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राष्ट्रपति कोविंद के साथ एक नए युग की शुरुआत

उनका भाजपा या संघ परिवार से कोई नाता नहीं रहा था।

राष्ट्रपति कोविंद के साथ एक नए युग की शुरुआत

इकहत्तर वर्षीय रामनाथ कोविंद ने चौदहवें राष्ट्रपति के तौर पर पद की शपथ ग्रहण कर कमान संभाल ली है। देश उनसे उम्मीद कर रहा है कि जिन चार राष्ट्रपतियों डा. राजेन्द्र प्रसाद, सर्वपल्ली राधाकृष्णन डा. एपीजे अब्दुल कलाम और प्रणब मुखर्जी का उल्लेख उन्होंने आदर्श राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले उद्बोधन किया है, वह भी उनके पदचिह्नों पर चलते हुए श्रेष्ठ राष्ट्रपति सिद्ध होंगे।

25 जुलाई 2017 को भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लिए इसे इस कारण खास दिन के तौर पर देखा जाएगा, क्योंकि उनकी मूल विचारधारा को अंगीकार करने वाले कोविंद पहले राष्ट्रपति हैं। इनसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में तत्कालीन राजग सरकार को डा. एपीजे अब्दुल कलाम के रूप में राष्ट्रपति चुनने का अवसर जरूर मिला था परन्तु वह वैज्ञानिक और मिसाइल मैन थे।

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उनका भाजपा या संघ परिवार से कोई नाता नहीं रहा था। हालांकि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय राष्ट्रपति चुने गए प्रणब मुखर्जी तीन साल पहले सत्ता में आई नरेन्द्र मोदी की सरकार के लिए भी वैसे ही रहे, जैसे मनमोहन सिंह सरकार के लिए थे और संभवत: यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी उन्हें पितातुल्य मानते हुए पूरा सम्मान प्रदान करते रहे।

बतौर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के फैसलों और सलाहों को खुद मोदी ने एकाधिक अवसरों पर दिल से सराहा है। मूलत: पश्चिम बंगाल से आने वाले प्रणब मुखर्जी का सभी दलों में समान रूप से सम्मान है। वे कभी किसी विवाद में नहीं रहे। संसद में हंगामों को लेकर वह समय-समय पर चिंता जाहिर करते रहे हैं। यह जानते हुए भी कि पिछले तीन साल से संसद को अखाड़े में तब्दील करने वाले विपक्षी दलों की अगुआ खुद वह कांग्रेस है, जिसमें खुद प्रणब ने कई दशक गुजारे हैं।

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उनके लिए यह कम सम्मान की बात नहीं है कि नए राष्ट्रपति कोविंद ने उन्हें देश के महान राष्ट्रपतियों के समकक्ष रखते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प व्यक्त किया है। शपथ लेने के तुरंत बाद अपने पहले संबोधन में राष्ट्रपति कोविंद ने जो बातें कहीं हैं, उनसे उम्मीद जगती है कि वह लुटियंस जोन में उन करोड़ों गरीबों, वंचितों, दमितों, महिलाओं, किसानों, जवानों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत लोगों की वैसी ही चिंता करेंगे, जैसी उनसे अपेक्षा है।

अच्छी बात यही है कि देश की विविधता को इसकी खूबसूरती और एकजुटता की मुख्य वजह बताने वाले कोविंद ने हर उस हाथ को राष्ट्र का निर्माता बताकर हर नागरिक को सम्मान देते हुए विकास की मुख्य धारा से जोड़ने की कोशिश की है, जो भी इसकी प्रगति में हाथ बंटा रहा है। नए राष्ट्रपति का दृष्टिकोण स्पष्ट है। वह पंचायतों, रवायतों, परंपराओं की बात करते हैं तो डिजिटल इंडिया का जिक्र करना भी नहीं भूलते।

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उन्हें अहसास है कि इस देश का आम जनमानस किस तरह उस गौरवशाली संस्कृति और रवायतों से जुड़ा हुआ है, जो अलग प्रांतों, भाषाओं, संस्कृतियों, जीवन शैलियों और पंथों के बावजूद एकजुट बनाए रखती हैं। इसलिए उन्होंने कहा कि हम बहुत अलग हैं, फिर भी एक हैं और एकजुट हैं। कभी गोमांस के नाम पर कभी मजहब के नाम पर, कभी जाति के नाम पर और कभी विचारधारा के नाम पर जिस तरह कुछ लोग वातावरण को विषाक्त बनाने की चेष्टा करते रहते हैं,

उनके लिए नए महामहिम का उदबोधन एक सीख है। वसुधैव कुटुम्बकम की बात करके उन्होंने पूरी विश्व बिरादरी को भी संदेश दिया है कि भारत सबका कल्याण चाहता है। 2022 का खासतौर से उल्लेख करते हुए श्री कोविंद ने उम्मीद जाहिर की है कि जब देश स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे कर रहा होगा, तब हर नागरिक के लिए संभावनाओं के द्वार पूरी तरह खुले हुए होंगे। उनका उद्बोधन निश्चित रूप से एक उम्मीद जगाने वाला है।

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