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डाॅ. एलएस यादव का लेख : चीन का बढ़ता रक्षा बजट

चीन ने अपना आगामी रक्षा बजट घोषित करते हुए लगभग सात प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है। भारत के साथ लद्दाख सीमा पर तनातनी और अमेरिका के साथ चल रहे तनाव के बीच चीन ने अपना रक्षा बजट प्रस्तुत किया जिसमें उसने भारी बढ़ोत्तरी की है। 209 अरब डाॅलर की भारी भरकम रक्षा बजट की घोषणा की। चीन का यह रक्षा बजट भारत के रक्षा बजट से तीन गुना से भी ज्यादा है। चीन ने रक्षा बजट में वृद्धि को उचित ठहराते हुए यह भी कहा कि अमेरिका एशिया- प्रशांत क्षेत्र का सैन्यीकरण कर रहा है।

डाॅ. एलएस यादव का लेख : चीन का बढ़ता रक्षा बजट
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प्रतीकात्मक फोटो

डाॅ. एलएस यादव

मार्च माह के प्रथम सप्ताह में चीन ने अपना आगामी रक्षा बजट घोषित करते हुए लगभग सात प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है। भारत के साथ लद्दाख सीमा पर तनातनी और अमेरिका के साथ चल रहे तनाव के बीच चीन ने अपना रक्षा बजट प्रस्तुत किया जिसमें उसने भारी बढ़ोत्तरी की है। पांच फरवरी को उसके द्वारा पेश किए गए बजट में चीनी प्रधानमंत्री ली कछयांग ने देश की संसद के स़त्र के पहले दिन 209 अरब डाॅलर यानी लगभग 15 लाख करोड़ रुपये के भारी भरकम रक्षा बजट की घोषणा की। चीन का यह रक्षा बजट भारत के रक्षा बजट से तीन गुना से भी ज्यादा है। चीन का घोषित रक्षा बजट गत वर्ष की तुलना में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि की है। विदित हो कि चीन का पिछले वर्श 2020 का रक्षा बजट 196 अरब डाॅलर का था। चीन द्वारा विगत वर्श राश्ट्रीय सुरक्षा और सशस़़्त्र बलों के विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई थी।

चीन द्वारा उसके सैनिक खर्चों में यह बढ़ोत्तरी ऐसे समय की गई है जब एलएसी पर पिछले लगभग एक साल से चल रहा तनाव सैनिकों की वापसी के समझौते के बाद कम होने लगा है। हां अतना अवश्य है कि चीन का अमेरिका के साथ सैन्य एवं राजनीतिक तनाव बढ़ता ही जा रहा है। शायद इसीलिए चीन के रक्षा बजट ने पहली बार 200 अरब डाॅलर के आंकड़े को पार कर दिया है। हालांकि यह लगातार ऐसा छठा वर्ष है जब चीन के रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी का प्रतिशत इकाई अंक तक ही सीमित रहा। यहां गौरतलब बात यह भी है कि रक्षा बजट के मामले में चीन अभी भी अमेरिका से काफी पीछे है लेकिन इस घोषणा के बाद चीन अमेरिका के बाद रक्षा पर सबसे अधिक खर्च करने वाला दूसरा देश बन गया है। अमेरिका का रक्षा बजट चीन के मुकाबले अभी भी लगभग चार गुना ज्यादा है। अमेरिका ने वर्ष 2021 के लिए अपना रक्षा बजट 740 अरब डाॅलर यानी कि लगभग 54 लाख करोड़ रुपये घोषित किया है, जबकि भारत का रक्षा बजट इसी अवधि के लिए 65 अरब डाॅलर यानी 478000 करोड़ रुपये के लगभग है।

वर्ष 2019 में लगभग साढ़े सात प्रतिषत की बढ़ोत्तरी की करके चीन ने रक्षा बजट 1190 लाख करोड़ युआन अर्थात लगभग 177.61 अरब डाॅलर किया था। साल 2018 के लिए चीन का रक्षा बजट 11 खरब युआन से ज्यादा अर्थात 175 अरब डाॅलर (1139887 करोड़ रुपये) था। इससे पहले 2017 में चीन का रक्षा बजट 150.5 अरब डाॅलर का था। चीन ने वर्ष 2015 तक रक्षा के क्षेत्र में दोहरे अंकों की बढ़ोत्तरी की थी, लेकिन 2016 से वह अपने रक्षा बजट में हर साल दस प्रतिशत से कम की बढ़ोत्तरी कर रहा है। चीन ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बावजूद 2016 में रक्षा बजट को 7.6 प्रतिशत बढ़ाया था। इससे पहले 2015 में चीन का रक्षा बजट 145 अरब डाॅलर यानी 974762 करोड़ रुपये था। चीन ने 2011 से 2015 तक रक्षा बजट में सालाना वृद्धि औसतन 13 फीसदी की थी। उसने अपने रक्षा बजट में 2011 में 12.7 फीसदी, 2012 में 11.2 फीसदी एवं 2013 में 11 प्रतिशत से अधिक, साल 2014 में 12.2 प्रतिशत, 2015 में 10.1, 2016 में 7.6 एवं 2017 में सात प्रतिशत की वृद्धि की थी।

हाल के वर्षों में चीन ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए कई बड़े सैन्य सुधार किए हैं। इन सुधारों के तहत उसने दूसरों देशों में अपने प्रभाव का विस्तार करने के लिए नौसेना और वायु सेना को प्राथमिकता देते हुए उनका विस्तार किया। उसने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों की संख्या में भी तीन लाख तक की कटौती की है। इसके बावजूद 20 लाख की सैन्य संख्या बल के साथ पीएलए अब भी दुनिया की सबसे बड़ी सेना है।

चीन के इस कदम को सेना के आधुनिकीकरण के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। कोरोना काल की खराब आर्थिक स्थिति के बावजूद चीन ने रक्षा बजट में वृद्धि सैन्यीकरण के प्रयासों को तेजी देने के लिए ही की है। निश्िचत है कि वह अपनी सामरिक क्षमता बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। चीन ने रक्षा बजट में वृद्धि को उचित ठहराते हुए यह भी कहा कि अमेरिका एशिया- प्रशांत क्षेत्र का सैन्यीकरण कर रहा है। दक्षिण चीन सागर के सैन्यीकरण के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराना भ्रम पैदा करने के लिए है। चीन के नीति नियन्ताओं के मुताबिक सेना को अत्याधुनिक बनाए जाने के फोकस को देखते हुए रक्षा बजट बढ़ाया गया है। चीन का ध्यान स्टील्थ लड़ाकू विमान, विमानवाहक पोत सेटेलाइट रोधी मिसाइल समेत नई सैन्य क्षमता विकसित विकसित करने पर है। चीन अपना दबदबा बढ़ाने के लिए नौसेना की पहुंच को समुद्री क्षेत्रों में फैला रहा है। चीन के प्रधानमंत्री ली कछयांग का कहना है कि चीन अपनी सेना के प्रशिक्षण और युद्ध की तैयारी के सभी पहलुओं को बढ़ाएगा। हम अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों को सुरक्षित रखेंगे।

चीन का कहना है कि देश की संप्रभुता एवं सुरक्षा के लिए चीन की सैन्य क्षमता का विस्तार जारी रहेगा। इस साल के रक्षा बजट का मुख्य जोर नौसेना के विकास पर रहेगा। उसके रक्षा अधिकारियों के मुताबिक दक्षिण चीन सागर में अमेरिका की बराबरी में आने के लिए विमानवाहक पोत व पनडुब्बियों की जरूरत है। चीनी थिंक टैंक का कहना है कि हम देश की सुरक्षा एवं सशस्त्र बलों के सुधार के प्रयासों का समर्थन करेंगे। ठोस सुरक्षा और मजबूत सशस्त्र बल चीन की विश्वस्तरीय ताकत के अनुरूप है। यह हमारी सुरक्षा और विकास के हितों के पक्ष में है। हम सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा तैयारी बढ़ाएंगे ताकि हमारी संप्रभुता, सुरक्षा और विकास के हित सुनिश्िचत हो सकें। हम निश्िचत तौर पर अपनी समुद्री और वायु सुरक्षा मजबूत करेंगे। देश के सैन्य खर्च में बढ़ोत्तरी खासतौर पर नौसेना के लिए खर्च में वृद्धि का मकसद विदेशों में तेजी से विस्तारित होते देशी हितों की रक्षा करना है। एशिया प्रशांत क्षेत्र में अस्थिर सुरक्षा स्थिति देखते हुए उसके जवाब के तौर पर तैयार होना है।

चीनी नेतृत्व हमेशा से ही रक्षा खर्चों में बढ़ोत्तरी का समर्थन करता आया है। चीन ने पहले भी कहा कि देश की सुरक्षा जरूरतों, आर्थिक विकास और राजकोषीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए रक्षा बजट बढ़ाने का फैसला किया गया है। पड़ोसी देशों के साथ जमीनी और समुद्री सीमा पर टकराव के बीच चीन सैन्य आधुनिकीकरण के संबंध में विश्व की बड़ी सैन्य ताकत अमेरिका से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। इस तरह यह स्पष्ट हो जाता है कि चीन सैन्य क्षेत्र में दुनिया के शक्तिशाली देशों की तुलना में सबसे ऊपर रहना चाहता है। ऐसी स्थिति में भारत को चीन की रक्षा बढ़ोत्तरी से सजग रहने की आवश्यकता होगी।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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