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Editorial : फ्री राशन का फैसला सही, ऑक्सीजन पर प्लान आए

कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के मद्देनजर कई राज्यों के अस्पतालों ने ऑक्सीजन आपूर्ति में कमी का हवाला देते हुए सरकार से ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ाने और इसकी पर्याप्त आपूर्ति की मांग की है। कुछ राज्यों से दवाई की कमी के मामले भी सामने आए हैं।

Editorial : फ्री राशन का फैसला सही, ऑक्सीजन पर प्लान आए
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों व शासन प्रमुखों के साथ ऑक्सीजन की कमी को लेकर बैठक अवश्य की, जिसमें उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन टैंकरों के परिवहन में लगने वाले समय को कम करने के लिए रेलवे और वायु सेना की मदद ली जा रही है, उन्होंने सभी राज्यों से साथ मिलकर काम करने और जीवन रक्षक दवाइयों तथा ऑक्सीजन संबंधित जरूरतों को पूरा करने के लिए आपस में सहयोग करने का आग्रह किया, साथ ही राज्यों से एक राष्ट्र के रूप में काम करने की अपील की, लेकिन उच्चतम न्यायालय के ऑक्सीजन और कोरोना के जरूरी दवाओं के उचित वितरण के लिए एक राष्ट्रीय योजना लाने के निर्देश पर किसी प्रकार का अमल नहीं दिखा। जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने ऑक्सीजन को लेकर नेशनल इमरजेंसी की बात की, इस बैठक से अपेक्षा थी कि केंद्र सरकार कोई रूपरेखा लेकर आएगी, पर ऐसा नहीं दिखा। कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के मद्देनजर कई राज्यों के अस्पतालों ने ऑक्सीजन आपूर्ति में कमी का हवाला देते हुए सरकार से ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ाने और इसकी पर्याप्त आपूर्ति की मांग की है। कुछ राज्यों से दवाई की कमी के मामले भी सामने आए हैं। मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री की पिछले पांच सप्ताह के भीतर यह तीसरी बैठक हुई है।

हालांकि राहत भरी दो बातें अवश्य हुईं। पहली, रक्षा मंत्रालय ने जर्मनी से 40 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट और 2400 लीटर प्रति घंटा उत्पादन करने की क्षमता वाले 23 ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र हवाई मार्ग से लाने का फैसला किया, इससे ऑक्सीजन आपूर्ति सुदृढ़ होगी। दूसरी, केंद्र सरकार ने एक बार फिर गरीब परिवारों को फ्री राशन देने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत अब राशन कार्डधारक मई और जून महीने में प्रति व्यक्ति 5 किलो ज्यादा चावल-गेहूं ले सकेंगे। इस फैसले से 80 करोड़ लाभार्थी लाभान्वित होंगे। इस पर सरकार को 26 हजार करोड़ खर्च आएगा। इससे पहले भी पिछले साल लॉकडाउन के दौरान केंद्र सरकार ने गरीबों को मुफ्त राशन देने का ऐलान किया था, पहले यह 30 जून 2020 तक के लिए लागू की गई थी, बाद में इसे नवंबर 2020 तक के लिए बढ़ा दी गई थी। उस वक्त सरकार ने दावा किया था कि इस योजना से करीब 81 करोड़ लोगों को राहत दी गई। पिछले साल लॉकडाउन के चलते देश में आर्थिक त्रासदी जैसे हालात थे। लाखों उद्योग धंधे बंद हुए, करोड़ों लोगों की रोजी छिन गई थी। इस बार ऐसा नहीं है, सरकार ने लॉकडाउन का ऐलान नहीं किया है, लेकिन राज्यों ने पाबंदियां इतनी सख्त की है कि आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ना तय है।

औद्योगिक राज्यों से फिर श्रमिकों का पलायन शुरू हो गया है। इस बार पिछले साल जैसे हालात नहीं हो, इसलिए सरकार ने समय रहते दो मोह मई व जून के मुफ्त राशन की घोषणा की है। हालांकि लाभार्थियों को राहत तभी मिलेगी जब मुफ्त राशन योजना सही तरीके जमीन पर उतरे। पिछले साल मुफ्त राशन योजना के क्रियान्वयन में खामियों के चलते झारखंड व मध्य प्रदेश में गरीबों की भूख से मौत हो गई थी, हालांकि प्रशासन ने इससे इनकार कर दिया था। कहने का तात्पर्य है कि कोरोना की दूसरी लहर से निपटने, ऑक्सीजन की कमी दूर करने व टीकाकरण अभियान में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार को उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार नेशनल प्लान लेकर आना चाहिए। साथ ही मुफ्त राशन योजना के क्रियान्वयन को त्रुटिहीन बनाना चाहिए।

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