत
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अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया के संसद के करीब स्थित मशहूर बार्दो राष्ट्रीय संग्रहालय पर हुए हमले को वैश्विक आतंकवाद की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। बुधवार को हुए इस आतंकी हमले में करीब 21 लोगों की मौत हो गई है। अभी तक इस हमले की किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन माना जा रहा है कि इसके पीछे आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी आईएस का हाथ है। पिछले 13 सालों में ट्यूनीशिया में यह सबसे घातक हमला है।

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इससे पहले पर्यटकों के बीच लोकप्रिय द्वीप देरबा में 2002 में अलकायदा ने आत्मघाती हमला किया था, उसमें भी 21 लोगों की मौत हो गई थी। ट्यूनीशिया अरब क्रांति का जनक रहा है। यहीं से अरब दुनिया में तानाशाही विरोधी मशहूर क्रांतियों की शुरुआत हुई थी। 2010 के दिसंबर से यहां शुरू हुई सत्ता विरोधी बयार लीबिया, मिस्र, सीरिया और यमन समेत कई देशों में फैली थी।

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2011 में ट्यूनीशिया में भी तानाशाही खत्म हो गई थी। उसके बाद वहां नया संविधान लागू हुआ था और शांतिपूर्ण चुनाव भी हुए थे, लेकिन हाल के दिनों में वहां हिंसा में काफी बढ़ोतरी देखी जा रही है। एक आकलन के मुताबिक करीब तीन हजार ट्यूनीशियाई नागरिक सीरिया और इराक में आईएस की ओर से लड़ रहे हैं। इनमें से कुछ के वापस वतन लौटने और हमला करने की आशंका पिछले दिनों ही वहां की सरकार ने जताई थी।

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इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन अंसार अल शरिया भी वहां सक्रिय है। इसी तरह की घटना गत वर्ष आॅस्ट्रेलिया के सिडनी में घटीथी, जब आईएस का पोस्टर थामे एक बंदूकधारी ने एक कैफे में हमला बोल दिया था। उसके बाद पाकिस्तान के पेशावर में भी एक आर्मी स्कूल पर आतंकियों ने बर्बरता दिखाते हुए सौ सेज्यादा मासूमों की हत्या कर दी थी। अभी रविवार को ही वहां दो चर्चों पर भीषण आत्मघाती हमला हुआ है। वैसे देखा जाए तो आज दुनिया आतंकवाद के साए में जी रही है।

मध्य-पूर्व के देशों, पश्चिम एशिया सहित पाकिस्तान और अफगानिस्तान में आतंकवाद ने अपनी जड़ें जमा ली है। यहीं से विश्व स्तर पर आतंकवादी गतिविधियों का तेजी से विस्तार हो रहा है। कोई भी देश इसकी मार से बचा नहीं है। मौजूदा दौर में इराक एवं सीरिया में आईएस के नाम से आतंकवाद का नया चेहरा सामने आया है जिसने बर्बरता की सारी सीमाओं को पार कर दिया है। इससे पहले अलकायदा का आतंकी चेहरा दुनिया देख चुकी है। बोको हरम के नाम से नाइजीरिया दुनिया के लिए अलग से चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं अफगानिस्तान में तालिबान का अभी भी पूरी तरह सफाया नहीं हो पाया है।

इन सबके बीच हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान भी लंबे अरसे से आतंकवाद का सबसे बड़ा पनाहगाह बना हुआ है। बेहतर होगा कि सभी देश आतंकवाद से अलग-अलग लड़ने की बजाय एकजुट हों। हालांकि पाकिस्तान जैसे देशों को आतंकवाद के प्रति दोहरी नीति छोड़नी होगी। अच्छे-बुरे की श्रेणी में बांटने की बजाय इससे कड़ाई से निपटना होगा। नहीं तो आज ट्यूनीशिया में ऐसी घटना घटी है। कल कोई और देश इसका शिकार हो सकता है। दुनिया कब तक हाथ पर हाथ रखे बैठी रहेगी।

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