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Supreme Court Cancels Bail Of PFI Members: पीएफआई के इन 8 सदस्यों के पास से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारियों और अन्य हिंदू संगठनों की कुछ चिह्नों वाली तस्वीरें सहित कई दस्तावेज बरामद किए गए थे। जांच में सामने आया था कि कई हिंदूवादी नेता इनकी हिट लिस्ट में थे। 

Supreme Court Cancels Bail Of PFI Members: प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के सदस्यों को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 22 मई को मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें पीएफआई के 8 सदस्यों की जमानत रद्द की गई थी। आठों सदस्यों पर देशभर में आतंकी घटनाएं अंजाम देने की साजिश रचने का आरोप है। इन पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामले दर्ज हैं। 

पीएफआई के इन 8 सदस्यों के पास से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारियों और अन्य हिंदू संगठनों की कुछ चिह्नों वाली तस्वीरें सहित कई दस्तावेज बरामद किए गए थे। जांच में सामने आया था कि कई हिंदूवादी नेता इनकी हिट लिस्ट में थे। 

जमानत रद्द, तुरंत सुनवाई का आदेश
जस्टिस बेला माधुर्य त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मिथल की खंडपीठ ने कहा कि अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए और अधिकतम सजा दिए जाने पर कारावास में बिताए गए केवल 1.5 वर्षों को ध्यान में रखते हुए हम जमानत देने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक हैं। अदालत व्यक्तिगत स्वतंत्रता देने वाले आदेशों में हस्तक्षेप कर सकती है, अगर वो गलत आधार पर दिए गए हों। इसलिए, इसने पीठ ने जमानत रद्द कर दी और त्वरित सुनवाई का आदेश दिया।

जस्टिस त्रिवेदी ने कहा कि जांच एजेंसी ने हमारे समक्ष जो सामग्री पेश की है, उसके आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है। इन सदस्यों के खिलाफ षडयंत्र रचने, आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम सजा दी गई है। जबकि उन्होंने सिर्फ डेढ़ साल का कारावास बिताया है। इस कारण से हम मद्रास हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप कर रहे हैं। 

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ NIA गई थी सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट, मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 8 आरोपियों को जमानत दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि एनआईए ने पीएफआई सदस्यों पर आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने के लिए धन इकट्ठा करने में शामिल होने का आरोप लगाया था, लेकिन उन्हें किसी भी आतंकवादी गतिविधियों से सीधे जोड़ने के लिए रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं था।

एनआईए ने अदालत को बताया था कि अपीलकर्ताओं के पास आरएसएस नेताओं और अन्य हिंदू संगठनों की कुछ चिह्नों वाली तस्वीरें सहित कई दस्तावेज पाए गए थे। एनआईए ने यह भी तर्क दिया था कि विजन डॉक्यूमेंट के आधार पर, पीएफआई का उद्देश्य राजनीतिक शक्ति हासिल करना और वर्ष 2047 तक भारत में एक इस्लामी सरकार की स्थापना की दिशा में काम करना था।

पिछले साल सितंबर में हुई थी गिरफ्तारी
आरोपियों को पिछले साल सितंबर में एनआईए ने गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने दावा किया गया था कि केंद्र सरकार को जानकारी मिली थी कि पीएफआई के कई सदस्य केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और भारत के कई अन्य राज्यों में आतंकवादी कृत्यों को आयोजित करने की साजिश रच रहे थे।

एक विशेष अदालत ने इस साल जनवरी में अपीलकर्ताओं को जमानत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्हें अपील में मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी, जिसके बाद उन्होंने शीर्ष अदालत में अपील की।

कौन किसकी तरह से हुआ पेश?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू, अधिवक्ता रजत नायर, सृष्टि मिश्रा, सात्विका ठाकुर, रमन यादव, साक्षी कक्कड़, सार्थक करोल, अन्नम वेंकटेश और अरविंद कुमार शर्मा एनआईए की ओर से पेश हुए।

वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता, रेबेका जॉन, श्याम दीवान, अधिवक्ता एस बालाकृष्णन, रिजवान अहमद, ए नोफल, नित्या गुप्ता, जावेद आर शेख, अब्दुल शुकूर, शेरिफ का, अनुष्का बरुआ, देवांश ए मोहता, ए सेल्विन राजा, ए राजा मोहम्मद, आरोपियों की ओर से वीएस बानो और खालिद अख्तर पेश हुए।

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