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देश में कोरोना की दवाई तैयारी करने के लिए चल रहा काम, तब तक सोशल और फिजिकल डिस्टेंसिंग ही है बड़ी वैक्सीन- डॉ हर्षवर्धन

इतना ही नहीं डॉ हर्षवर्धन ने कोरोना से जुडे और भी कई सवालों के दिये जवाब। बताया अमेरिका चीन और ब्रिटेन से कहीं ज्यादा सही हालातों में भारत।

Coronavirus: डॉ हर्षवर्धन बोले, भारत में कोरोना से नहीं है ज्यादा खतरा
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डॉ हर्षवर्धन (फाइल फोटो)

देश में लॉकडाउन 4 भी अब खत्म होने वाला है। वहीं लगातार कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या बढती जा रही है। इसी को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने सभी से अपील करते हुए बताया कि देश में कोरोना का वैक्सीन तैयार करने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत काम चल रहा है। वैक्सीन बनाने का काम जारी है, लेकिन इसबीच सोशल और फिजिकल डिस्टेंसिंग ही हमारे लिए बड़ी वैक्सीन है। इसके साथ ही हर्षवर्धन ने एक न्यूज एजेंसी को दिये इंटरव्यू में कोरोना से जुडे कई सवालों के जवाब दिये। साथ ही बताया कि इस समय देश में करीब 14 कंपनियां कोरोना की दवाई बनाने के काम में जुटी हैं। इनमें से 4 के वैक्सीन प्री-क्लीनिकल ट्रायल के एडवांस स्टेज में हैं। 10 वैक्सीन को बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट से फंडिंग देने की सिफारिश की गई है।

चीन और अमेरिका जैसे देशों से बेहतर स्थिती में हैं भारत

न्यूज एजेंसी को दिये इंटरव्यू में हर्षवर्धन ने बताया कि सही समय पर फैसले लेने से भारत बेहतर स्थिति में हैं। 26 मई तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में एक लाख में से 10.7 लोग संक्रमित हैं, जबकि दुनिया में प्रति एक लाख की आबादी में औसत 69.9 केस हैं। हमारे यहां प्रति लाख आबादी में कोरोना से मरने वालों की संख्या 0.3 है, जबकि दुनिया में 4.4 है। ऐसे में साफ है कि अमेरिका, चीन और ब्रिटेन जैसे देशों से भारत बेहतर स्थिती में हैं। वहीं उन्होंने बताया कि तापमान और कोरोना संक्रमण के बीच कोई संबंध नजर नहीं आ रहा। गर्म देशों में कोरोना से कम मौतों की कई वजह हो सकती हैं, जैसे- कम आबादी होना, युवाओं की संख्या ज्यादा होना और इंटरनेशनल ट्रैवल करने वालों की संख्या भी कम होना है। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री ने एक सवाल का जवब देते हुए कहा कि मेरा अनुभव है कि कोरोना तेजी से फैल रहा है, लेकिन इसकी वजह से मौतों की दर (फेटैलिटी रेट) कम है। भारत में कंप्लीट लॉकडाउन और पब्लिक हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करने से कोरोना से मरने वालों की संख्या कम करने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि यह कहना भी जल्दबाजी होगी कि वायरस पूरी तरह से कब खत्म होगा। यह वायरस समय-समय पर अपना असर दिखा सकता है। इसलिए, हमें पर्सनल हाइजीन और फिजिकल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना होगा।

देश के इन जगहों पर ज्यादा कोरोना संक्रमण फैलने की क्या वजह है?

डॉ हर्षवर्धन ने बताया कि सवाल: दिल्ली, मुंबई, आगरा, पश्चिम बंगाल, इंदौर और अहमदाबाद में स्थितियां ज्यादा बिगडी है, मैं राज्यों के मुख्यमंत्रियों से लगातार संपर्क में हूं। वह संक्रमण रोकने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। ये इस बात पर भी निर्भर होता है कि कम्युनिटी सोशल डिस्टेंसिंग के प्रति कितनी जिम्मेदारी निभा रही है? इन कोशिशों में जरा सी लापरवाही से स्थिति बिगड़ सकती है। जब स्वास्थ्य मंत्री से पूछा गया कि आप इस बीमारी से बचने के लिए क्या सुझाव देंगे तो उन्होंने कहा कि मैं कई बार कह चुका हूं कि इस वक्त सोशल और फिजिकल डिस्टेंसिंग ही सबसे असरदार वैक्सीन है। इंडस्ट्रियल और कंस्ट्रक्शन से जुड़े मजदूर, कच्ची बस्तियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को ज्यादा रिस्क है। मैं पहले भी कह चुका हूं कि कोरोना का संक्रमण रोकने में कंप्लीट लॉकडाउन सफल रहा, लेकिन इसके सामाजिक-आर्थिक असर को समझना भी जरूरी है।

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