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पंजाब और गोवा के बाद ''आप''

2015 के विधानसभा चुनाव में आप को लोगों ने भरपूर समर्थन देते हुए 70 में से 67 सीटें दी थी।

पंजाब और गोवा के बाद

राज्यों की दस विधानसभा सीटों के लिए हुए उप चुनावों के नतीजों से एक बार फिर यही साबित हुआ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर यथावत जारी है। कनार्टक से कांग्रेस के लिए भी संतोष की खबर आई है, जहां वह दोनों सीटें जीतने में सफल रही है, परंतु मध्य प्रदेश और हिमाचल में वह भाजपा के हाथों पराजित हुई है।

इसी तरह दिल्ली में भी उसे भाजपा के हाथों हार का सामना करना पड़ा है। यह अलग बात है कि इस हार में भी वह जीत का अनुभव कर रही है, क्योंकि पिछले चुनाव में उसे बहुत कम वोट हासिल हुए थे, जबकि इस बार उससे दोगुना वोट मिले हैं।

राजौरी गार्डन सीट का नतीजा इस कारण बहुत मायने रखता है, क्योंकि 2015 में यहां से आम आदमी पार्टी को 54 हजार से अधिक वोट मिले थे और उसने भाजपा प्रत्याशी को दस हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया था, परंतु दो साल के भीतर ही वह न केवल तीसरे स्थान पर खिसक गई, बल्कि उसके प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गई है।

आप प्रत्याशी को दस हजार वोट ही नसीब हो सके हैं। कांग्रेस को करीब छब्बीस हजार वोट मिले हैं, जबकि भाजपा-अकाली प्रत्याशी को 52 प्रतिशत वोटों के साथ 44 हजार से अधिक मत हासिल हुए हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप को लोगों ने भरपूर समर्थन देते हुए 70 में से 67 सीटें नवाज दी थी।

भाजपा केवल तीन सीटों पर सिमटकर रह गई थी, जबकि पंद्रह साल तक दिल्ली पर शासन करने वाली कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल सका था। तब तमाम तरह के सवाल खड़े हुए थे कि अप्रैल-मई 2014 के आम चुनाव में 282 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत के साथ जो नरेंद्र मोदी केंद्र की सत्ता पर काबिज हुए, वह केजरीवाल के सामने कैसे पस्त हो गए।

दिल्ली के नतीजे भाजपा के लिए भी चौंकाने वाले थे, लेकिन उसके बाद जो हुआ वह ज्यादा पीड़ादायक था। भारी बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुए केजरीवाल अधिकारों को लेकर हर दूसरे दिन उप राज्यपाल नजीब जंग से उलझते नजर आने लगे।

यही नहीं, उन्होंने हर मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम यह कहते हुए घसीटना शुरू कर दिया कि वह उनकी सरकार को काम नहीं करने दे रहे। विमुद्रीकरण सहित मोदी सरकार के ऐसे कई फैसलों का उन्होंने पुरजोर विरोध किया, जिनका आमतौर पर लोगों ने स्वागत किया था।

इससे यही लगा कि प्रधानमंत्री मोदी के विरोध को लेकर वह कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से होड़ लेने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि भाजपा विरोधी मतों पर कब्जा कर सकें, परंतु लोगों ने केजरीवाल के तौर तरीकों और अभद्र भाषा को पसंद नहीं किया।

राजौरी गार्डन उप चुनाव के नतीजे खुद आम आदमी पार्टी के लिए भी एक कड़ा संदेश हैं। पार्टी भले ही यह बहाना बना रही हो कि जरनैल सिंह से इस्तीफा दिलवाकर उन्हें पंजाब की लांबी सीट से लड़वाना लोगों को पसंद नहीं आया है, इस नतीजे से साफ है कि दिल्ली के लोगों का केजरीवाल सरकार से मोहभंग हो चुका है।

दस दिन बाद दिल्ली में तीनों नगर निगमों के चुनाव हैं। भाजपा दस साल से सत्ता में है। इसके बावजूद मोदी की प्रचंड लहर के चलते वह पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है कि इस बार भी उसे ही जनादेश हासिल होगा। यदि ऐसा होता है तो राजौरी गार्डन उप चुनाव, पंजाब और गोवा विधानसभा चुनाव में मिली विफलता के बाद यह केजरीवाल की पार्टी के लिए यह एक और बड़ा झटका होगा।

इन उप चुनावों में आधे से अधिक सीटें चूकि भाजपा ने जीती हैं, इसलिए संकेत बहुत साफ हैं। भाजपा ने हिमाचल के उप चुनाव में भी जीत दर्ज की है, जहां कांग्रेस की सरकार है। वहां अगले साल के शुरू में विधानसभा चुनाव होने हैं।

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