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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2019 : योग दिवस पर निबंध, जानें योग का वैज्ञानिक प्रमाण

International Yoga Day 2019 : हमारे देश में तो योग के सकारात्मक प्रभाव के बारे में सदियों पहले ही मालूम हो गया था। लेकिन अब तमाम देशी और विदेशी वैज्ञानिक भी अनेक शोध के आधार पर योग के तन-मन पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव को मानने लगे हैं।

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International Yoga Day 2019 : दुनिया भर के चिकित्सा विज्ञानी लंबे समय से औषधीय इलाज के पूरक के रूप में योग के उपयोग की संभावनाओं पर शोध और चिंतन कर रहे हैं। बैंग्लुरु स्थित 'नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसांइसेज (एनआईएमएचएएनस)' में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिवराम वरंबली भी वैज्ञानिकों के इस समूह में शामिल हैं। उनके अध्ययन से पता चला है कि सीजोफ्रेनिया और अवसाद सहित अन्य मानसिक बीमारियों से पीड़ित मरीजों को योग करने से काफी आराम मिलता है।

वहीं यूएस में ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता जेनिस के. कीकोल्ट ग्लेजर ने भी पाया है कि योग की मदद से मेटाबॉलिक डिसऑर्डर से संबंधित कई बीमारियों जैसे टाइप-2 डायबिटीज और ओबेसिटी को दूर रखा जा सकता है। इन वैज्ञानिकों ने पाया है कि नियमित योगाभ्यास से रक्त में कई ऐसे कंपाउंडों को नियंत्रण में रखा जा सकता है, जो सिस्टेमिक इंफ्लेमेशन से जुड़े हैं। सिस्टेमिक इंफ्लेमेशन हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, टाइप-2 डायबिटीज, आर्थराइटिस और बढ़ती उम्र के साथ उत्पन्न होने वाले अन्य कई रोगों से संबद्ध है।

मस्तिष्क के लिए लाभकारी

हमारे देश में पुराने जमाने से बॉडी और माइंड को दुरुस्त रखने के लिए योग का प्रयोग होता रहा है, लेकिन अब दुनिया भर के वैज्ञानिक भी इसमें दिलचस्पी ले रहे हैं और वे मानसिक गड़बड़ियों सहित जीवनशैली से जुड़ी कैंसर जैसी घातक बीमारियों के इलाज में भी 'कॉम्प्लीमेंटरी थेरेपी' के रूप में इसकी भूमिका ढूंढ़ रहे हैं। वैज्ञानिक उस मॉलीक्यूलर मेकेनिज्म को समझने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे शरीर में बदलाव आते हैं। एनआईएमएचएएनस की वैज्ञानिक टीम ने अपने अध्ययन में पाया कि योग से ब्रेन की केमिस्ट्री में कई पॉजिटिव बदलाव आते हैं।


बढ़ता है ऑक्सीटोसिन

अपने अध्ययन में डॉ. शिवराम और उनकी टीम ने पाया कि सीजोफ्रेनिया के जिन मरीजों ने लगातार चार महीनों तक योगाभ्यास किया उनमें आक्सीटोसिन नामक हार्मोन की ज्यादा मात्रा पाई गई। यह हार्मोन प्यार और विश्वास की भावना जगाने वाला माना जाता है। जिन लोगों में यह हार्मोन पर्याप्त मात्रा में होता है, वे दूसरों के साथ अच्छी तरह बॉन्डिंग करने में सक्षम होते हैं। डॉ. शिवराम कहते हैं, 'हमने देखा है कि ऐसे मरीजों की सामाजिक समझ की स्किल में काफी सुधार हो गया।' सीजोफ्रेनिया के मरीज दूसरे लोगों की भावना सही ढंग से समझने में सक्षम नहीं होते इसलिए सामाजिक परिस्थितियों में सही ढंग से प्रतिक्रिया नहीं दे पाते।

इंप्रूव होती है ब्रेन प्लास्टिसिटी

इंडियन जर्नल ऑफ साइकिएट्री में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक तुलनात्मक अध्ययन में पाया गया है कि दवा के साथ-साथ योग का अभ्यास करने वाले मरीजों की स्थिति में, कोई शारीरिक गतिविधि न करने वाले या नॉर्मल एक्सरसाइज करने वाले मरीजों की तुलना में पांच गुणा ज्यादा इंप्रूवमेंट हुआ। डॉ. शिवराम के अनुसार, 'डिप्रेशन से पीड़ित जो रोगी योग का अभ्यास करते रहे उनके ब्रेन की प्लास्टिसिटी इंप्रूव हुई। डिप्रेशन के मरीजों में 'ब्रेन डिराइव्ड न्यूरोट्रैफिक फैक्टर' नामक ब्रेन केमिकल कम होता है, जो ब्रेन की प्लास्टिसिटी के लिए जरूरी होता है। अवसादरोधी दवाओं की तरह ही योग भी कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर घटाता है।'


ब्लड प्रोटीन पर योग का असर

यूएस की स्वास्थ्य विज्ञानी कीकोल्ट ग्लेजर और उनकी टीम रक्त में मौजूद दो प्रोटीनों-लेप्टिन और एडीपोनेक्टिन पर योगाभ्यास के असर का अध्ययन कर चुकी हैं। लेप्टिन इन्फ्लेमेशन बढ़ाता है जबकि एडीपोनेक्टिन इसे दबाने का काम करता है। इन दोनों प्रोटीनों का रेशियो ठीक न हो तो व्यक्ति में मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का खतरा हो सकता है। इन वैज्ञानिकों ने पाया कि नियमित रूप से योगाभ्यास करने वाले मरीजों में यह रेशियो अन्य मरीजों की तुलना में काफी अच्छा था, जो बेहतर हेल्थ-प्रोफाइल का संकेतक है। 'फिजियोलॉजी एंड बिहेवियर' जर्नल में प्रकाशित इस शोध में लिखा गया है कि योग अभ्यास करने वाले मरीजों में लेप्टिन का स्तर कम और एडीपोनेक्टिन का स्तर ज्यादा पाया गया।

इम्यूनिटी पर प्रभाव

एशियन जर्नल ऑफ साइकिएट्री में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बीते दस सालों में इम्यूनिटी पर योग के प्रभाव पर किए गए अध्ययनों की समीक्षा की गई थी। नार्वे की यूनिवर्सिटी ऑफ ओस्लो में मॉलीक्यूलर बायोसाइंस के प्रोफेसर फहरी साटकीयोग्लू ने योग और मेडिटेशन के अलावा दूसरे एशियाई देशों में प्रचलित ताई ची और की गोंग जैसे अभ्यासों पर भी फोकस किया। उनका कहना था, 'योगिक और मेडिटेशन अभ्यास रक्त में संचरण करने वाली इम्यून सेल्स के जीन एक्सप्रेशन प्रोफाइल पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। ये बदलाव मॉलीक्यूलर लेवल पर होते हैं।'


ध्यान के बहुआयामी लाभ

ध्यान यानी मेडिटेशन का आध्यात्मिक महत्व भी है। यह आपकी आत्मा को शुद्ध कर आपको बेहतर इंसान बनाता है। अगर आप प्रतिदिन 10-20 मिनट ही ध्यान करेंगे तो आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक परिवर्तन आने लगेंगे। ऐसे समय में जब जीवन में तनाव का स्तर बढ़ रहा है, नियमित रूप से ध्यान करना अवसाद, एंग्जाइटी, डिमेंशिया आदि मानसिक रोगों से बचाता है। ध्यान का हमारे शरीर के एक-एक अंग और तंत्र पर प्रभाव पड़ता है। इससे आंतरिकअंग और तंत्र बेहतर तरीके से काम करते हैं। ध्यान इतनी गहराई से काम करता है कि वो कोशिकाओं के डीएनए को क्षतिग्रस्त होने से भी बचाता है। नियमित रूप से ध्यान करने से शरीर, मस्तिष्क और मन को गहरा आराम मिलता है। सभी को नियमित रूप से ध्यान करना चाहिए। अगर आपने पहले कभी ध्यान नहीं किया है तो आज से ही शुरू कर दें।

-रविंदर पाल सिंह, फैकल्टी-आर्ट ऑफ लिविंग योगा एंड मेडिटेशन सेंटर, नई दिल्ली

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