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Balasaheb Vikhe Patil: पीएम मोदी ने किया बालासाहेब विखे पाटिल की आत्मकथा का विमोचन, जानें महाराष्ट्र के इस कद्दावर नेता के बारे में

Balasaheb Vikhe Patil: पीएम नरेंद्र मोदी ने आज मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री बालासाहेब विखे पाटिल की आत्मकथा का विमोचन किया। विखे महाराष्ट्र के बड़े नेताओं में शुमार थे। बालासाहेब विखे पाटिल की आत्मकथा का नाम 'देह वीचवा करणी' है।

Balasaheb Vikhe Patil: पीएम मोदी ने किया बालासाहेब विखे पाटिल की आत्मकथा का विमोचन, जानें महाराष्ट्र के इस कद्दावर नेता के बारे में
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Balasaheb Vikhe Patil: पीएम नरेंद्र मोदी ने आज मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री बालासाहेब विखे पाटिल की आत्मकथा का विमोचन किया। विखे महाराष्ट्र के बड़े नेताओं में शुमार थे। बालासाहेब विखे पाटिल की आत्मकथा का नाम 'देह वीचवा करणी' है।

विमोचन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि बालासाहेब विखे पाटिल के जीवन की कथा महाराष्ट्र के हर कोने में मिलती है। उन्होंने आम लोगों की तकलीफ को कम करने का काम किया। सत्ता और राजनीति के जरिए समाज की भलाई का संदेश दिया। उन्होंने शहर से लेकर गांव तक लोगों की भलाई के काम किए। महाराष्ट्र में अब भी कोरोना है और स्थिति थोड़ी ज्यादा चिंताजनक है। मैं सभी से अपील करता हूं कि लापरवाही न करें और मस्क जरूर पहनें। सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करें। जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं।


पीएम मोदी ने कहा कि बालासाहेब विखे पाटिल की आत्मकथा का विमोचन आज भले हुआ हो, लेकिन उनके जीवन की कथाएं आपको महाराष्ट्र के हर क्षेत्र में मिलेंगी। पीएम ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बालासाहेब विखे पाटिल की आत्मकथा का विमोचन किया और प्रवर रूरल एजुकेशन सोसाइटी का नाम बदलकर 'लोकनेते डॉ. बालासाहेब विखे पाटिल प्रवर रूरल एजुकेशन सोसाइटी' रखा गया।

जानें कौन थे बालासाहेब विखे पाटिल

बालासाहेब विखे पाटिल महाराष्ट्र की राजनीति के महिर नेता रहे और वो केंद्र की राजनीति में भी शामिल हुए। बालासाहेब विखे पाटिल का जन्म 10 अप्रैल 1932 को हुआ। भारत की 14वीं लोकसभा के सदस्य बने और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने महाराष्ट्र के कोपरगांव और अहमदनगर दक्षिण लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता थे। बाद में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। वह एनडीए में मंत्री भी रहे। महाराष्ट्र के लोनी में एशिया की पहली सहकारी चीनी फैक्ट्री की शुरुआत उन्होंने ही की थी। वह 7 बार सांसद, पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री (वित्त) और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री (भारी उद्योग) पद पर भी रहे। 30 दिसंबर 2016 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

उन्होंने कई बार लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीते। इसी दौरान उन्होंने 'प्रवर रूरल एजुकेशन सोसाइटी' की स्थापना की थी। इसकी शुरुआत अहमदनगर जिले के लोनी से की गई थी। इस संस्थान का मकसद गांव के बच्चों को विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान करना और बच्चियों को सशक्त बनाना था।

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