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योग को वैश्विक मान्यता भारत की बड़ी उपलब्धि

मोदी स्वयं योग करते हैं। लिहाजा इसकी विशेषताआें से भलीभांति परिचित हैं।

योग को वैश्विक मान्यता भारत की बड़ी उपलब्धि
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव के सिर्फ तीन महीने के अंदर बृहस्पतिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से हर वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की मंजूरी दे दी गई है। इसे एक तरह से उनके कुशल नेतृत्व की विजय के रूप में देखा जाना चाहिए। इसे भारत की भी बड़ी उपलब्धि कही जाएगी, क्योंकि इससे देश की प्राचीन विद्या योग को वैश्विक मान्यता मिल गई है। इससे साबित होता है कि नरेंद्र मोदी को पूरी दुनिया का समर्थन मिल रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि योग में पूरे मानव समाज को एक साथ लाने की क्षमता है। यह ज्ञान, कर्म और भक्ति का बेहद सुंदर संगम है।

मोदी स्वयं योग करते हैं। लिहाजा इसकी विशेषताआें से भलीभांति परिचित हैं। इसे वे अपने जीवन का सहारा कह चुके हैं। यही वजह है कि उन्होंने देश के युवाओं से अपील की है कि वे इसे अपने दैनिक जीवन में अपनाएंगे तो उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। वहीं योगगुरु बाबा रामदेव ने कहा है कि भारत में वैदिक काल से मौजूद योग विद्या एक जीवन शैली है जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने नया मुकाम दिलाया है। आज दुनिया भर में अनगिनत लोगों ने योग को अपने जीवन का अंग बनाया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि अब बड़े पैमाने पर लोग इससे जुड़ेंगे। भारत के लिए सबसे खुशी की बात ये भी है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव का 193 में से 177 सदस्य देशों ने समर्थन किया है। यह भी एक रिकॉर्ड है। इससे पहले इतने भारी समर्थन के साथ महासभा में कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ।

इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र में दूसरा रिकॉर्ड 90 दिन में किसी देश के प्रस्ताव को पेश करके उसे लागू कराने का भी बन गया है। नरेंद्र मोदी ने 21 जून को योग दिवस मनाने का सुझाव दिया था। यह वह तारीख है जब उत्तरी ध्रुव में दिन की अवधि सबसे लंबी होती है और दुनिया के कई हिस्सों में यह दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने भी माना हैकि योग स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सभी जरूरी ऊर्जा प्रदान करता है। लिहाजा योग के फायदे की जानकारियां फैलाना दुनियाभर में लोगों के स्वास्थ्य के हित में होगा। हालांकि विश्व में योग के बारे में कई तरह की भ्रांतियां फैल गई हैं। अंतरराष्ट्रीय पटल पर मान्यता मिलने से उम्मीद हैकि अब वे भी दूर होंगी। और सच्चे अर्थों में योग का विस्तार होगा। दरअसल, योग सिर्फ आसान और मुद्राओं तक सीमित नहीं है और न ही हिंदू धर्म के प्रचार प्रसार का जरिया है।

यह एक आदर्श जीवन शैली है, जो मानवीय उत्थान की ओर ले जाती है। योग और ध्यान न केवल हमारा स्वास्थ्य संवर्धन करते हैं बल्कि हमें आंतरिक और मानसिक बल भी प्रदान करते हैं। योग स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक संपूर्ण दृष्टिकोण मुहैया कराता है। योग मस्तिष्क और शरीर, विचारों और क्रिया, संयम तथा पूर्णता, मानव एवं प्रकृति के बीच सद्भाव का समागम है, यह स्वास्थ्य और कल्याण के लिए समग्र पहल प्रदान करता है। इससे जीवन शैली में बदलाव और चेतना जाग्रत करने पर जलवायु परिवर्तन का सामना करने में मदद मिल सकती है, क्योंकि यह लोगों को अपने आस-पास की जिंदगी के प्रति सजग बनाता है।

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