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अरविंद जयतिलक का लेख : फन फैलाता अलकायदा

अलकायदा के नौ संदिग्धों की पश्चिम बंगाल और केरल (Kerala) से गिरफ्तारी के साथ ही जो खुलासा हुआ वह बेहद डरावना है कि उन आतंकियों की साजिश दिल्ली को दहलाने की थी। इतनी बड़ी साजिश से साफ है कि इस संगठन के अन्य सदस्य भी देश में छिपे हो सकते हैं। अलकायदा का यह उभार दक्षिण एशिया के लिए चिंता का विषय है। अभी तक अलकायदा पाक और अफगानिस्तान (Afghanistan) में ही सक्रिय रहा। यह मानने में हर्ज नहीं कि उसने भारतीय उपमहाद्वीप में फन फैलाना शुरू कर दिया है।

अरविंद जयतिलक का लेख : फन फैलाता अलकायदा
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा आतंकी संगठन अलकायदा के नौ संदिग्धों की पश्चिम बंगाल और केरल से गिरफ्तारी (Arrest) रेखांकित करने के लिए पर्याप्त है कि देश की सुरक्षा एजेंसियां बेहद सतर्क और सजग हैं और उन्हें आतंकियों के मंसूबे पर पानी फेरना अच्छी तरह आता है। यह बेहद डरावना है कि आतंकियों की मंशा दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई हिस्सों एवं अहम प्रतिष्ठानों को दहलाने की थी।

संदिग्ध आतंकियों के पास से जेहादी साहित्य, देशी बंदूक, नुकीले हथियार, स्थानीय स्तर पर बने कवच, विस्फोटक बनाने का सामान, डिजिटल डिवाइस, स्विच, बैटरियां और दस्तावेजों की बरामदगी प्रमाणित करती है कि उनकी मंशा बेहद खतरनाक (Dangerous) थी। जांच एजेंसी की मानें तो यह आतंकी समूह कश्मीर जाकर हथियारों की आपूर्ति करने वाला था। इसके अलावा इसकी मंशा आत्मघाती दस्ता तैयार करके दक्षिणी नौसेना कमान और कोच्चि शिपयार्ड जैसे प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाना था।

आतंकियों की इतनी बड़ी साजिश से एक बात साफ है कि इस संगठन के और अन्य सदस्य भी देश में छिपे हो सकते हैं। यह आशंका इसलिए कि गत वर्ष पहले अलकायदा के सरगना अल जवाहिरी ने भारतीय उपमहाद्वीप में कायदात अल जिहाद बनाने, जिहाद का परचम लहराने और इस्लामिक शरीयत की बदौलत खलीफा राज लागू करने का एेलान किया था।

संभव है कि पकड़े गए सभी आतंकी उसी ऐलान व प्लान का हिस्सा हों। याद होगा गत वर्ष पहले भारत में इंडियन सब कांटिनेंट नाम से अस्तित्व में एक आतंकी माॅडयूल का खुलासा हुआ था। उस समय गिरफ्तार आतंकी मोहम्मद आसिफ और मौलाना आसिम को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने खुलासा किया था कि वह अलकायदा के भारतीय उपमहाद्वीप के चीफ सनाउलहक उर्फ मौलाना आसिम उमर के बुलावे पर जून 2013 में अलकायदा ज्वाइन करने के लिए पाकिस्तान गए थे।

चूंकि मोहम्मद आसिफ और मौलाना आसिम उमर दोनों उत्तर प्रदेश के थे ऐसे में यह आशंका जताई गई कि अलकायदा की मंशा उत्तर प्रदेश को अलकायदा का गढ़ बनाने की थी।

यह आशंका इसलिए कि उस दरम्यान दिल्ली में पकड़े गए आतंकी नोमान और खुर्शीद के तार भी आसिफ और आसिम से जुड़े पाए गए थे। गौर करें तो अलकायदा का यह उभार न सिर्फ भारत के लिए बल्कि संपूर्ण दक्षिण एशिया के लिए चिंता का विषय है, इसलिए कि अभी तक अलकायदा अफगानिस्तान और पाकिस्तान में ही सक्रिय रहा लेकिन अब यह मानने में हर्ज नहीं कि उसने भारतीय उपमहाद्वीप में कायदात अल जिहाद आतंकी शाखा के जरिए फन फैलाना शुरू कर दिया है। दरअसल उसका मकसद भारत समेत म्यांमार और बांग्लादेश में अपना नेटवर्क का विस्तार कर इन देशों को लहूलुहान करना है।

गौर करें तो अलकायदा के भारत को निशाने पर लेने के दो मुख्य कारण हैं। एक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा भारत में आतंक के प्रसार के लिए अलकायदा का समर्थन और दूसरा अलकायदा और आईएसआई के बीच वर्चस्व की जंग। यह समझना होगा कि इस्लामिक स्टेट का सरगना अल बगदादी जीवित रहते हुए खुद को दुनियाभर के मुसलमानों का खलीफा घोषित कर अन्य आतंकी संगठनों को नेपथ्य में डाल चुका है।

चूंकि बगदादी मारा जा चुका है ऐसे में अलकायदा को अब अपना संगठन मजबूत करने का मौका मिल गया है। अलकायदा अच्छी तरह समझ रहा है कि वह पश्चिम एशिया में इस्लामिक स्टेट की मौजूदगी में न तो फंड जुटा सकता है और न ही जिहादी मुस्लिम युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है। लिहाजा उसकी योजना अब खुद को भारतीय उपमहाद्वीप के इर्द-गिर्द केंद्रित कर खुद को मजबूत करना है।

याद होगा गत वर्ष पहले महाराष्ट्र और तमिलनाडु के कई मुस्लिम युवाओं का इस्लामिक स्टेट आतंकी गिरोह में शामिल होने की खबरें आई थी और जम्मू-कश्मीर में भी मुस्लिम युवाओं को इस्लामिक स्टेट का झंडा लहराते देखा गया था। ऐसे में अलकायदा को लगने लगा था कि अगर वह दक्षिण एशिया विशेष रूप से भारत में अपनी ताकत का विस्तार नहीं किया तो जिहादी मुस्लिम युवा आईएस की ओर आकर्षित हो सकते हैं।

यह किसी से छिपा नहीं है कि पाक के कबायली इलाकों में अमेरिकी ड्रोन हमलों की मार से अलकायदा लहूलुहान है। तथ्य यह भी है कि आईएस फंड जुटाने के लिए अलकायदा के सभी स्रोतों पर कब्जा कर चुका है।

इराक और सीरिया के कई बड़े क्षेत्रों पर कब्जा कर लेने से उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। दूसरी ओर अलकायदा की आर्थिक स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अब अलकायदा को सऊदी अरब से मिलने वाला 90 फीसद फंड बंद हो चुका है। अभी तक अलकायदा का प्लान था कि 2014 के अंत तक जब नाटो फौज अफगानिस्तान से विदा हो जाएगी तो वह खुद को प्रासंगिक बना लेगा।

लेकिन इस्लामिक स्टेट के बढ़ते दबदबे ने उसके गेम प्लान को खराब कर दिया। अब उसे डर सताने लगा है कि अफगानिस्तान से नाटो फौज के जाने के बाद भी वह अपनी ताकत का विस्तार नहीं किया तो उसका नामलेवा नहीं बचेगा। वैसे भी गौर करें तो अफगानिस्तान और पाकिस्तान के जिहादी युवाओं में अब अलकायदा को लेकर वह आकर्षण नहीं जैसे कभी ओसामा बिन लादेन को लेकर था।

अब इन दोनों मुल्कों के जिहादी युवाओं में इस्लामिक स्टेट को लेकर आकर्षण बढ़ा है। उन्हें लग रहा है कि वह इस्लामिक स्टेट के मार्फत जम्मू-कश्मीर में अपनी हुकूमत स्थापित कर सकते हैं। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति के बाद हालात बदल चुके हैं। जम्मू-कश्मीर शांति की राह पर है। सैन्य बल आए दिन आतंकियों को मार गिरा रहे हैं।

ऐसे में अलकायदा की मंशा देश के अन्य राज्यों में अपना फन फैला संगठन को मजबूत करना है। आमतौर पर माना जा रहा था कि भारत में अलकायदा का प्रसार संभव नहीं है लेकिन उनकी उपस्थिति चिंता बढ़ाने वाला है। अलकायदा को हल्के में नहीं लिया जा सकता। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका के न्यूयार्क शहर में हुए आतंकी हमले को दुनिया कभी नहीं भूल सकती।

इस हमले में 3000 से अधिक लोग मारे गए थे। इसके अलावा अलकायदा ने छिटपुट ही सही पर कई बार यूरोप की धरती को भी लहूलुहान किया। बेहतर होगा कि भारत सरकार अलकायदा को सबक सिखाने के लिए धारदार रणनीति तैयार करे और पड़ोसी देशों से मदद ले, इसलिए और भी कि अलकायदा के सरगना अल जवाहिरी ने भारत के अलावा जिन देशों में मोर्चा खोलने की धमकी दी उसमें बांग्लादेश और म्यांमार का भी नाम है।

यह किसी से छिपा नहीं है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश में कई ऐसे आतंकी संगठन हैं जो भारत में इस्लामिक शासन के हिमायती हैं। इन आतंकी संगठनों में हूजी, जमातुल मुजाहिदीन बांग्लादेश, द जाग्रत मुस्लिम जनता बांग्लादेश व आईसीएस बेहद खतरनाक हैं। भारत में सक्रिय हूजी आईएसआई के सहयोग से कई आतंकी घटनाओं को अंजाम देने में कामयाब रहा है।

बांग्लादेश के अलावा म्यांमार में भी कई आतंकी संगठन हैं जिनका मकसद भारत में अस्थिरता पैदा करना है। उल्लेखनीय है कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों और बौद्धों के बीच कई बार हिंसा हो चुकी है। ये बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों में पसरे हुए हैं।

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