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ऑक्सीजन कमी से मौत पर डाटा दुरुस्त करे केंद्र

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री को संसद में बयान देते वक्त सरकारी लाइन पढ़ने के बजाय थोड़ा अपने विवेक का भी इस्तेमाल करना चाहिए था। क्योंकि ऑक्सीजन की कमी और उसके चलते कोरोना मरीजों की मौत के आंकड़े अस्पतालों की सूचियों में उपलब्ध थे, इसके साथ ही मीडिया लगातार रिपार्टिंग कर रहा था।

ऑक्सीजन कमी से मौत पर डाटा दुरुस्त करे केंद्र
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : संसद में ऑक्सीजन से मौत पर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री डा. भारती प्रवीण पवार के बयान पर स्यापा का कोई औचित्य नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा? इसको तकनीकी रूप से देखने की जरूरत है। राज्यसभा में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य राज्यों का विषय है। उनकी ओर से कोरोना से हुई मौत की सूचना दी जाती है, लेकिन इसमें ऑक्सीजन की कमी से किसी मौत की सूचना नहीं है। दरअसल, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब देश में ऑक्सीजन की कमी को लेकर हाहाकार मचा हुआ था, उस वक्त सरकारी व निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के चलते जो मौतें हो रही थीं, उन मौतों को कोरोना से हुई मौत की श्रेणी में दर्ज किया जा रहा था। इसलिए मौत के सरकारी डाटा में ऑक्सीजन से हुई मौत का आंकड़ा ही दर्ज नहीं है। कायदे से यह हमारे डाटा सिस्टम्स की खामियां हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री को संसद में बयान देते वक्त सरकारी लाइन पढ़ने के बजाय थोड़ा अपने विवेक का भी इस्तेमाल करना चाहिए था। क्योंकि ऑक्सीजन की कमी और उसके चलते कोरोना मरीजों की मौत के आंकड़े अस्पतालों की सूचियों में उपलब्ध थे, इसके साथ ही मीडिया लगातार रिपार्टिंग कर रहा था। राज्य सरकारों को केंद्र को सही सूचना देनी चाहिए थी। संसद में जब बयान देने की बात थी तो केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री को थोड़ा होमवर्क कर लेना चाहिए था और बयान में स्पष्टता लानी चाहिए थी, इससे केंद्र सरकार की किरकरी नहीं होती। स्वास्थ्य मंत्री के बयान तकनीकी रूप से बेशक सही हो, लेकिन व्यवहारिक रूप से पचने वाला नहीं है। क्योंकि आंकड़े कहते हैं कि ऑक्सीजन की कमी से सैकड़ों मौतें हुईं।

गत 1 मई को दिल्ली के बत्रा हॉस्पिटल ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि उनके यहां ऑक्सीजन की कमी से 12 मरीजों की मौत हो गई है। 1 मई को ही दिल्ली के जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल ने दिल्ली हाईकोर्ट में बताया कि 24 अप्रैल को ऑक्सीजन की कमी से उनके अस्पताल में 25 लोगों की मौत हो गई। कर्नाटक हाईकोर्ट के बनाए पैनल ने 12 मई को सौंपी रिपोर्ट में कहा दूसरी लहर के दौरान चामराजनगर के जिला अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 36 लोगों की मौत हो गई। रिसर्चर्स, वकील और स्टूडेंट्स के एक इंडिपेंडेंट ग्रुप ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों का एक डेटाबेस तैयार किया है। डेटाबेस के मुताबिक इस साल 6 अप्रैल से 19 मई के बीच 43 दिनों में देश के 110 अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से 629 मरीजों की मौत हुई है। इस आंकड़े में वो मरीज शामिल नहीं हैं, जो घर पर क्वारंटीन थे, अस्पतालों ने भर्ती करने से मना कर दिया था या ऑक्सीजन की कमी की वजह से डिस्चार्ज कर दिए गए थे। दो मई को दिल्ली हाईकोर्ट को ऑक्सीजन की कमी पर सुनवाई के दिन कहना पड़ा था कि पानी सिर के ऊपर जा चुका है। अप्रैल में भी एक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिकारियों से कहा था कि 'चाहे मागों, उधार लो, चोरी करो या इम्पोर्ट करो। पर शहर के ऑक्सीजन की जरूरत को पूरा करो।' पीएम नरेंद्र मोदी ने 16 अप्रैल और 22 अप्रैल को ऑक्सीजन की कमी को लेकर दो बैठकें की थीं।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट में बताया कि ऑक्सीजन की मांग पूरी करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। इन सब तथ्यों से साबित होता है कि दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन का भारी कमी थी और सैकड़ों कोरोना मरीजों की ऑक्सीजन की कमी के चलते मौत हुई। इसलिए केंद्र सरकार के पास अगर ऑक्सीजन की कमी से मौत का डाटा नहीं है तो इसे दुरुस्त करना चाहिए, ताकि जिम्मेदार लोगों को कटघरे में खड़ा किया जा सके। डाटा सही होगा, तभी हम अपनी कमियों को समझेंगे और उन्हें दूर करने का प्रयास करेंगे।

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