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ईसाई मठों की दास्तां है ''खाली नाम गुलाब का''

अंबर्तों इको की ख्याति भाषाविद् के साथ-साथ एक उपन्यासकार भी रहे हैं।

ईसाई मठों की दास्तां है
ईसाई मठों की दास्तां
अंबर्तों इको की ख्याति भाषाविद् के साथ-साथ एक उपन्यासकार भी रहे हैं। वे उपन्यास के बारे में अपना मत इस तरह देते हैं ‘जो दुनिया कथाकार चुनता है, जो घटनाएं उसमें होती हैं, वे उसकी लय, शैली और भाषिक चुनाव को निर्धारित करती है।’ और वे अपने मत की रक्षा अपने उपन्यास ‘द नेम आॅफ द रोज’ में भी करते हैं। अभी हाल ही में मदन सोनी ने इको के इस पहले उपन्यास का हिंदी अनुवाद ‘खाली नाम गुलाब का’ शीर्षक से किया है। अनुवादक ने इस उपन्यास की असाधारण ऐंद्रियता को हिंदी में सफलतापूर्वक बरकरार रखा है। पाठक को लगता है वो यह उपन्यास मूल भाषा में ही पढ़ रहा है। इस उपन्यास में चौदहवीं शताब्दी के ईसाई मठ में उस जगत के धर्म परीक्षणों और धर्म-युद्धों का रोमांचकारी घटनाओं का वृत्तांत है। इस उपन्यास का मुख्य पात्र ब्रदर विलियम है, जो संसार के रहस्य भेदने की कोशिशों में लगा है।
पुस्तक- खाली नाम गुलाब का
लेखक- अंबर्तो इको
अनुवाद-मदन सोनी
मूल्य- 800 सौ रुपए
प्रकाशक- राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली
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