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मजदूरों को जल्द मिलेगा मोदी सरकार का तोहफा, संसद में पेश होगा 'समान न्यूनतम वेतन विधेयक'

प्रचंड जीत से सत्ता में दोबारा आने वाली मोदी सरकार जल्द ही देश के मजदूरों को तोहफा दे सकती है। श्रम सुधारों की दिशा सरकार पहले से फिक्रमंद रही है। श्रम मंत्रालय जल्द ही वेतन संहिता विधेयक की मंजूरी के लिए उसे कैबिनेट के सामने पेश कर सकता है। इसके पास होने से मजदूरों को समान न्यूनतम वेतन का तोहफा मिल जाएगा।

मजदूरों को जल्द मिलेगा मोदी सरकार का तोहफा, संसद में पेश होगा Modi goverment reforms by lobour ministry cabinet to announce minimum wage incentive to workers soon

प्रचंड जीत से सत्ता में दोबारा आने वाली मोदी सरकार जल्द ही देश के मजदूरों को तोहफा दे सकती है। श्रम सुधारों की दिशा सरकार पहले से फिक्रमंद रही है। श्रम मंत्रालय जल्द ही वेतन संहिता विधेयक की मंजूरी के लिए उसे कैबिनेट के सामने पेश कर सकता है। इसके पास होने से मजदूरों को समान न्यूनतम वेतन का तोहफा मिल जाएगा। और अगर इस विधेयक के पास होने के बाद भी अगर कोई मजदूरों का शोषण करता है तो उसपर कार्रवाई तय होगी।

16वीं लोकसभा के आखिर में सरकार ने इस बिल को संसद में पेश किया था पर लोकसभा भंग होने के कारण न इसपर चर्चा हो पाई और न ही इसे लागू करने की दिशा में कोई काम हो सका। सरकार ने अपने वायदे को दोहराते हुए 17वीं लोकसभा की शुरुआत में ही इस विधेयक को पेश करने की तैयारी बना ली है उम्मीद है कि एक बेहतर चर्चा के बाद इस संसद में पास कर दिया जाए।

इस विधेयक के पास होने के बाद सरकार के पास राष्ट्रीय स्तर पर एक न्यूनतम मजदूरी तय करने का अधिकार मिल जाएगा। मोदी सरकार को देश के कई सेक्टर के लिए न्यूनतम समान वेतन देने का अधिकार मिल जाएगा। इसमें खनन और रेलवे विभाग भी शामिल हैं, बाकी अन्य प्रकार की श्रेणी के लिए राज्य सरकार अपने बजट के अनुसार वेतनमान तय करेगी। साथ ही देश की महंगाई के हिसाब से हर पांच साल में न्यूनतम वेतन में बदलाव किया जाएगा।


इस विधेयक के पास होने के बाद मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936, न्यूनतम मजदूरी कानून 1948 और बोनस भुगतान कानून 1965 और समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 की जगह लेगा। खास यह है कि विधेयक के पास होने के बाद कम वेतन देने पर नियोक्ताओं पर जुर्माने का भी प्रावधान होगा। सजा के तौर पर 3 महीने की जेल व 1 लाख तक जुर्माना हो सकता है। या फिर दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।

न सिर्फ पुरुषों को बल्कि महिलाओं को भी इस विधेयक के जरिए सहुलियत देने की कोशिश की जाएगी। उनके काम करने के समय को सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक के बीच होगा, इसके अलावा रात को उनसे काम नहीं करवाया जा सकता, यदि 7 बजे के बाद महिलाओं से काम लिया जाता है तो उनसे काम लेने वाले नियोक्ता को महिला की सुरक्षा का पूर्ण इंतजाम करना होगा। साथ ही छुट्टी के दिन महिलाओं को काम के लिए नहीं बुलाया जा सकता। ऐसे कई अधिकार मजदूरों और महिलाओं को मिल जाएगा जिससे उन्हें फायदा होगा।

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