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Assembly Election Results Analysis : कहीं खुल न जाए पोल

पांच राज्यों के चुनाव संपन्न होते ही देश के खबरिया चैनलों ने एग्जिट पोलों की बौछार कर दी। इस बार ज्यादातर चैनलों के आंकलन विपक्षी पार्टी यानी कांग्रेस की तरफ हैं जबकि सत्ताधारी पार्टी को पिछड़ता दिखाया गया है।

Assembly Election Results Analysis : कहीं खुल न जाए पोल
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पांच राज्यों के चुनाव संपन्न होते ही देश के खबरिया चैनलों ने एग्जिट पोलों की बौछार कर दी। इस बार ज्यादातर चैनलों के आंकलन विपक्षी पार्टी यानी कांग्रेस की तरफ हैं जबकि सत्ताधारी पार्टी को पिछड़ता दिखाया गया है। चुनाव परिणाम आज यानी मंगलवार को आने हैं, लेकिन एग्जिट पोल ने दोनों प्रमुख सियासी दलों की धड़कने बढ़ा दी हैं।

हालांकि कांग्रेस एग्जिट पोल के मुताबिक उनके रुझानों पर ही जश्न मनाने में लग गई है तो वहीं भाजपा नेताओं के मांथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। पार्टी अभी से मनन-मंथन में लग गई है। दरअसल भाजपा इन पांच राज्यों के चुनाव को ही आगामी लोकसभा चुनाव का सेमीफाइन मानकर चल रही है। क्योंकि उनकी तैयारियां लोकसभा को ध्यान में रखकर की थी।

अगर एग्जिट पोल सही साबित हुए तो भाजपा को नए सिरे से चुनाव की रणनीति बनानी पड़ेगी। हालांकि भाजपा आश्वस्त है कि परिणाम उनके ही पक्ष में आएंगे। अब सवाल उठता है कि क्या इस बार के भी एग्जिट पोल पूर्व की तरह झूठे साबित होंगे या फिर उनकी विश्वसनीयता बची रहेगी। राजस्थान, मध्यप्रदेश, मिजोरम, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ पर न्यूज चैनलों के जारी एग्जिट पोल की विश्वसनीयता एक बार फिर दांव पर लगी है।

अगर इस बार भी ये बेअसर साबित हुए तो इनसे आमजन का विश्वास लगभग खत्म हो जाएगा। दरअसल पूर्व के कई एग्जिट पोल हवा-हवाई साबित हुए हैं। तीन साल पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम में सभी चैनल मुंह की खा चुके हैं। उस वक्त सभी चैनलों के एग्जिट एकदम झूठे साबित हुए थे। दरअसल विगत कुछ बर्षों से एग्जिट पोलों की साख पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

क्योंकि चैनलों का अतित्साह होना और जल्दबाजी के होने के चलते पिछले कुछ सालों से इन एग्जिट पोलों की ही पोल खुल रही है। मालूम हो जब दिल्ली में विधानसभा के चुनाव हुए तो अधिकतर चैनलों ने भाजपा को जीतता हुआ दर्शाया था, लेकिन रिजल्ट आने के बाद पता चला की चैनल वाले जिस पार्टी की सरकार बना रहे थे वह सिर्फ तीन ही सीटों पर सिमट गई।

खैर, अतीत को ध्यान में न रखकर खबरिया चैनल एक बार फिर पांच राज्यों के विधानसभा के अंतिम चरण का चुनाव खत्म होने का इंतजार कर रहे थे। राजस्थान और तेलंगाना में शाम पांच बजे जैसे ही मतदान खत्म हुआ। सभी चैनलों ने एक साथ खोल दिए थे, एक के बाद एक एग्जिट पोल की झड़ी लग गई। सभी चैनलों ने अपने-अपने अनुमानों के आधार पर आंकलन पेश किए।

परिणाम आने से पहले ही सभी चैनलों ने कांग्रेस की तीन राज्यों में सरकार बनाने के रूझान परोस दिए। कांग्रेस के अलावा इस बार किसी भी चैनल ने अपने एग्जिट पोलों में दूसरी पार्टियों को आसपास भी नहीं ठहरने दिया। कई चैनल इन राज्यों से भाजपा को बेदखल कर रहे हैं। राजस्थान में भाजपा एक तिहाई सीट आने का दावा कर रही हैं, लेकिन चैनल उन्हेें हारता हुआ दिखा रहे हैं।

राजनीतिक पंडितों का कहना है अगर भाजपा हारती है तो उसका मुख्य कारण राममंदिर पर जनता से वादाखिलाफी माना जाएगा। कुछ का यह भी कहना है कि राज्य में वसुंधरा सरकार द्वारा आम आदमी का विश्वास न जीत पाना भाजपा की हार का कारण बनेगा। दरअसल मौजूदा पांच विधानसभाओं के चुनाव परिणाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केंद्र व राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है।

निश्चित रूप ये हार-जीत 2019 का रास्ता साफ करेगी। भाजपा ने जीत के लिए अपनी पूरी मशीनरी लगा रखी थी, पूरी ताकत झोंक दी थी। परिणाम कल आएंगे, लेकिन उससे पहले ही एग्जिट पोल्स ने भाजपा को परेशानी में डाल दिया है। फिलहाल भाजपा एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं कर रही है। अब परीक्षा चैनलों के एग्जिट पोलों की है। सभी खबरिया चैनलों की साख दांव पर लगी हुई है।

अगर परिणाम एग्जिट पोलों से विपरित हुए थे तो चैनलों की विश्वसनीसता खतरे में पड़ जाएगी। भविष्य में कोई भी एग्जिट पोलों पर विश्वास नहीं करेगा। देखा जाए तो एग्जिट पोल्स ने चुनाव परिणामों का क्रेज खत्म कर दिया है। एक जमाना था लोग परिणाम की तारीख का इंतजार करते थे, लेकिन एग्जिट पोल पहले ही खलल डाल देते हैं। दरअसल हमारे लिए एग्जिट पोल्स की सच्चाई को जानना बहुत जरूरी होता है।

एग्जिट पोल्स महज अनुमान भर होते हैं। रिसर्च और सर्वे एजेंसियों के साथ मिलकर न्यूज चैनलों द्वारा जारी होने वाला एग्जिट पोल मतदान केंद्रों में पहुंचने वाले मतदाताओं और मतदान संपन्न होने के बाद के अनुमानों पर आधारित होता है। इनसे संकेत मिल सकता है कि हर चरण में मतदान के बढ़े प्रतिशत और मतदाताओं के रुख के आधार पर 11 दिसंबर को क्या नतीजे निकलेंगे।

एग्जिट पोल के नतीजों से सिर्फ चुनावों की हवा का रुख पकड़ में आता है। एग्जिट स्थिति नहीं। अंतिम परिणाम से 11 तारीख को ही पता चलेगा कि किस दल का राजनीतिक भविष्य अंधेर में समाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का राजनीतिक करियर इस चुनाव के रिजल्ट पर टिका हुआ है। चुनाव हारते हैं तो राहुल गांधी को बड़ा सदमा लग सकता है। पूरी पार्टी का आत्मविश्वास डगमगा सकता है।

इसलिए ये कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है। 2019 में कांग्रेस का भविष्य क्या होगा, इस बात का निर्भर करेगा कि मंगलवार को आ रहे परिणामों से क्या निकलता है। अगर एग्जिट पोल पर एक बार गौर करें तो कांग्रेस की स्थिति फिलहाल मजबूत दिखाई पड़ती है। कांग्रेस भगवान का शुक्र बना रही है कि एग्जिट पोल जैसे दिखाए जा रहे हैं, रिजल्ट भी वैसा ही रहे।

अगर इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अच्छा करती है तो आगामी लोकसभा चुनाव उनके लिए बहुत आसान हो जाएगा। क्योंकि राममंदिर निर्माण को लेकर सरकार इस वक्त चारों ओर से घिरी नजर आ रही है। संत समाज की नाराजगी हो या किसानों का गुस्सा। हर तरह से सरकार परेशानी में पड़ी हुई है। एग्जिट पोल ने परेशानी और बढ़ा दी है।

हालांकि भाजपा के शीर्ष नेता पूरी तरह से आश्वस्त दिखाई पड़ रहे हैं। उनको कहीं न कहीं विश्वास है कि जिस तरह से उनकी तैयारी रही है उसके मुताबिक रिजल्ट उनके ही पक्ष में आएगा। वहीं कांग्रेस यह मानकर चल रही है कि भाजपा से देश परेशान है इसलिए देश की जनता विकल्प के तौर पर फिर उन्हें ही चुन रही है। खैर, दावों की हकीकत की सच्चाई का पता आज ही चलेगा, जब ईवीएम मशीन का पिटारा खुलेगा। कहीं ऐसा न हो कि एग्जिट पोल की ही पोल खुल जाएगा और नजीते कुछ और आएं।

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