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बीहड़ में साइकिल : लेखक ने यात्रा के दौरान चंबल की अनोखी दुनिया को शब्दों में पिरोया, बयां किया लोगों का दर्द

बीहड़ में साइकिल किताब चंबल घाटी के विभिन्न पहलुओं को परत दर परत वाकिफ कराने के साथ बदलाव की भी वकालत करती है। यह चंबल घाटी के इतिहास और भूगोल को बाहर निकालती है। यह किताब रिडर को रोमांचकारी, साहसिक और कठिन यात्रा को हर्फों और तस्वीरों में बांध रखती है।

बीहड़ में साइकिल : लेखक ने यात्रा के दौरान चंबल की अनोखी दुनिया को शब्दों में पिरोया, बयां किया लोगों का दर्द

किताब 'बीहड़ में साइकिल' चंबल की सिहरन और संदेह की एक अनोखी दुनिया को समेटे हुए है। इसके आसपास के क्षेत्र को चंबल घाटी के नाम से जाना जाता है। यह अजनबियों को डराती है, लेकिन अगर कोई इसका होकर आए तो उसका स्वागत भी खूब करती है। चंबल घाटी में बिखरी कहानियों ने कई लोगों को बड़ा नाम दिया है, लेकिन कईयों ने इसके नाम पर पैसा भी खूब कमाया है। लेकिन, चंबल का असली दर्द किसी ने समझा ही नहीं है।

बीहड़ में साइकिल, के लेखन ने भीषण गर्मी और बारिश में साइकिल से करीब 3 महीने इस अजूबी दुनिया की यात्रा की है और इसके दर्द को नजदीक से समझा है। जिसके बाद इसे शब्दों में पिरोकर दुनिया के सामने पेश किया है। इस दुर्दांत यात्रा पर मौसम की मार भी बेअसर रही। इसमें आजादी आंदोलन के गुमनाम योद्धाओं के खोज की भी दिलचस्प गाधा है। देश के सबसे बड़े गुप्त क्रांतिकारी दल मातृवेदी के दस्तावेजीकरण के बहाने चंबल के अनछुए पहलुओं से मुठभेड़ दिखती है।

बीहड़ में साइकिल किताब चंबल घाटी के विभिन्न पहलुओं को परत दर परत वाकिफ कराने के साथ बदलाव की भी वकालत करती है। यह चंबल घाटी के इतिहास और भूगोल को बाहर निकालती है। यह किताब रिडर को रोमांचकारी, साहसिक और कठिन यात्रा को हर्फों और तस्वीरों में बांध रखती है।

सही इलाज नहीं मिलने की वजह से हुई मौत

दो साल पहले गरीबी के कारण सही इलाज नहीं मिलने की वजह से फूलन देवी की बहन की मौत हो गई थी। वेस्ट यूपी के जालौन जिले के शेखपुर गुडा गांव में गरीबी, दस्युविरोधी राजनीतिज्ञ दिवंगत फूलन देवी की छोटी बहन रामकली देवी ने बस्ती स्थित पत्रकार शाह आलम के साथ अपने जीवन की कठिनाइयों को साझा किया है।

फूलन देवी की बहन अपने बहन को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रही है, साल 2001 में शेर सिंह राणा ने उसकी हत्या कर दी थी। किताब बीहड़ में साइकिल चंबल की अनकही कहानियों का संग्रह, जो उस क्षेत्र को वेस्ट यूपी, एमपी के क्षेत्रों को कवर करने वाले डकैतों के लिए बदनाम था।

शाह आलम ने 2,800 किमी साइकिल चलाई

शाह आलम ने 29 मार्च, 2016 से 23 जून, 2016 तक चंबल के इलाकों में लगभग 2,800 किमी की साइकिल चलाई और लोगों से बात की और उनके विचारों को लिया है। शाह आलम ने इस चंबल इलाके में प्रचलित पिछड़ेपन, क्षेत्र में मारे गए लोगों के परिवारों की बुरी स्थिति, मैनुअल मैला ढोने जैसी कुप्रथाओं की निरंतरता और समस्याओं का मुकाबला करने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला है। शाह आलम ने इस वर्ष 5 मार्च को अपनी शादी में अपनी पुस्तक का विमोचन किया है।

बिस्मिल का गांव पहली महिला डकैत पुतली बाई का घर था

उनकी किताब में यह भी बताया गया है कि 1947 में क्रांतिकारी और शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के परिवार को पट्टे पर आवंटित 32 बीघा जमीन को उनके पैतृक गांव बरबई में, मध्यप्रदेश के मुरैना में भू-माफिया द्वारा हड़प लिया गया था, जबकि परिवार के संघर्ष के कारण न्याय मिला। बिस्मिल का यह गांव चंबल की पहली महिला डकैत पुतली बाई का भी घर था। जिनकी 1958 में पुलिस मुठभेड़ में गोली लगने से मौत हो गई थी। आलम ने किताब में लिखा है। उनका दावा है कि बारबाई में बिस्मिल के नाम पर 26 साल पहले स्थापित एक पुस्तकालय को एक भी किताब नहीं मिली।

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