Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

एलएसी-एलओसी पर जवान कलाई में पहनेंगे बहनों की स्वदेशी राखी, हौंसला होगा हाई

कोरोना महामारी और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन द्वारा बढ़ाए जा रहे विवाद के बीच इस बार रक्षाबंधन पर भारतीय सेना के जवानों का जोश कई गुना और बढ़ने वाला है। क्योंकि उनकी कलाई पर सजने वाली राखी चीनी नहीं बल्कि शत-प्रतिशत स्वदेशी होगी।

एलएसी-एलओसी पर जवान कलाई में पहनेंगे बहनों की स्वदेशी राखी, हौंसला होगा हाई
X
राखी (प्रतीकात्मक फोटो)

कोरोना महामारी और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन द्वारा बढ़ाए जा रहे विवाद के बीच इस बार रक्षाबंधन पर भारतीय सेना के जवानों का जोश कई गुना और बढ़ने वाला है। क्योंकि उनकी कलाई पर सजने वाली राखी चीनी नहीं बल्कि शत-प्रतिशत स्वदेशी होगी। जिसे देश की हजारों माताओं और बहनों ने बीते कुछ दिनों में अपने घरों पर बैठकर ही तैयार किया है। यहां शनिवार को कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को ऐसी कुल 10 हजार 400 स्वदेशी राखियां सीमाओं की दिन रात सुरक्षा करने में लगे हुए जवानों को भेजने के लिए सौंपी हैं।

जवानों की मनोबल बढ़ेगा

इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के अंदर महिला उद्यमियों द्वारा बनाई गई यह राखियां जवानों की कलाई पर बंधकर यह संदेश देंगी कि सारा देश अभिमान और गर्व के साथ उनके साथ मजबूती से खड़ा है। इससे उनका मनोबल बढ़ेगा। भारत को अपनी सशस्त्र सेनाओं पर गर्व है। क्योंकि वो हर प्रकार से किसी को भी मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं। कैट के स्वदेशी सामान को बढ़ावा देने के इस राष्ट्रीय अभियान 'भारतीय सामान-हमारा अभियान' से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल पर वोकल और आत्मनिर्भर भारत बनाने के आव्हान में भी मदद मिलेगी।

दिल्ली, म.प्र. में बनी राखियां

कैट की पहल पर जवानों के लिए राखियां तैयार करने के काम में बाकी राज्यों के साथ दिल्ली और मध्य प्रदेश की महिलाओं ने भी बढ़चढ़कर भाग लिया है। इसमें दिल्ली में विशेष मोदी राखी बनाई गई और मध्य प्रदेश के सतना में ऊन की राखी तैयार की गई है। इसके अलावा नागपुर में बनी जूट की राखी, जयपुर में बनी कपड़ों पर पेंट की राखी, पुणे में बनी बीज राखी, झारखंड के जमशेदपुर में आदिवासी वस्तुओं से बनी राखी, असम के तिनसुकिया में चाय की पत्तियों से बनी राखी, कोलकात्ता में बनी सिल्क की राखी, मुंबई में बनी फैशनेबल राखी भी शामिल है।

देश के अंदर वितरित होंगी

कैट की योजना भारतीय सामान से तैयार इन राखियों को देश में फैले विभिन्न व्यापारी संगठनों के द्वारा व्यापारियों और उनके कर्मचारियों को भी वितरित करने की है। अगले सप्ताह में देश के सभी राज्यों के प्रमुख बाजारों में कैट के व्यापारी नेता एवं महिला उद्यमी स्टॉल लगाकर इन राखियों को लोगों को बेचेंगे। इनकी कीमत 10 से 50 रूपए के बीच होगी।

Next Story