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भारतीय रेलवे अब 151 ट्रेनों को निजी हाथों में सौंपेगा, ये है योजना

भारतीय रेलवे ने 151 ट्रेनों को निजी हाथों में सौंपने के ऐलान कर चुकी है, जिसके बाद अब रेलवे स्टेशनों का भी निजीकरण करने की योजना तैयार की जा रही है। रेलवे ने मंगलवार को निजी ट्रेन परियोजना के लिए निजी भागीदारी हेतु विभिन्न कंपनियों के साथ चर्चा करके अनुरोध आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

रेलवे कर्मचारियों को यात्रा के लिए मिलेगा ऑनलाइन ई-पास, ये होगी पूरी प्रक्रिया
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भारतीय रेलवे (प्रतीकात्मक फोटो)

भारतीय रेलवे ने 151 ट्रेनों को निजी हाथों में सौंपने के ऐलान कर चुकी है, जिसके बाद अब रेलवे स्टेशनों का भी निजीकरण करने की योजना तैयार की जा रही है। रेलवे ने मंगलवार को निजी ट्रेन परियोजना के लिए निजी भागीदारी हेतु विभिन्न कंपनियों के साथ चर्चा करके अनुरोध आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

रेल मंत्रालय ने मंगलवार को निजी ट्रेन परियोजना के लिए भारतीय रेलवे निजी निवेश की बीडिंग प्रक्रिया के तहत पहला प्री-एप्लिकेशन सम्मेलन का आयोजन किया। इस बीडिंग प्रक्रिया के भाग के रूप में इस पहले पूर्व-अनुप्रयोग सम्मेलन में शामिल हुए 16 संभावित आवेदकों की भागीदारी के साथ ओवर-व्हीलिंग प्रतिक्रिया मिली है।

इस दौरान संभावित आवेदकों द्वारा उठाए गए मुद्दों और चिंताओं पर भी चर्चा की गई, जिनमें प्रमुख रूप से पात्रता मानदंड, बोली प्रक्रिया, रेक की खरीद, ट्रेनों के संचालन और समूहों की संरचना से संबंधित मामले शामिल रहे। कंपनियों के प्रतिनिधियों के इन मुद्दों पर रेलवे मंत्रालय और नीति आयोग के अधिकारियों द्वारा आरएफक्यू और बोली ढांचे के प्रावधानों में सुधार के लिए सभी निर्णयों को स्पष्ट रूप से बताया।

रेल मंत्रालय ने इस दौरान 151 आधुनिक ट्रेनों (रेक) की शुरूआत के माध्यम से मार्गों के 109 मूल गंतव्य जोड़ी पर यात्री ट्रेन सेवाओं के संचालन में निजी भागीदारी के लिए योग्यता के आधार पर 12 अनुरोध आमंत्रित किए हैं, जो नेटवर्क पर संचालित मौजूदा ट्रेनों के अतिरिक्त होगा। मंत्रालय के अनुसार अनुमानित उपक्रम के लिए निजी संस्थाओं का चयन दो चरणों वाली प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें अनुरोध के लिए अर्हता (आरएफक्यू) और अनुरोध के लिए प्रस्ताव (आरएफपी) शामिल हैं।

यह भारतीय रेलवे नेटवर्क पर पैसेंजर ट्रेनों को चलाने के लिए निजी निवेश की पहली पहल है। इस परियोजना से लगभग 30 हजार करोड़ रुपए का निजी क्षेत्र का निवेश होगा। रेलवे के अनुसार यह फैसला देश में जनता लिए रेल परिवहन सेवाओं में सुधार लाने की दिशा में यह पहल की जा रही है, जिसमें आधुनिक प्रौद्योगिकी रोलिंग स्टॉक और सेवाओं को उपलब्ध कराने का उद्देश्य है, ताकि यात्रियों को समग्र यात्रा के बेहतर अनुभव का अहसास कराया जा सके।

रेलवे हरसंभव देगा मदद

रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने इस ऑनलाइन सम्मेलन के दौरान ढुलाई शुल्क जैसे मुद्दों पर भरोसा दिया कि रेल मंत्रालय ढुलाई शुल्क को अग्रिम रूप से निर्दिष्ट करेगा, जिसे उपयुक्त रुप से पूरी रियायत अवधि के लिए अनुक्रमित किया जाएगा, ताकि ढुलाई शुल्क में निश्चितता कायम रहे। वहीं रेल मंत्रालय यात्री ट्रेनों के रेल मार्गो का विवरण देने के अलावा बोली लगाने वाली निजी कंपनियों को इस परियोजना में उनके काम में पूरी मदद करेगा।

हालांकि रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि परियोजना के तहत संचालित की जाने वाली गाड़ियों को निजी संस्थाओं द्वारा लीज पर खरीदा या लिया जा सकता है। वहीं ट्रेनों के संचालन के संबंध में भागीदारियों के बीच सभी जोखिम समान रूप से आवंटित किए जाएंगे। इसके लिए रेल मंत्रालय 31 जुलाई तक सभी संभावित आवेदकों लिखित में पूरी प्रक्रिया की जानकारी से लिखित रुप में अवगत कराएगा। इसके बाद दूसरा पूर्व-अनुप्रयोग सम्मेलन 12 अगस्त को आयोजित करने का फैसला किया गया है।

रेलवे स्टेशनों का भी होगा निजीकरण

भारतीय रेलवे के 151 ट्रेनों को निजी हाथों में सौंपने के फैसले के बाद रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण कर उनका भी निजीकरण करने की योजना बनाई जा रही है। ऐसे संकेत मंगलवार को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने मर्चेंट चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कहा कि केंद्र सरकार की योजना यह है कि रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जाए और उसके बाद एक बोली के जरिए यह निजी हाथों में दे दिया जाए। इससे पहले रेलवे के नेटवर्क पर निजी कंपनियों की ट्रेन चलाने के लिए एक औपचारिक शुरुआत हो चुकी है।

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