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बातें बहुत हो गईं, अब पाक पर एक्शन जरूरी

पठानकोट हमारा बड़ा एयरबेस है और उरी एलओसी पर बड़ा सैन्य बेस है।

बातें बहुत हो गईं, अब पाक पर एक्शन जरूरी
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पठानकोट, पुलवामा, पुंछ, कुपवाड़ा, ख्वाजा बाग, पंपोर, हंदवाड़ा, बारामूला, र्शीनगर, मोहरा और अब उरी। ये सभी भारतीय क्षेत्र हैं, जहां हाल के एक-डेढ़ साल में पाक आतंकियों ने हमले किए हैं। इन हमलों में आतंकी कम मारे गए हैं और हमारे जवान ज्यादा शहीद हुए हैं। उरी में भी पाक के चार आतंकी मारे गए जबकि हमारे 17 जवान शहीद हुए। इनमें पाक ने कुछ भी नहीं खोया है, जबकि हमने अपने बहुमूल्य सैनिक खोए हैं। इनमें पठानकोट हमारा बड़ा एयरबेस है और उरी एलओसी पर बड़ा सैन्य बेस है। उरी 12 बटालियनों का बेस है।
पुलवामा में भी सैनिक ठिकानों पर ही आतंकी हमला किया गया था। उरी क्षेत्र में ही मोहरा में 5 दिसंबर 2014 को भी पाक आतंकियों ने हमला किया था, जिसमें 11 जवान शहीद हुए थे व छह आतंकी मारे गए थे। 1990 के बाद 26 साल में किसी भारतीय सैन्य बेस पर शहीद सैनिकों की संख्या के हिसाब से सबसे बड़ा आतंकी हमला है। पठानकोट व उरी जैसे हमारे सामरिक ठिकानों पर हमले कर पाक हमें एहसास करा रहा है कि हम उसे रोक पाने में सक्षम नहीं हैं।
सवाल है कि हम और कितने हमले सहेंगे? पाकिस्तान 1947 से ही हमें दर्द दे रहा है। हमारे देश में शायद ही कोई महत्वपूर्ण ठिकाने बचे हों, जिस पर पाक ने आतंकी हमले नहीं करवाए हों। हमारी संसद तक को उसने नहीं छोड़ा है। हमने पाक आतंकी भी पकड़े भी हैं। आखिर हमारे सब्र का पैमाना कब छलकेगा? कब तक हम यूं ही बर्दाश्त करते रहेंगे? कब तक हम सबूत ही देते रहेंगे? कब तक हम बयानों से ही कड़ा संदेश देते रहेंगे? कब तक हम कूटनीतिक कलाबाजियां ही करते रहेंगे? कब तक हम सियासत ही करते रहेंगे? कब तक हम सॉफ्ट स्टेट ही बने रहेंगे? अब तो यह साफ हो चुका है कि पाकिस्तान हमारे खिलाफ नीति के रूप में आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा है।
वह कम संसाधन का इस्तेमाल कर हमें अधिक नुकसान पहुंचा रहा है। वह हमसे छद्म युद्ध लड़ रहा है। आतंक के हथियार से वह हमारी छाती पर मूंग दल रहा है। वह हमारे खिलाफ आक्रामक है और हम बस डिफेंसिव बने हुए हैं। पाक के हर आतंकी हमले के बाद हम केवल बयानों से ही कड़ा संदेश देते रहे हैं। पाक भी समझने लगा है कि ‘हम उसे कुछ नहीं करेंगे।’ हम केवल डोजियर-डोजियर खेल रहे हैं, केवल कूटनीतिक पैतड़ें आजमा रहे हैं। हमारी राजनीतिक इच्छाशक्ति कब जागेगी? हम एक्शन में कब आएंगे? हम मुंहतोड़ जवाब देना कब सीखेंगे? पाक हमारे सौनिकों के सिर कलम करता है और हम केवल बर्दाश्त नहीं करेंगे भर कह कर रह जाते हैं।
हम सुपर पावर बनने का ख्वाब पाले हुए हैं, आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर हैं। हम अपनी सैनिक ताकतों, टैंकों, मिसाइलों, फाइटर प्लेनों का दंभ भर रहे हैं। हम परमाणु शक्ति संपन्न हैं। हर रोज हम अमेरिका, रूस, फ्रांस जैसे देशों से हाईटेक सोनिक-सुपरसोनिक अस्त्र-शस्त्र खरीद रहे हैं। आखिर किस लिए? किस दिन ये काम आएंगे? जब हमारे सैनिक व सैन्य ठिकाने ही महफूज नहीं है। अपनी सुरक्षा के लिए ही आज हम अस्त्र-शस्त्र का बड़ा खरीदार बन गए हैं। फिर भी हम अपनी सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं। हम अपनी सरकारी खजाने से देश की सुरक्षा पर पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान लश्कर, जैश, हिज्बुल गुटों के मुट्ठीभर आतंकियों से हमारे सैकड़ों जवानों को मौत के घाट उतार रहा है।
यह सही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उरी हमले के बाद हमलावरों को सख्त संदेश दिया है कि वे बच नहीं पाएंगे। लेकिन यह भी सही है कि इस समय भारतीय आवाम में बेहद क्रोध है। पाक के प्रति गुस्से से देश के लोग मुट्ठी भीचें हुए हैं। सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा छलक रहा है। केंद्र सरकार को आवाम के गुस्से को भी एड्रेस करना होगा। लोग यही चाहते हैं कि बातें बहुत हो गईं, अब एक्शन का समय है। पाक के टेरर को काउंटर करने के लिए हमें बयानबाजी से ऊपर जाकर पाक के अंदर बहुत कुछ करना होगा। पीएम मोदी से आवाम को बड़ी उम्मीदें हैं।

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