नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिरने के बाद सदन में तीखी बहस और संदेशों का दौर चला।
अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होते ही ओम बिरला ने पुनः आसन ग्रहण किया और विपक्ष के उन सभी आरोपों का बिंदुवार जवाब दिया, जिनमें उन पर पक्षपात करने या विपक्ष की आवाज दबाने के आरोप लगाए गए थे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन किसी व्यक्ति की मर्जी से नहीं, बल्कि स्थापित नियमों और 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं के प्रतिनिधित्व से चलता है।
लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष की अहमियत और नियमों की सर्वोच्चता
ओम बिरला ने अपने संबोधन में लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए मजबूत और सक्रिय विपक्ष का होना नितांत आवश्यक है। उन्होंने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि नेता प्रतिपक्ष या विपक्षी सांसदों को बोलने से रोका जाता है।
अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में कभी भी किसी विपक्षी नेता को नियमों के दायरे में रहकर अपनी बात रखने से नहीं रोका है।
उन्होंने नसीहत दी कि सांसदों को सदन की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए और माइक बंद करने जैसे झूठे प्रचार से बचना चाहिए, क्योंकि नियमों के विपरीत बोलने पर टोकना अध्यक्ष का संवैधानिक कर्तव्य है।
140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व और उच्च उत्पादकता का दावा
स्पीकर ने इस बात पर विशेष बल दिया कि लोकसभा केवल एक भवन नहीं है, बल्कि यह देश की विशाल जनता की उम्मीदों का केंद्र है। उन्होंने बताया कि तमाम व्यवधानों और हंगामे के बावजूद, उनके कार्यकाल में सदन की उत्पादकता के मानकों ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि वे सदन को राजनीतिक अखाड़ा बनाने के बजाय जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा का मंच बनाएं। बिरला ने कहा कि आसन हमेशा निष्पक्ष रहता है और पक्ष-विपक्ष दोनों को बराबर अवसर देना उनकी प्राथमिकता रही है, लेकिन इसके लिए सदस्यों को भी संसदीय मर्यादाओं का पालन करना होगा।
राहुल गांधी का प्रधानमंत्री पर तीखा हमला और अदाणी-एपस्टीन फाइल्स का जिक्र
सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया। राहुल ने प्रधानमंत्री के उस बयान पर पलटवार किया जिसमें उन्होंने जनता से 'घबराने' की बात नहीं कही थी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री खुद अदाणी मामले और हाल ही में चर्चा में आई 'एपस्टीन फाइल्स' के कारण डरे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए डराने की राजनीति कर रही है। राहुल ने अदाणी समूह के साथ सरकार के कथित संबंधों पर सवाल उठाते हुए इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा करार दिया।
राज्यसभा में फारूक अब्दुल्ला पर हमले का मुद्दा और विपक्ष की नारेबाजी
सदन के दूसरे हिस्से यानी राज्यसभा में भी भारी हंगामा देखने को मिला, जहाँ विपक्ष ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर हुए हालिया हमले का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। विपक्षी सांसदों ने सुरक्षा व्यवस्था में हुई बड़ी चूक को लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस पर विस्तृत चर्चा की मांग की।
सरकार की ओर से मंत्रियों ने जवाब देने की कोशिश की, लेकिन विपक्षी दल प्रधानमंत्री की उपस्थिति और इस मामले पर गृह मंत्री के बयान पर अड़े रहे। हंगामे के चलते उच्च सदन की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा, जिससे विधायी कार्यों में भारी व्यवधान उत्पन्न हुआ।