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सतीश सिंह का लेख : कर्ज की मांग में गिरावट

जून तिमाही में बैंकों के लिए बड़े ऋण की मांग में 67 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई, जबकि बैंकों के पास ऋण देने के लिए पर्याप्त नकदी है। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के अनुसार भी अभी बैंकों में बहुत अधिक नकदी मौजूद है, क्योंकि लोग पैसे को कहीं लगाने का जोखिम नहीं उठा रहे।

सतीश सिंह का लेख : कर्ज की मांग में गिरावट
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सतीश सिंह

महंगाई दर में उछाल को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। 6 अगस्त को की गई समीक्षा में मौद्रिक नीति समिति ने एकमत से रेपो दर को 4 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया। साथ ही, रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर को 4.25 प्रतिशत और बैंक दर को 4.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया। हालांकि केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर नीतिगत दरों में कटौती की जा सकती है।

केंद्रीय बैंक के अनुसार चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर महीने के दौरान महंगाई की दर ऊंची रह सकती है। हालांकि दूसरी छमाही में इसमें गिरावट आने की संभावना है। रिजर्व बैंक के गवर्नर के अनुसार विविध उत्पादों की आपूर्ति की राह में अनेक रोड़े होने के कारण खाद्य एवं अन्य वस्तुओं के आदान-प्रदान में मुश्किलें आ रही हैं, जिससे इनकी कीमत में राष्ट्रीय स्तर पर उछाल देखा जा रहा है।

जून तिमाही में बैंकों के लिए बड़े ऋण की मांग में 67 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई, जबकि बैंकों के पास ऋण देने के लिए पर्याप्त नकदी है। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के अनुसार भी अभी बैंकों में बहुत अधिक नकदी मौजूद है, क्योंकि लोग पैसे को कहीं लगाने का जोखिम नहीं उठा रहे।केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत दरों में कटौती करने के बाद भारतीय स्टेट बैंक समेत अनेक सरकारी बैंकों ने ऋण के ब्याज दरों में कटौती की है, जिससे फिलवक्त ऋण ब्याज दर बहुत ही कम हो गई है। केनरा बैंक ने भी विभिन्न अवधि के लिए अपने कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर में 0.30 प्रतिशत की कटौती की है, जो 7 अगस्त से लागू होगी।

जून तिमाही में केवल 423 बड़े ऋण मंजूर किए गए, जबकि एक साल पहले यह संख्या 1,285 थी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 79 ऋण 500 करोड़ रूपये से अधिक के थे, जबकि पिछले साल 200 ऋण 500 करोड़ रूपये से अधिक के थे। बड़ा ऋण उसे माना जाता है, जो 50 करोड़ से अधिक का होता है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 3 जुलाई को समाप्त पखवाड़े में बैंक की क्रेडिट ग्रोथ 6.13 प्रतिशत थी, जबकि जमा में 11.04 प्रतिशत की वृद्धि दर रही। जानकारों के मुताबिक आगामी महीनों में भी कर्ज की वृद्धि दर कम रह सकती है, क्योंकि कोरोना महामारी के कारण आम एवं खास दोनों ऋण लेने से गुरेज कर रहे हैं। इन्हीं कारणों से निजी बैंकों की भी ऋण वृद्धि दर कम हो गई है। बंधन बैंक की ऋण वृद्धि दर 3 प्रतिशत है, जबकि बजाज फाइनेंस की दर में 77 प्रतिशत की कमी आई है।

नीतिगत दरों में हाल ही में की गई कटौती से अर्थव्यवस्था को काफी सहारा मिला है। इसी वजह से मई और जून महीने में अर्थव्यवस्था में थोड़ी बेहतरी आई है। हालांकि, तालाबंदी की तारीख में लगातार बढ़ोतरी से विकास की गाडी हिचकोले खाते हुए आगे की ओर अग्रसर है। इससे घरेलू मांग में भारी कमी आई है, आयात में गिरावट आई है। इससे व्यापार घाटे में कमी आ रही है,लेकिन यह स्थिति अस्थायी है।मौद्रिक समीक्षा में भारतीय रिजर्व बैंक ने नाबार्ड और नेशनल हाउसिंग बैंक को 10 हजार करोड़ रूपये की अतिरिक्त नकदी देने का फैसला किया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र में मांग में वृद्धि हो। तालाबंदी को चरणबद्ध तरीके से खोलने से नीतिगत दरों में की गई कटौती का फायदा आम आदमी और कारोबारियों दोनों को मिला है। पर्याप्त नकदी के प्रवाह से म्यूचुअल फंड को भी फायदा पहुंचा है।

मौद्रिक समीक्षा में भारतीय रिजर्व बैंक ने यह भी कहा कि तनावग्रस्त सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम को 31 मार्च 2021 तक ऋण पुनर्गठन का फायदा दिया जाएगा। साथ ही, रिजर्व बैंक कुछ ऋणों के पुनर्गठन के लिए विशेष विंडो भी मुहैया कराएगा। माना जा रहा है कि ऋण खातों का पुनर्गठन करने से एमएसएमईक्षेत्र को कुछ समय मिल जाएगा और उधमी ऋण खातों को नियमित करने में कामयाब हो सकेंगे। उधमियों और आम आदमी को कुछ राहत देने के लिए 31 मार्च 2021 तक गोल्ड ऋण के मामले में सोने की कीमत के 90 प्रतिशत तक बैंक ऋण दे सकेंगे की भी व्यवस्था रिजर्व बैंक द्वारा की गई है। इस व्यवस्था से एक बड़े वर्ग को राहत मिलने की उम्मीद है और अर्थव्यवस्था में तेजी आने के भी आसार हैं। यह जरुरी भी है, क्योंकि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में सकल घरेलू उत्पाद के ऋणात्मक रहने का अनुमान है। इतना ही नहीं, मार्च 2021 में समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष में भी जीडीपी के ऋणात्मक रहने की संभावना जताई गई है।

इसमें दो राय नहीं है कि केंद्रीय बैंक, बैंकिंग प्रणाली में सस्ती दर पर नकदी की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए कोशिश कर रहा है, लेकिन सिर्फ नकदी की उपलब्धता को यूटोपिया या सभी मर्जों का इलाज नहीं माना जा सकता है। सस्ती दर पर उपलब्ध पूंजी का इस्तेमाल बैंक तभी कर सकते हैं, जब ऋण की मांग में बढ़ोतरी हो। मौजूदा समय में कोरोना महामारी के कारण ऋण की मांग में भारी कमी आई है। साथ में, महंगाई में भी बढ़ोतरी हो रही है। इसलिए रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों को यथावत रखा है।

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