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डॉ. मोनिका शर्मा का लेख : महिलाओं के लिए खतरा बनती बर्बर मानसिकता

दुष्कर्म कोई साधारण अपराध नहीं है। यह पीड़िता को हर तरह से पीड़ा पहुंचाने वाला दुर्व्यवहार है। नतीजतन ऐसे वाकये कई मोर्चों पर चिंता बढ़ाने वाले हैं। ऐसी हर घटना के निशान कहीं न कहीं पूरे समाज की सोच पर चस्पा हो जाते हैं। ऐसी घटनाएं सिर्फ पीड़िता की जिंदगी नहीं ही छीनतीं बल्कि सभी महिलाओं के जीवन को भय और असुरक्षा की कितनी ही आशंकाओं की अनचाही पीड़ा दे जाती हैं इंसानों के हैवान बन जाने के ऐसे उदाहरण समाज के बीमार और बदरंग होते चेहरे को दिखाते हैं। देश की आर्थिक राजधानी और सबसे सुरक्षित माने जाने वाले महानगर में हुई यह दरिंदगी दुष्कर्म की घटना भर नहीं कही जा सकती है।

डॉ. मोनिका शर्मा का लेख : महिलाओं के लिए खतरा बनती बर्बर मानसिकता
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डॉ. मोनिका शर्मा

डॉ. मोनिका शर्मा

बीते डेढ़ साल की आपदा में जीवन के हर पहलू पर आई मुसीबत के बावजूद समाज में अमानवीय सोच और बर्बर करतूतें भी बदस्तूर जारी हैं| गाहे-बगाहे ऐसी घटनाएं सामने आ ही जाती हैं जो इंसानों के असभ्य बर्ताव और निर्दयी चेहरे की बानगी बनती हैं। बताती हैं कि वहशी सोच को यह संकट भी संवेदनाओं से नहीं जोड़ पाया है| जीवन की अनिश्चिता भी सभ्य बनने का पाठ नहीं पढ़ा सकी है। मुंबई के साकीनाका में हुई दरिंदगी ने दिल्ली के निर्भया कांड की यादें ताजा कर दी। मुंबई की महिला के साथ हुई दिल दहला देने वाली दुष्कर्म की घटना महिलाओं के प्रति शोषण की सोच का ही नहीं हद दर्जे के अमानवीय व्यवहार का भी उदाहरण है। इस घटना में भी साल 2012 के दुर्भाग्यपूर्ण निर्भया कांड के समान ही महिला के साथ दुर्व्यवहार किया गया है। गौरतलब है कि मुंबई में हुई इस दर्दनाक घटना में भी दुष्कर्म के बाद महिला के निजी अंगों में लोहे की रॉड से वार किया गया है। क्रूरता से मारपीट और चाकुओं का वार करने वाला आरोपी सीसीटीवी फुटेज में पीड़िता की बेरहमी से पिटाई करता दिख भी रहा है। बेहोशी की हालत में सड़क पर गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली महिला ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया। रूह कंपा देने वाली इस हैवानियत ने एक बार फिर औरतों को लेकर असंवेदनशील सोच और आदिम व्यवहार को सामने लाकर रख दिया है। यही वजह है देश की आर्थिक राजधानी और सबसे सुरक्षित माने जाने वाले महानगर में हुई यह दरिंदगी दुष्कर्म की घटना भर नहीं कही जा सकती है।

शारीरिक शोषण के साथ ही मानसिक आघात पहुंचाने और शरीर को क्षत-विक्षत कर देने का यह क्रूर व्यवहार वाकई भयावह है। यौन शोषण की कुत्सित सोच के जुड़े हिंसक और उन्मादी व्यवहार को दर्शाने वाली ऐसी घटनाएं समाज को डराने वाली और कुत्सित सेाच दिखाने वाली हैं। इंसान के अमानवीय होते जाने का उदाहरण हैं| आमजन को असहाय महसूस करवाने वाली हैं। बेटियों के भविष्य को लेकर डराती हैं। यह विडंबना ही है कि वैश्विक स्तर पर इंसान के जीवन को चुनौती देने वाले इस कोरोना आपदा काल में भी औरतों के साथ होने वाली बर्बरता कम नहीं हुई है| दुर्भाग्यपूर्ण यह भी कि ऐसे वाकये बढ़ ही रहे हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग के मुताबिक साल 2021 की शुरुआत से लेकर अगस्त महीने तक महिलाओं के खिलाफ दर्ज होने वाली शिकायतों की संख्या 19,953 रही है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के मुकाबले 6,335 ज्यादा है। बीते साल इस अवधि में महिलाओं के खिलाफ 13,618 शिकायतें दर्ज की गई थीं। गौरतलब है कि इन्हीं दिनों जारी राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़े घर हो या बाहर, महिलाओं के खिलाफ बढ़ रही कुत्सित मानसिकता की ही तसदीक करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक देश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या में न केवल बढ़ोतरी दर्ज की गई है बल्कि साल 2021 के पिछले आठ महीनों में महिलाओं के खिलाफ अपराध की शिकायतों में 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। महिला आयोग के मुताबिक इस साल आई शिकायतों में 7,036 शिकायतें गरिमामयी जीवन जीने के अधिकार के प्रावधान के तहत दर्ज की गईं हैं। साथ ही 4,289 शिकायतें घरेलू हिंसा और 2,923 शिकायतें वैवाहिक जीवन में उत्पीड़न या दहेज संबंधी उत्पीड़न की रही हैं | साइबर अपराध से जुड़ीं 585, छेड़छाड़ की घटनाओं को लेकर 1,116 और दुष्कर्म और दुष्कर्म की कोशिश के संबंध में 1,022 शिकायतें महिला आयोग को मिली हैं। उत्तर प्रदेश से 10,084, दिल्ली से 2,147, हरियाणा से 995 और महाराष्ट्र से 974 शिकायतें मिलीं हैं।

यह वाकई चिंतनीय है कि दूर-दराज़ के गांव हों या मुंबई दिल्ली जैसे महानगर, महिलाएं असुरक्षित परिवेश में ही जीने को विवश हैं। दरिंदगी और दुर्व्यहार के वाकये हर उम्र की स्त्रियों के साथ हो रहे हैं। बीते दिनों महाराष्ट्र के ही पुणे में एक नाबालिग बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। शिक्षा, कामकाज या दूसरी जिम्मेदारियों के लिए घर से निकलने वाली औरतों के लिए यह वाकई चिंतनीय हो गया है कि सुरक्षित समझे जाने शहरों में भी यह बर्बरता होने लगी है| आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के लिए सहज सुरक्षित परिवेश वाला शहर मानी जाने वाली मायानगरी में भी मुंबई पुलिस ने साल 2019 में दुष्कर्म के 1,015 मामले दर्ज किए थे जबकि 2018 में शहर में इनकी संख्या 889 थी। वर्ष 2019 में दुष्कर्म की घटनाओं के मामलों में 14 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है। यकीनन यह डराने और चेताने वाले आंकड़े हैं क्योंकि आधी रात को भी घर से निकलने पर मुंबई में महिलाओं को अपनी सुरक्षा का डर नहीं सताता था। यह शहर इस के बात के लिए देश भर में जाना जाता है। यह सुरक्षित परिवेश मायानगरी में देश के हर हिस्से से आने वाली महिलाओं को खुलकर जीने और अपने सपने पूरे करने की हिम्मतअ और भरोसा देता रहा है। तकलीफ़देह ही है ऐसे मामले इस भरोसे को तोड़ने वाले हैं। औरतों के आगे बढ़ने की राह रोकने वाले हैं| होना तो यह चाहिए कि धीरे-धीरे असुरक्षित समझे जाने वाले क्षेत्रों में भी औरतों के लिए सहज सहयोगी परिवेश बनता पर अब तो सुरक्षित शहरों में भी ऐसे वाकये हो रहे हैं|

अगर गहराई से देखा-समझा जाए तो दुष्कर्म कोई साधारण अपराध नहीं है| यह पीड़िता को हर तरह से पीड़ा पहुंचाने वाला दुर्व्यवहार है| नतीजतन ऐसे वाकये कई मोर्चों पर चिंता बढ़ाने वाले हैं| ऐसी हर घटना के निशान कहीं न कहीं पूरे समाज की सोच पर चस्पा हो जाते हैं। ऐसी घटनाएं सिर्फ पीड़िता की जिंदगी नहीं ही छीनतीं बल्कि सभी महिलाओं के जीवन को भय और असुरक्षा की कितनी ही आशंकाओं की अनचाही पीड़ा दे जाती हैं इंसानों के हैवान बन जाने के ऐसे उदाहरण समाज के बीमार और बदरंग होते चेहरे को दिखाते हैं| यह बताते हैं कि कुत्सित सोच वाले लोगों को न समाज की चिंता है और ना कानून का भय और इन्सान तो वे हैं ही नहीं| जरूरी है कि ऐसे मामलों को अंजाम देने वालों को कठोरतम सजा देने का प्रावधान हो| महिलाओं की अस्मिता को ठेस पहुंचाने और जीवन छीन लेने वाले ऐसे दरिंदों को त्वरित कानूनी कार्रवाई कर सख्त सजा दी जानी चाहिए।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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