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CBSE Result 2019 : सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार की जरूरत

सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में खासा सुधार हो रहा है, वे अब न केवल प्राइवेट स्कूलों से मुकाबला कर रहे हैं बल्कि उन्हें पछाड़ भी रहे हैं। पहले दस जमा दो के परीक्षा परिणाम में सरकारी स्कूलों के बच्चे प्राइवेट स्कूलों से आगे रहे, अब दसवीं में भी सरकारी ने प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ दिया।

CBSE Result 2019 : सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार की जरूरत
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सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में खासा सुधार हो रहा है, वे अब न केवल प्राइवेट स्कूलों से मुकाबला कर रहे हैं बल्कि उन्हें पछाड़ भी रहे हैं। पहले दस जमा दो के परीक्षा परिणाम में सरकारी स्कूलों के बच्चे प्राइवेट स्कूलों से आगे रहे, अब दसवीं में भी सरकारी ने प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ दिया।

हर बार की तरह इस वर्ष भी केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय का रिजल्ट सबसे अच्छा रहा है। केवी के 99.47% बच्चे सफल रहे। जवाहर नवोदय विद्यालय के 98.57% बच्चे और जबकि स्वायत्त संस्थानों के 94.15% छात्र सफल रहे।

इस साल सीबीएसई 10वीं परीक्षा लिए 18 लाख से अधिक बच्चों ने हिस्सा लिया था। जिनमें से 91.1% ने परीक्षा में सफलता हासिल की। दस जमा दो की तरह ही सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने 10वीं कक्षा के रिजल्ट में भी सरप्राइज दे दिया।

सोमवार को पहले से रिजल्ट घोषित किए जाने की कोई सूचना नहीं थी, लेकिन फिर अचानक रिजल्ट 3 बजे आने की खबर आई, जबकि सीबीएसई ने परीक्षा परिणाम करीब 2 बजे ही जारी कर दिया। इस परिणाम में एक खास बात यह भी रही कि लड़के मेरिट लेने में तो लड़कियों से पीछे नहीं रहे,

लेकिन पास प्रतिशत में बाजी हार गए। 13 बच्चों को 500 में 499 अंक आए हैं। सिद्धांत पेंगोरिया, दिव्यांश वाधवा, योगेश कुमार गुप्ता, अंकुर मिश्रा, वत्सल वार्ष्णेय, आर्यन झा, इश मदन, मान्या, तारु जैन, भावना एन शिवादास, दिवजोत कौर जग्गी, अपूर्वा जैन और शिवानी लाठ ने यह उपलब्धि हासिल की।

रैंक दो पर 498 अंकों के साथ 24 बच्चे हैं और तीसरे स्थान 497 मार्क्स के साथ 58 बच्चे हैं। रैंक एक के 13 बच्चों में से छह छात्राएं हैं और सात छात्र हैं। पास होने के मामले में लड़कियों का प्रतिशत लड़कों की तुलना में ज्यादा है। लड़कों से 2.31% ज्यादा 92.45% लड़कियां सफल रही हैं।

सवा दो लाख स्टूडेंट्स के 90% से अधिक और 57,256 स्टूडेंट्स ने 95% से अधिक मार्क्स नंबर लिए हैं। अगर क्षेत्रवार रिजल्ट देखें तो इस बार त्रिवेंद्रम पहले 99.85%, चेन्नै दूसरे 99%, और अजमेर रीजन तीसरे 95.89%, नंबर पर रहे। चौथे स्थान पर पंचकूला और पांचवे स्थान पर प्रयागराज क्षेत्र रहे हैं।

10वें स्थान पर गुवाहाटी रिजन रहा जहां से 74.49% बच्चे सफल रहे। इस बार 92.45% लड़कियां और 90.14% लड़के परीक्षा में सफल रहे। इस परीक्षा परिणाम में एक खास बात यह भी रही कि इस बार 94.74% ट्रांसजेंडर बच्चों ने भी सफलता प्राप्त की है।

परीक्षा परिणाम सबसे खास और सुखद बात यह भी रही कि 10वीं के नतीजों में 5 साल से चल रहा गिरावट का दौर थम गया है। बीते पांच वर्षों से मेरिट पाने वालों बच्चों की संख्या में तो सुधार हुआ, लेकिन पास प्रतिशत लगातार गिर रहा था। इस बार 2018 के मुकाबले रिजल्ट में 5 फीसदी का सुधार आया है।

यह एक अच्छा संकेत माना जा सकता है। हालांकि उनकी संख्या नाममात्र ही है जिन्होंने परीक्षा में हिस्सा लिया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। अगर कोई ऐसा बच्चा है माता-पिता और परिजनों को चाहिए कि वे उसका हौसला बढ़ाएं। ऐसे बच्चों को डराएं-धमकाएं नहीं और न ही उन्हें अकेला छोड़ें।

उन्हें समझाएं कि परिक्षा परिणाम से निराश न हों और न ही आगे पढ़ने का विचार छोड़ें, क्योंकि ऐसा करना बुद्धिमानी नहीं है। फेल होने पर हार नहीं माननी चाहिए। इस परिणाम से शिक्षा लें और आगे बढ़े। अगर दिल से मेहनत करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी।

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