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अतुल चतुर्वेदी का व्यंग्य : विवादों में सुर अलाप

मौसम कोई भी रहा हो पतझड़ का या वसंत का उनका विवादी सुर सदा ही गूंजता रहता है

अतुल चतुर्वेदी का व्यंग्य : विवादों में सुर अलाप

पहले वे फरियादी थे फिर छवि सुधारने के लिए संवादी हुए। अब धीरे धीरे विवादी हो गए हैं। विवाद और उनका गहरा नाता है। कभी विवाद उनको पकड़ लेते हैं तो कभी वे स्वयं को विवाद से सहर्ष जोड़ लेते हैं। मौसम कोई भी रहा हो पतझड़ का या वसंत का उनका विवादी सुर सदा ही गूंजता रहता है । उन्हें इसे छेड़ने में महारत हासिल है ।

लंबे विरोध की साधना और आक्रोश के भावों को पालते हुए उन्होंने इसे साधा है। आप चाहें तो उन्हें वतर्मान लोकतंत्र का स्टंट हीरो भी कह सकते हैं। उनका तरकश नई- नई उपमाओं और व्यंग्य बाणों से भरा रहता है। वे कभी इस बात की परवाह नहीं करते कि श्रोताओं को क्या पसंद है। दूसरे शब्दों में कहें तो उन्होंने कभी सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए समझौता नहीं किया ।

बल्कि अपना अलग वर्ग तैयार किया है। जो हमेशा तख्तियां उठाए और मोमबत्तियां जलाए तैयार खड़ा रहता है। वे जानते हैं कि विरोध की राजनीति के खतरे भी हैं और फायदे भी। लेकिन फिलहाल वे फायदे की स्थिति में हैं और टीआरपी बढा रहे हैं । वे मीडिया की हाइप भी बटोरते हैं और उसको कोसते भी हैं।

वे जानते हैं कि इस राजनीति में कभी थप्पड़ भी खाने पड़ते हैं और कभी माफी भी मांगनी भी पड़ जाती है। लेकिन हमारे विवादीलाल कभी नहीं घबराते। वे शांत जल में भी विवाद की हलचल पैदा कर सकते हैं। यही उनकी प्रतिभा है और यही कला भी उनकी शारीरिक और मनोरचना विरोध के पंचतत्व से ही हुयी है ।

वे जब छेड़ेंगे विवादी सुर में आलाप ही छेड़ेंगे। सौभाग्य से उन्हें ऐसे अवसर उपलब्ध भी हो जाते हैं और वे उसे हाथोंहाथ बटोर भी लेते हैं बिना चूक किए । विवादित होने के अपने लाभ हैं सामने वाला पहले ही रक्षात्मक मुद्रा में आ जाता है । विवादित होने से प्रचार भी ब्याज में मिल जाता है और गलतियों पर भी जनता का ध्यान कम जाता है।

विवाद के सुर में जो कशिश है वो संवाद और सहकार के सुर में कहां। जब चाहें जहां चाहें अपना विवादी सुर छेड़ दीजिए , देखिए हजारों लाइक तो मिल ही जाएंगे। कुछ उत्साहधर्मी आपके फैंस भी बन जाएंगे। आजकल फिल्म हो या किताब। राजनीति हो या खेल विवाद का स्टंट सीन जरूरी है। ये रियलटी का वो प्राण तत्व है जो आपके प्रोफेशन में वो ऊर्जा भर देगा जिसे आप आजीवन भुना सकते हैं। हमारे विवादीलाल भी शिल्पी कम मूर्तिभंजक ज्यादा हैं।

सिंहासन हो या सड़क वे अपना पैर पटकने वाला और बांह चढ़ाऊ अंदाज वे नहीं छोड़ते । आजकल उनका विवादी सुर लोकप्रिय है। उसे इतने हिट मिल रहे हैं कि हमारे आई ओपनर तक हिट विकेट हो रहे हैं । आप भी उनके विवादी सुर में अपना सुर मिलाइए न । मिले सुर हमारा तुम्हारा तो एक तूफान खड़ा हो न्यारा ..।

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