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Mann Ki Baat: पीएम मोदी बोले, रमजान में पहले से ज्यादा इबादत करें ताकि ईद से पहले दुनिया कोरोना मुक्त हो जाए

Mann Ki Baat: पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि पूरे देश में,गली-मोहल्लों में,जगह-जगह पर आज लोग एक दूसरे की सहायता के लिए आगे आये हैं। गरीबों के लिए खाने से लेकर,राशन की व्यवस्था हो, लॉकडाउन का पालन हो,अस्पतालों की व्यवस्था हो, मेडिकल उपकरण का देश में ही निर्माण हो-आज पूरा देश,एक लक्ष्य, एक दिशा साथ-साथ चल रहा है।

Mann Ki Baat: पीएम मोदी बोले, रमजान में पहले से ज्यादा इबादत करें ताकि ईद से पहले दुनिया कोरोना मुक्त हो जाए
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Mann Ki Baat (मन की बात) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 अप्रैल यानी आज सुबह 11 बजे 'मन की बात' के जरिये देश को संबोधित किया। पीएम मोदी चर्चित रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कोरोना वायरस कहर के बीच लॉकडाउन के ऊपर बात रखी है। 'मन की बात' का यह 64वां संस्करण है। देश में लॉकडाउन का दूसरा चरण 3 मई को खत्म हो रहा है। ऐसे में एक बार फिर देश की जनता की निगाहें पीएम नरेंद्र मोदी के संबोधन पर टिकी रहीं।

आज पूरा देश, देश का हर नागरिक, जन-जन इस लड़ाई का सिपाही है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के जरिए देश को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ पूरे देश के लोग लड़ रहे हैं। कोरोनावायरस के खिलाफ भारत की लड़ाई लोगों से प्रेरित है। यह लड़ाई लोगों और प्रशासन द्वारा मिलकर लड़ी जा रही है। सैनिक के रूप में प्रत्येक नागरिक इस युद्ध को लड़ रहा है। हम भाग्यशाली हैं कि आज पूरा देश, देश का हर नागरिक, जन-जन इस लड़ाई का सिपाही है और लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है। आज पूरा देश, एक लक्ष्य, एक दिशा के साथ आगे बढ़ रहा है। ताली, थाली, दीया, मोमबत्ती, इन सारी चीजों ने जिन भावनाओं को जन्म दिया है। जिस जज्बे से देशवासियों ने कुछ-न-कुछ करने की ठान ली, हर किसी को इन बातों ने प्रेरित किया है।

इन बातों ने हम सबको एक मन-एक धागे से पिरो दिया

पीएम मोदी ने आगे कहा कि हमारे किसान भाई-बहन को ही देखिये, वो इस महामारी के बीच अपने खेतों में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं और इस बात की भी चिंता कर रहे हैं कि देश में कोई भूखा ना सोये। दूसरों की मदद के लिए, अपने भीतर, ह्रदय के किसी कोने में, जो ये उमड़ता-घुमड़ता भाव है ना! वही कोरोना के खिलाफ, भारत की इस लड़ाई को ताकत दे रहा है। चाहे करोड़ों लोगों का गैस सब्सिडी छोड़ना हो, लाखों सीनियर सिजिटन कर रेलवे सब्सिडी छोड़ना हो, स्वच्छ भारत अभियान का नेतृत्व लेना हो, टॉयलेट बनाने हो, ऐसी अनगिनत बातें हैं। इन सारी बातों से पता चलता है कि हम सबको एक मन-एक धागे से पिरो दिया है।

आज पूरा देश,एक लक्ष्य, एक दिशा साथ-साथ चल रहा

पूरे देश में,गली-मोहल्लों में,जगह-जगह पर आज लोग एक दूसरे की सहायता के लिए आगे आये हैं। गरीबों के लिए खाने से लेकर,राशन की व्यवस्था हो, लॉकडाउन का पालन हो,अस्पतालों की व्यवस्था हो, मेडिकल उपकरण का देश में ही निर्माण हो-आज पूरा देश,एक लक्ष्य, एक दिशा साथ-साथ चल रहा है। चाहे वो व्यापार हो, ऑफिस कल्चर हो, शिक्षा हो या मेडिकल सेक्टर सभी कोरोना वायरस की वजह से आए बदलावों के हिसाब से खुद को ढालते जा रहे हैं, तेजी से इनोवेट कर रहे हैं। देश के हर हिस्से में दवाईयों को पहुंचाने के लिए 'लाइफ-लाइन उड़ान' नाम से एक विशेष अभियान चल रहा है। हमारे इन साथियों ने इतने कम समय में देश के भीतर ही 3 लाख किलोमीटर की हवाई उड़ान भरी है और 500 टन से अधिक मेडिकल सामग्री देश के कोने-कोने में पहुंचाई है। संकट की इस घड़ी में दुनिया,समृद्ध देशों के लिए भी दवाईयों का संकट बहुत ज्यादा रहा है।अगर भारत दुनिया को दवाईयां न भी दे तो कोई भारत को दोषी नहीं मानता। हर देश समझ रहा है कि भारत के लिए भी उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों को बचाना है।लेकिन भारत ने अपनी संस्कृति के अनुरूप फैसला लिया।

हर मुश्किल हालात, हर लड़ाई, कुछ-न-कुछ सबक देती है

हर मुश्किल हालात, हर लड़ाई, कुछ-न-कुछ सबक देती है, कुछ-नकुछ सिखा करके जाती है, सीख देती है। सब देशवासियों ने जो संकल्प शक्ति दिखाई है, उससे, भारत में एक नए बदलाव की शुरुआत भी हुई है। हमारे बिजनेस, हमारे दफ्तर, हमारे शिक्षण संस्थान, हमारे मडेडिल सेक्टर, हर कोई, तेजी से नए तकनीकी बदलावों की तरफ बढ़ रहे हैं। टेक्नोलॉजी के फ्रंट पर तो वाकई ऐसा लग रहा है कि देश का हर innovator नई परिस्थितियों के मुताबिक कुछ-न-कुछ नया निर्माण कर रहा है। जब देश एक टीम बन करके काम करता है, तब क्या कुछ होता है - ये हम अनुभव कर रहे हैं। आज केंद्र सरकार हो, राज्य सरकार हो, इनका हर विभाग और संस्थान राहत के लिए मिल-जुल करके पूरी स्पीड में काम रहे हैं।

गरीबों के अकाउंट में सीधे पैसे पहुंचाए जा रहे

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत, गरीबों के अकाउंट में पैसे सीधे ट्रान्सफर किए जा रहे हैं। वृद्धावस्था पेंशन जारी की गई है। गरीबों को तीन महीने के मुफ्त गैस सिलेंडर, राशन जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं।

राज्य सरकारें भी सक्रिय भूमिका निभा रहीं

हमारे देश की राज्य सरकारों की भी इस बात के लिए प्रशंसा करूंगा कि वो इस महामारी से निपटने में बहुत सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन, राज्य सरकारें जो अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं, उसकी कोरोना के खिलाफ लड़ाई में बहुत बड़ी भूमिका है।

देशभर से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए अध्यादेश लाया गया

देशभर से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों ने अभी हाल ही में जो अध्यादेश लाया गया है, उस पर अपना संतोष व्यक्त किया है। इस अध्यादेश में कोरोना वॉरियर्स के साथ हिंसा, उत्पीड़न और उन्हें किसी रूप में चोट पहुंचाने वालों के खिलाफ बेहद सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। डॉक्टर हों, सफाईकर्मी हों, अन्य सेवा करने वाले लोग हों - इतना ही नहीं, हमारी पुलिस व्यवस्था को लेकर भी आम लोगों की सोच में काफी बदलाव हुआ है। आज कल सोशल मीडिया में हम सब लोग लगातार देख रहे हैं कि लॉकडाउन के दौरान, लोग अपने इन साथियों को न सिर्फ याद कर रहे हैं, उनकी जरूरतों को ध्यान रख रहे हैं, बल्कि इनके बारे में बहुत सम्मान से लिख भी रहे हैं

समाज के नजरिए में आया व्यापक बदलाव

मेरे प्यारे देशवासियों, हम सब अनुभव कर रहे हैं कि महामारी के खिलाफ इस लड़ाई के दौरान हमें अपने जीवन को, समाज को, आप-पास हो रही घटनाओं को, एक ताजा नजरिए से देखने का अवसर भी मिला है। समाज के नजरिए में भी व्यापक बदलाव आया है। डॉक्टर हों, सफाईकर्मी हों, अन्य सेवा करने वाले लोग हों- इतना ही नहीं, हमारी पुलिस-व्यवस्था को लेकर भी आम लोगों की सोच में काफी बदलाव हुआ है। हमारे पुलिसकर्मी गरीबों, जरुरतमंदो को खाना पंहुचा रहे हैं, दवा पंहुचा रहे हैं।

हमारे पुलिसकर्मियों ने इसे जनता की सेवा के एक अवसर के रूप में लिया

पुलिस जिस तरह से हर मदद के लिए सामने आ रही है इससे पुलिसिंग का मानवीय और संवेदनशील पक्ष हमारे सामने उभरकर के आया है। हमारे पुलिसकर्मियों ने, इसे जनता की सेवा के एक अवसर के रूप में लिया है। हम सबने इस सकारात्मकता को कभी भी नकारात्मकता के रंग से रंगना नहीं है। प्रकृति, विकृति और संस्कृति, इन शब्दों को एक साथ देखें और इसके पीछे के भाव को देखें तो आपको जीवन को समझने का भी एक नया द्वार खुलता हुआ दिखेगा। 'ये मेरा है', 'मैं इसका उपयोग करता हूं' बहुत स्वाभाविक माना जाता है। इसे हम 'प्रकृति' कह सकते हैं।

सार्वजनिक जगहों पर थूकने की आदत छोड़ देनी चाहिए

हमारे समाज में एक और बड़ी जागरूकता ये आई है कि सार्वजनिक स्थानों पर थूकने के क्या नुकसान हो सकते हैं। अब, ये थूकने की आदत को लोगों को छोड़ देनी चाहिए। ये बातें जहां बेसिक हाइजीन का स्तर बढ़ाएंगी, वहीं, कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में भी मदद करेगी। ये सुखद संयोग ही है, कि, आज जब आपसे मैं मन की बात कर रहा हूं तो अक्षय तृतीया का पवित्र पर्व भी है साथियो, 'क्षय' का अर्थ होता है विनाश लेकिन जो कभी नष्ट नहीं हो, जो कभी समाप्त नहीं हो वो 'अक्षय'।

रमजान को बनाएं सेवा भाव का प्रतीक

रमजान का भी पवित्र महीना शुरू हो चुका है। अब अवसर है इस रमजान को संयम, सद्भावना, संवेदनशीलता और सेवा-भाव का प्रतीक बनाएं। इस बार हम, पहले से ज्यादा इबादत करें ताकि ईद आने से पहले दुनिया कोरोना से मुक्त हो जाए। मुझे विश्वास है कि रमजान के इन दिनों में स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए कोरोना के खिलाफ चल रही इस लड़ाई को हम और मजबूत करेंगे।

भारत ने अपने संस्कारो के अनुरूप लिया फैसला

'जो मेरा नहीं है', 'जिस पर मेरा हक़ नहीं है' उसे मैं दूसरे से छीन लेता हूं, उसे छीनकर उपयोग में लाता हूं तब हम इसे 'विकृति' कह सकते हैं। इन दोनों से परे, प्रकृति और विकृति से ऊपर जब कोई संस्कारित-मन सोचता है या व्यवहार करता है तो हमें 'संस्कृति' नजर आती है। भारत ने अपने संस्कारो के अनुरूप, हमारी सोच के अनुरूप, हमारी संस्कृति का निर्वहन करते हुए कुछ फैसले लिए। संकट की इस घड़ी में, दुनिया के लिए, समृद्ध देशों के लिए भी दवाईयों का संकट बहुत ज्यादा रहा है। भारत ने अपने संस्कृति के अनुरूप फैसला लिया।

हम अपनी शक्तियां और समृद्ध परम्परा को पहचानने से कर देते हैं मना

दुनिया-भर में भारत के आयुर्वेद और योग के महत्व को लोग बड़े विशिष्ट-भाव से देख रहे हैं। कोरोना की दृष्टि से, आयुष मंत्रालय ने इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जो प्रोटोकॉल दिया था, मुझे विश्वास है कि आप लोग, इसका प्रयोग, जरूर कर रहे होंगे। वैसे ये दुर्भाग्य रहा है कि कई बार हम अपनी ही शक्तियां और समृद्ध परम्परा को पहचानने से इंकार कर देते हैं। लेकिन, जब विश्व का कोई दूसरा देश, एविडेंस बेस्ट रिसर्च के आधार पर वही बात करता है। तो हम उसे हाथों-हाथ ले लेते हैं। युवा-पीढ़ी को अब इस चुनौती को स्वीकार करना होगा।

लोगों ने लॉकडाउन के नियमों का पालन किया

पिछले दिनों ही हमारे यहां बिहू, बैसाखी, पुथंडू, विशू, ओड़िया न्यू ईयर ऐसे अनेक त्योहार आए। हमने देखा कि लोगों ने कैसे इन त्योहारों को घर में रहकर, सादगी के साथ मनाया। लॉकडाउन के नियमों का पालन किया। इस बार हमारे ईसाई दोस्तों ने ईस्टर भी घर पर ही मनाया है। इस वैश्विक-महामारी, कोविड-19 के संकट के बीच आपके परिवार के एक सदस्य के नाते, और आप सब भी मेरे ही परिवार-जन हैं, तब कुछ संकेत करना, कुछ सुझाव देना, यह मेरा दायित्व भी बनता है।

समय के साथ मास्क के प्रति बदली धारणा

साथियो, वैसे कोविड-19 के कारण कई सकारात्मक बदलाव, हमारे काम करने के तरीके, हमारी जीवन-शैली और हमारी आदतों में भी स्वाभाविक रूप से अपनी जगह बना रहे हैं। इनमें सबसे पहला है– मास्क पहनना और अपने चेहरे को ढ़ककर रखना। जब मैं मास्क की बात करता हूं, तो, मुझे पुरानी बात याद आती हैं। एक जमाना था, कि हमारे देश के कई ऐसे इलाके होते थे कि, वहां अगर कोई नागरिक फल खरीदता हुआ दिखता था तो लोग उसको जरुर पूछते थे– क्या घर में कोई बीमार है? समय बदला और ये धारणा भी बदली।

सबका धन्यवाद

याद रखिये, हमारे पूर्वजों ने कहा है- 'अग्नि: शेषम् ऋण: शेषम्, व्याधि: शेषम् तथैवच। पुनः पुनः प्रवर्धेत, तस्मात् शेषम् न कारयेत।। हल्के में लेकर छोड़ दी गई आग, कर्ज और बीमारी, मौका पाते ही दोबारा बढ़कर खतरनाक हो जाती हैं। दो गज की दूरी, बहुत है जरूरी। अगली मन की बात के समय जब मिलें तब, इस वैश्विक-महामारी से कुछ मुक्ति की खबरें दुनिया भर से आएं, मानव-जाति इन मुसीबतों से बाहर आए, इसी प्रार्थना के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

पीएम मोदी मन की बात के 63वें संस्करण में क्या बोले थे

पीएम नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 63वें संस्करण कार्यक्रम को संवोधित करते हुए सबसे पहले कहा था कि लॉकडाउन की वजह से लोगों को हो रही परेशानियों के लिए माफी मांगी। इसके बाद उन्होंने देश में लॉक डाउन के बारे में कहा था कि कई लोगों सोच रहे हैं कि मैंने एकदम देश के लोगों को घर में बंद कर दिया। लेकिन यह ऐसा नहीं है इस बीमारी के लिए लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग में रहना बहुत जरूरी है और वही इसके लिए लोगों को लक्ष्मण रेखा पार नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि अभी जो हालात हैं, उसमें आप सभी को सोशल डिस्टेंसिंग बढ़ाने और इमोशनल डिस्टेंसिंग घटाने की जरूरत है। उन्होंने कोरोना के खिलाफ जंग में योगदान देने वाले फ्रंट लाइन सोल्जर्स का भी धन्यवाद दिया।

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