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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने पत्र लिखकर MHA पर लगाया आरोप, कहा - गृह मंत्रालय सरकार पर टेस्टिंग कम करने का बना रही दबाव

स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा था कि दिल्ली में चुनी हुई सरकार पर गृह मंत्रालय टेस्टिंग रोकने का दबाव बना रही है। उन्होंने कहा था कि दिल्ली अफसरों पर ऐसा दबाव डालना गैरसंवैधानिक और गैर कानूनी है।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने पत्र लिखकर MHA पर लगाया आरोप, कहा - गृह मंत्रालय सरकार पर टेस्टिंग कम करने का बना रही दबाव
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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने पत्र लिखकर गृह मंत्रालय पर आरोप लगाया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि गृह मंत्रालय दिल्ली सरकार पर दबाव बना रही है कि वो टेस्टिंग की संख्या न बढ़ाएं। इस मामले में गृह मंत्रालय ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री के सभी आरोपों का खंडन किया है।

27 अगस्त को लिखा था पत्र

गृह मंत्रालय ने कहा कि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने 27 अगस्त 2020 को केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिखा था। इस पत्र में ये आरोप लगाया गया था कि गृह मंत्रालय दिल्ली सरकार पर टेस्टिंग न बढ़ाने का दबाव बना रही है। गृह मंत्रालय ने कहा कि दिल्ली सरकार के आरोप गलत और बेबुनियाद हैं। बता दें कि स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा था कि दिल्ली में चुनी हुई सरकार पर गृह मंत्रालय टेस्टिंग रोकने का दबाव बना रही है। उन्होंने कहा था कि दिल्ली अफसरों पर ऐसा दबाव डालना गैरसंवैधानिक और गैर कानूनी है।

गृह मंत्री अमित साह ने बढ़ाई थी टेस्टिंग की संख्या

गृह मंत्रालय ने कहा कि शायद वो ये भूल रहे हैं कि गृह मंत्री अमित शाह ने ही दिल्ली में टेस्टिंग बढ़ाने के निर्देश दिए थे। उनके कहने के बाद ही दिल्ली में टेस्टिंग को 4000 प्रतिदिन से 20000 प्रतिदिन किया गया। मंत्रालय ने कहा कि दिल्ली में कोरोना के बेहतर नतीजे इसी कारण से दिख पा रहे हैं क्योंकि दिल्ली में टेस्टिंग को बढ़ाया गया और अन्य कंटेनमेंट मापदंडों को ठीक किया गया।

दिल्ली सरकार के नोट पर दिया जाए ध्यान

मंत्रालय ने कहा कि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री के पत्र ने दिल्ली सरकार के अधिकारियों के एक नोट को खारिज कर दिया है। इस नोट में यह ध्यान दिया जा सकता है कि इस नोट ने दिल्ली में टेस्ट में वृद्धि के मामले में एमएचए के किसी भी निर्देश का कोई उल्लेख नहीं किया है।

नोट में केवल यह कहा गया है कि दिल्ली में टेस्ट में प्रस्तावित वृद्धि के लिए डॉ वीके पॉल की अध्यक्षता वाली एक विशेषज्ञ समिति के विचार लिए जा सकते हैं। इसके अलावा आरटी-पीसीआर और रैपिड एंटीजन के मिश्रण, भौगोलिक क्षेत्रों और जनसांख्यिकी आदि की कटेगरी जैसे विषयों पर टेक्निकल गाइडेंस के लिए भी समिति से ही विचार लेने की बात कही गई है।

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