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नरेन्द्र सिंह तोमर का लेख : रामराज की ओर अग्रसर देश

देश को प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्र को एक ऐसा व्यक्तित्व मिला है जो अपनी दृढ़ संकल्पशक्ति और संवेदनशीलता के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत को पुन:स्थापित करने और भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए से जुटा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम सभी जिस दिशा में बढ़ रहे हैं वह निश्चित रूप से सुख, शांति, वैभव का एक आयाम है और इसे ही सच्चे शब्दांे में राम राज्य की स्थापना की ओर अग्रसर होना कहा जा सकता है।

नरेन्द्र सिंह तोमर का लेख : रामराज की ओर अग्रसर देश
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पीएम नरेंद्र मोदी

नरेन्द्र सिंह तोमर

नेतृत्व की क्षमता एवं शक्ति का परिचय उसकी दृढ़ संकल्प शक्ति, समग्रता, संवेदनशीलता, दूरदृष्टि रखकर लिए गए निर्णयों, सहकार की भावना और हर वर्ग के प्रति समदृष्टि से होता है। सर्वजन के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखकर उठाए गए कदम ही राष्ट्र के उज्जवल भविष्य की नींव रखते हैं। यह हमारा सौभाग्य है कि राष्ट्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में एक ऐसा नेतृत्व मिला है जिनके साथ संपूर्ण देश आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से कदमताल करता नजर आ रहा है। स्वयं को देश की 138 करोड़ जनता का प्रधानसेवक कहने वाले नरेंद्र मोदी एक ऐसे करिश्माई नेतृत्व हैं जो आपदा में भी अवसर तलाशते हैं।

विगत छह-सात माह से संपूर्ण विश्व कोविड-19 के रूप में एक गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। दुनिया की कई महाशक्तियों ने इस महामारी के आगे अपने घुटने टेक दिए हैं, लेकिन इस संकट से निपटने के लिए भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किए गए प्रयासों की विश्व में सराहना की गई है। लॉकडाउन का अनुशासित जनव्यवहार हो या बंद हुए काम-धंधों के कारण बेरोजगार हुए लाखों श्रमिकों के हाथ को काम देने निर्णय हो, नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सबकुछ निर्बाध और सुचारू रूप से संपन्न हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत का आह्वान किया है। यह कोरोना काल से उत्पन्न हुई परिस्थितियों से निपटने के परिपेक्ष्य में ही एक उद्यम नहीं है, अपितु देश को नई दिशा में ले जाने का सशक्त प्रयास है, जिसके दूरगामी परिणाम होंगे। प्रधानमंत्री के इस निर्णय में एक ओर जहां देश के कमजोर वर्ग की रोजगार की चिंता को दूर करने का माध्यम दृष्टिगोचर हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर दुनिया में औद्योगिक एवं व्यावसायिक क्षेत्र में आई मंदी की स्थिति में भारतीय उत्पादों के परचम लहराने का मंत्र भी छिपा हुआ है। 20 लाख करोड़ रुपये का यह पैकेज इतना समावेशी है कि इसमें देश के हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर लोकल फोर वोकल का मंत्र भी दिया है।

किसानों की आय दो गुना करने का संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिया है। इस दिशा में उनकी निर्णय क्षमता का परिणाम ही है कि आत्मनिर्भर भारत पैकेज के अंतर्गत एक लाख करोड़ रुपये का कृषि अवसंरचना फंड एवं देश में दस हजार कृषक उत्पादक समूहों के निर्माण का कार्य प्रारंभ हो गया है। खाद्यान्न के क्षेत्र में हम आत्मनिर्भर हुए हैं, रबी की पिछली फसल में हुए बंपर उत्पादन एवं इस बार खरीफ में हुई रिकाॅर्ड बुवाई सुखद भविष्य के संकेत दे रही है।

मोदी की समाज, देश और कमजोर वर्ग के प्रति संवेदनशीलता भी उनके निर्णयों में सदैव परिलक्षित होती है। कोरोना संकटकाल में गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से देश के लगभग 80 करोड़ लोगों तक 8 माह का निःशुल्क राशन पहुंचाने का मामला हो या गरीब कल्याण रोजगार अभियान और मनरेगा के माध्यम से बेरोजगार होकर अपने गांव लौटे प्रवासी श्रमिकों को काम दिलाने का निर्णय हो, उदारता से निर्णय लिए गए है। संकट के इस दौर में 20.65 करोड़ प्रधानमंत्री महिला जनधन खाता धारकों के खातों में तीन माह के लिए 500 रुपये प्रतिमाह की अनुग्रह राशि भेजी गई। इसके साथ ही 2.82 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं एवं दिव्यांगों के लिए पांच-पांच सौ रुपये की दो किश्तों में कुल 1000 रुपये की सहायता राशि जारी गई है। इस पर कुल व्यय 2815 करोड़ रुपए किए गए।

युगों से जिस राम राज्य का स्वप्न भारत भूमि सजाए बैठी थी, उसे धरा पर यथार्थ करने का उद्यम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रारंभ कर दिया है। विगत दिवस सात सौ वर्ष के कठिन संघर्ष एवं कई महापुरूषों के बलिदान के पश्चात अयोध्या में श्रीराम के भव्य मंदिर का भूमिपूजन हुआ है। सुप्रीमकोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के साथ-साथ यह अवसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के अथक प्रयासों का परिणाम है। राम शब्द में रा का तात्पर्य यदि राष्ट्र है और म का मंगल तो मोदी जी के भागीरथी प्रयासों से राम राज्य की दिशा में अग्रसर हो रहे राष्ट्र के मंगल का समय अब आ गया है।

मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार के अभूतपूर्व निर्णयों में 5 अगस्त 2019 का दिन ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में दर्ज हो गया है। इस दिन सरकार ने अनुच्छेद 370 तथा 35 ए को हटाने और जम्मू कश्मीर राज्य को जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के रूप में विभाजित कर दो केंद्र शासित प्रदेश बनाने की घोषणा की। एक देश, दो निशान, दो विधान अब अतीत की बात है और घाटी में शाति और विकास के चरण-चिन्ह नजर आने लगे हैं। डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अन्य महापुरूषों का स्वप्न श्री मोदी जी के नेतृत्व में साकार हो पाया है।

दुनिया के कई मुस्लिम देशों में तीन तलाक की प्रथा पर रोक है, लेकिन भारत में कुछ राजनीतिक शक्तियों ने इसे रोक रखा था। लाखों मुस्लिम बहनों के जीवन को गर्क करने वाली इस प्रथा से तब मुक्ति मिली जब 31 जुलाई 2019 को मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम को सरकार ने कानून का स्वरूप दे कर संपूर्ण देश में लागू कर दिया। नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प से हुआ यह निर्णय लाखों मुस्लिम बहनों के जीवन में एक सुखद बदलाव लेकर आया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए निर्णयों में 10 जनवरी 2020 का दिन भी इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। इस दिन भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून बनाकर देश में रह रहे लाखों शरणार्थियों नागरिकता का वो अधिकार दिया है जिस से वे सम्मान के साथ भारत में रह सकेंगे। पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान जैसे देशों से प्रताड़ित होकर भारत में शरणार्थी बने लाखों गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को राजनीतिक स्वार्थ के चलते नागरिकता का वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति एवं हर वर्ग की चिंता प्रधानमंत्री के इस कदम में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।

प्रधानमंत्री अपनी अनूठी संवाद शैली और आमजन को स्वयं से जोड़ लेने की कला से सदैव ही लोकप्रिय जननायक रहे है। वे किसी भी योजना के क्रियान्वयन में अधिकारियों एवं प्रशासनिक अमले से तो फीडबैक लेते ही हैं, जनता से भी संवाद करके योजनाओं के बारे में पूछते-परखते भी हैं। कठिन विषय को वे आमजन की भाषा में ढालकर ऐसे पेश करते हैं कि लोग स्वतः ही उससे जुड़ जाते है। प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्र को एक ऐसा व्यक्तिव मिला है जो अपनी दृढ़ संकल्पशक्ति और संवेदनशीलता के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत को पुनस्र्थापित करने और भारत को विश्वगुरू बनाने के लिए से जुटा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम सभी जिस दिशा में बढ़ रहे हैं वह निश्चित रूप से सुख, शांति, वैभव का एक आयाम है और इसे ही सच्चे शब्दों में राम राज्य की स्थापना की ओर अग्रसर होना कहा जा सकता है।

(यह लेखक के अपने विचार हैं)

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