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केजरीवाल का एक बार फिर मीडिया पर निशाना, कहा- साजिश की तरह क्यों लग रही है हर खबर

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर मीडिया पर निशाना साधा है।

केजरीवाल का एक बार फिर मीडिया पर निशाना, कहा- साजिश की तरह क्यों लग रही है हर खबर
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर मीडिया पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि यह उनके और उनकी सरकार के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त है और पक्षपात कर रहा है। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया है कि मीडिया ने उनको और उनकी पार्टी को खत्म करने की सुपारी ली है। उन्होंने इसे सबक सिखाने के लिए सार्वजनिक मुकदमा (पब्लिक ट्रायल) चलाने के सुझाव का समर्थन किया है। अरविंद केजरीवाल को ऐसा क्यों लग रहा हैकि मीडिया उनके या उनकी पार्टी के खिलाफ साजिश कर रहा है? यह समझना कठिन है। मीडिया को लोकतंत्र का चौथा खंभा कहा जाता है। इसका काम देश दुनिया में घट रही घटनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाना है। यह सूचना देने, शिक्षित करने और मनोरंजन करने का काम करता है।
देखा जाए तो यह संदेशों के आदान प्रदान का महत्वपूर्ण माध्यम है। इन दिनों अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के उपराज्यपाल के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद चल रहा है। बीते हफ्ते उनके कार्यालय ने दिल्ली सरकार के सभी विभागों को अपनी फाइलें उपराज्यपाल को भेजने की हिदायत दी। जबकि मुख्यमंत्री ने विभागों से कहा है वे उपराज्यपाल के दफ्तर की चिंता न करें। दरअसल, दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है, ऐसे में उपराज्यपाल की भूमिका संवैधानिक रूप से बढ़ जाती है। इसके समाधान के लिए वे केंद्र सरकार से संवाद कर सकते थे, परंतु उन्होंने एकतरफा कदम उठाया है। इस बीच उनके मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की लॉ डिग्री का सर्टिफिकेट फर्जी होने का मामला उछला हुआ है। हालांकि केजरीवाल ने उनको क्लीन चिट दे दी है। वहीं आप के बड़े नेता कुमार विश्वास के खिलाफ कथित अवैध संबंध का मामला भी चल रहा है। तो मीडिया में इन सब खबरों की चर्चा लाजिमी है। मगर आप के नेताओं को इसमें षड्यंत्र की गंध आ रही है। राजस्थान के किसान की आत्महत्या के कवरेज को लेकर भी आप के नेताओं ने सवाल खड़े किए थे। यहां मीडिया अपनी भूमिका ही निभा रहा है। फिर केजरीवाल को क्यों लग रहा है कि वह उन्हें बदनाम कर रहा है?
दरअसल, आप में मीडिया की शुरू से ही दिलचस्पी रही है। कई आलोचक तो यहां तक कहते हैं कि इस पार्टी को खड़ा करने में इसकी प्रमुख भूमिका रही है। हालांकि यह सच है कि देश में मीडिया की विश्वसनीयता गिरी है। इसके तरफ से भी गलतियां हो रही हैं। मुद्दे की छानबीन किए बिना सिर्फ कहे पर किसी का मान-मर्दन शुरू कर देना उचित नहीं है। वहीं खबरों के चयन और उनकी सनसनीखेज प्रस्तुति भी गंध फैला रही है। आज मीडिया को आत्ममंथन करने और संतुलित होने की जरूरत है। उसका सभी के प्रति एक जैसा रवैया होना चाहिए। वहीं राजनीतिक पार्टियों को भी जिम्मेदार होना पड़ेगा। आप जब सत्ता में होते हैंतो मीडिया दुश्मन और जब सत्ता से बाहर होते हैं तो मीडिया दोस्त की तरह क्यों लगने लगता है? यह सवाल आप से भी है। केजरीवाल के प्रति एक आम धारणा यह है कि वे स्वयं को हमेशा सही मान कर चलते हैं। लिहाजा वे अपनी आलोचना सुनना पसंद नहीं करते हैं। वे नहीं चाहते हैं कि उन पर और उनकी पार्टी पर सवाल खड़े किए जाएं। मीडिया के प्रति उनके ताजा रुख से इस बात की पुष्टि होती है। मगर ऐसे आरोपों से वे अपना और अपनी पार्टी का ही नुकसान कर रहे हैं।
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