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कर्नाटक का 'नाटक' खत्म: 14 महीने में ही कुमारस्वामी की विदाई, बीएस येदियुरप्पा फिर बन सकते हैं सीएम

कर्नाटक में चल रहा नाटक आज खत्म हो गया है। एचडी कुमारस्वामी ने आज कर्नाटक विधानसभा में विश्वासमत प्रस्ताव पेश किया जिसमें वे बहुमत साबित करने में असफल रहे। विश्वासमत के पक्ष में 99 वोट पड़े जबकि भाजपा के पक्ष में 105 वोट पड़े है। इसी के साथ ही 14 के भीतर ही कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार गिर गई।

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कर्नाटक में चल रहा नाटक आज खत्म हो गया है। एचडी कुमारस्वामी ने आज कर्नाटक विधानसभा में विश्वासमत प्रस्ताव पेश किया जिसमें वे बहुमत साबित करने में असफल रहे। विश्वासमत के पक्ष में 99 वोट पड़े जबकि भाजपा के पक्ष में 105 वोट पड़े है। इसी के साथ ही 14 के भीतर ही कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार गिर गई।

कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार गिरने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खेमें में खुशी का माहौल है। सरकार गिरने के बाद कर्टनाक भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा गवर्नर से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। खबर है कि भाजपा दो दिनों में कर्नाटक के गवर्नर वजुभाई वाला से मिलकर कर्नाटक में सरकार बनाने का दावा पेश करेगी।

कुमारस्वामी के सरकार गिरने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा में जीत की खुशी जताई। अब कर्टनाक भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा कर्नाटक के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। बीएस येदियुरप्पा कर्नाटक की राजनीति में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं।

जानें बीएस येदियुरप्पा के बारे में

बता दें कि बीएस येदियुरप्पा कर्नाटक की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी का एक बड़ा चेहरा है। बीएस येदियुरप्पा तीन बार राज्य के मुख्मंत्री रह चुके हैं। बीएस येदियुरप्पा सात बार विधायक और एक बार लोकसभा सांसद भी चुने गए हैं। वर्तमान में बीएस येदियुरप्पा भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं और वे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं। बीएस येदियुरप्पा को कर्नाटक में भाजपा का सबसे भरोसेमंद चेहरा माना जाता है।

बीएस येदियुरप्पा का जीवन परिचय

बीएस येदियुरप्पा का जन्म 27 फरवरी 1943 को कार्टनाक राज्य में मांड्या जिले के बुकानकेरे गांव में हुआ था। बीएस येदियुरप्पा ने मांड्या जिले से ही शुरुआती शिक्षा हासिल की थी। इसके बाद बीएस येदियुरप्पा शिकारपुरा चले गए वहां उन्होंने एक मिल में क्लर्क की नौकरी की। इस दौरान बीएस येदियुरप्पा वर्ष 1967 में मिल मालिक की बेटी से शादी कर ली। शादी के बाद बीएस येदियुरप्पा ने हार्ड वेयर शॉप खोली थी।

राजनीतिक सफर

बीएस येदियुरप्पा ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 70 के दशक में संघ (आरएसएस) के सचिव के तौर पर शुरू की थी। बीएस येदियुरप्पा कॉलेज के समय आरएसएस के सदस्य भी रह चुके थे। बीएस येदियुरप्पा 1975 में शिकारपुरा नगर पालिका से अध्यक्ष चुने गए। उस दौरान केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी, इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी। इस दौरान बीएस येदियुरप्पा बेल्लारी और शिमोगा की जेल बंद रहे। बाद में बीएस येदियुरप्पा शिमोगा जिले से भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नियुक्त किए गए।

बीएस येदियुरप्पा ने शिकारपुरा से साल 1993 में विधानसभा का चुनाव जीता और विधानसभा पहुंचे। बीएस येदियुरप्पा लोगों के इतने प्रिय हो गए कि उन्होंने शिकारपुरा से लगातार 6 बार विधानसभा चुनाव जीता। कर्नाटक में 1994 में हुए विधानसभा के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन बीएस येदियुरप्पा को सदन में नेता प्रतिपक्ष चुना गया था। 1999 में हुए विधानसभा चुनाव में बीएस येदियुरप्पा को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भाजपा ने बीएस येदियुरप्पा को विधान परिषद भेजा। इसके बाद कर्नाटक में साल 2004 में विधानसभा हुए थे, उस दौरान कांग्रेस और जेडीएस ने गठबंधन की सरकार बनाई और कांग्रेस के नेता धरम सिंह मुख्यमंत्री चुने गए। लेकिन बीएस येदियुरप्पा विपक्ष की भूमिका में थे।

बीएस येदियुरप्पा ऐसे बने मुख्यमंत्री

राज्य में धरम सिंह की सरकार बनने के कुछ समय बाद जेडीएस नेता कुमारस्वामी ने अपना समर्थन वापस ले लिया था। जिस कारण कांग्रेस-जेडीएस गिर गई। इसका फायदा बीएस येदियुरप्पा की मिला। अपना समर्थन वापस लेकने के बाद कुमारस्वामी ने भारतीय जनता पार्टी से हाथ मिला और 2006 में राज्य के मुख्यमंत्री बन गए। जबिक वीएस येदियुरप्पा को राज्य का डिप्टी सीएम बनाया गया।

बीएस येदियुरप्पा ने समर्थन वापस लिया

जब कर्नाटक में गठबंधन के तहत बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री चुना जाना था तो एचडी कुमारस्वामी ने भारतीय जनता पार्टी से अपना समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। लेकिन साल 2007 में एचडी कुमारस्वामी ने बीएस येदियुरप्पा को समर्थन देने की सहमति जताई। उस वक्त पहली बार साउथ इंडिया में भाजपा की पहली बार सरकार बनी और वीएस येदियुरप्पा ने राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली मगर यह सरकार केवल 10 दिन ही चल पाई।

कर्नाटक में साल 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने अकेले दम पर जीत हासिल की और बीएस येदियुरप्पा को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया। हालांकि भाजपा सरकार पूरे पांच साल राज्य में रही। लेकिन वीएस येदियुरप्पा को उस दौरान अवैध खनन मामले में जांच का सामना करना पड़ा था। साल 2011 में वीएस येदियुरप्पा की जगह डीवी सदानंद गौड़ा को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाया गया था।

2012 में भाजपा से दिया इस्तीफा

बीएस येदियुरप्पा ने साल 2012 में भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देकर कर्नाटक जनता पक्ष के नाम से नई पार्टी बनाई। साल 2013 में कर्नाटक बीएस येदियुरप्पा शिमोगा से विधायक बने। इसके बाद उन्होंने फिर से भाजपा में वापस जाने का फैसला लिया और 2014 में अपनी पार्टी का भारतीय जनता पार्टी के साथ विलय कर लिया। भाजपा में शामिल होने के बाद 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में शिमोगा लोकसभा सीट से शिमोगा लोकसभा सीट ने भारी मतों से जीत हासिल की। बीएस येदियुरप्पा को 2016 में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। कर्नाटक में साल 2018 में विधानसभा का चुनाव हुआ, भाजपा ने यह चुनाव बीएस येदियुरप्पा की अगुआई में लड़ा लेकिन पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर सकी। जिसके बाद कांग्रेस और जेडीएस ने राज्य में गठबंधन की सरकार बनाई और जेडीएस नेता को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया।

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