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जब भारत की पहली विमान सेवा एयर इंडिया ने भारत और ब्रिटेन के बीच शुरु की थी हवाई सेवा

भारतीय इतिहास में 8 जून अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 8 जून को पहली बार भारत और ब्रिटेन के बीच हवाई सेवा शुरू की गई थी।

जब भारत की पहली विमान सेवा एयर इंडिया ने भारत और ब्रिटेन के बीच शुरु की थी हवाई सेवा
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भारतीय इतिहास में 8 जून अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 8 जून को पहली बार भारत और ब्रिटेन के बीच हवाई सेवा शुरू की गई थी। आज ही के दिन साल 1948 को भारत की पहली विमान सेवा एयर इंडिया ने अपनी हवाई सेवा ब्रिटेन के लिए शुरू की थी। जब पहला विमान मुंबई से जिनेवा होते हुए 10 जून को ब्रिटेन के लंदन पहुंचे।

कहते हैं कि साल 1948 में भारत की पहली विमान सेवा एयर इंडिया ने भारत और ब्रिटेन के बीच पहली हवाई सेवा के दौरान 42 यात्रियों को लंदन लेकर 10 जून को पहुंची थी। यह विमान सेवा 8 जून को शुरू हुई और 10 जून को लंदन पहुंची। इस दौरान मुंबई से जिनेवा और उसके बाद लंदन विमान सेवा पहुंची थी।

ऐसे हुई थी एयर इंडिया की शुरुआत

वैसे एयर इंडिया का लोगो लाल रंग का उड़ता हुआ हंस है। इसमें नारंगी में कोणार्क चक्र भी है। कंपनी के हवाई जहाजों के पिछले हिस्से पर प्रमुखता के साथ लोगो को जगह दी जाती है। वैसे एयर इंडिया की शुरुआत साल 1932 में हुई थी।

शुरुआत में नहीं था एयर इंडिया नाम

इस विमान सेवा की स्थापना भारत के एक बड़े उद्योगपति जेआरडी टाटा ने की थी और उन्होंने ही इसका नाम शुरुआत में एयर इंडिया नहीं बल्कि तब इसका नाम टाटा एयरलाइंस हुआ करता था। इसकी शुरुआत की थी।

टाटा एयरलाइंस की शुरुआत अप्रैल 1932 में की गई थी। लेकिन उससे पहले साल 1919 में पहली बार हवाई जहाज तब शौकिया तौर पर उड़ा करता था। जो सिर्फ 15 साल की थी। मगर पहली व्यावसायिक उड़ान उन्होंने 15 अक्टूबर को भरी। जब वो सिंगल इंजन वाले हैवीलैंड पस मोथ' हवाई जहाज को अहमदाबाद से होते हुए कराची से मुंबई ले गए थे।

कहा जाता है कि टाटा एयरलाइंस की शुरुआत में इसे पहला व्यवसायिक साल में शुमार किया गया था। तब टाटा संस की दो लाख की लागत से इस कंपनी का निर्माण हुआ और 155 पैसेंजर को और लगभग 11 टन डाक से उड़ान पहली बार भरी गई थी। इसके अलावा टाटा एयरलाइंस के जहाजों ने भी 1 साल तक कुल मिलाकर 1,60,000 मीटर की उड़ान भरी थी।

वही शुरुआत में टाटा एयरलाइंस को मुंबई के जुहू के पास एक मिट्टी के मकान से शुरुआत की गई और इसके बाद वहीं पर एक मैदान को रनवे बनाया गया। लेकिन जब बरसात या मानसून आया करता तो यह पानी से भर जाए करते थे। जिसकी वजह से धंधे बंद हो जाएगा। पानी भर जाने की सूरत में जेआरडी टाटा अपने हवाई जहाज पूने से संचालित करते थे।

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