नई दिल्ली: दिल्ली दंगों और शाहीन बाग धरने से जुड़े मामलों के आरोपी शरजील इमाम को सोमवार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने मानवीय आधार पर शरजील को 10 दिनों की अंतरिम जमानत मंजूर कर ली है।
एडिशनल सेशन जज समीर बाजपेई की अदालत ने यह आदेश सुनाते हुए शरजील को जेल से बाहर आने की अनुमति दे दी है।
#BREAKING: Karkardooma Court granted 10-day interim bail to Sharjeel Imam in the 2020 Delhi riots conspiracy case so he can attend his brother’s wedding and take care of his ailing mother. pic.twitter.com/thldJXi2pQ
— IANS (@ians_india) March 9, 2026
भाई की शादी और बीमार मां की देखभाल का दिया हवाला
शरजील इमाम के वकीलों ने अदालत में 10 दिनों की अंतरिम रिहाई के लिए अर्जी दाखिल की थी। दलील दी गई कि शरजील के सगे भाई की जल्द ही शादी होने वाली है, जिसमें परिवार के सदस्य के तौर पर उनकी मौजूदगी अनिवार्य है।
इसके साथ ही अदालत को बताया गया कि उनकी मां की तबीयत भी काफी खराब है और घर में उनकी देखभाल करने वाला कोई दूसरा पुरुष सदस्य नहीं है। इन पारिवारिक परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने अंतरिम जमानत की अर्जी स्वीकार कर ली।
20 मार्च से 30 मार्च तक जेल से बाहर रहेंगे शरजील
कोर्ट के आदेश के अनुसार, शरजील इमाम को 20 मार्च से 30 मार्च 2026 तक के लिए अंतरिम जमानत दी गई है। इस अवधि के समाप्त होने के बाद उन्हें वापस जेल अधिकारियों के समक्ष सरेंडर करना होगा। ज्ञात हो कि शरजील इमाम पर दिल्ली दंगों की साजिश रचने और भड़काऊ भाषण देने जैसे कई गंभीर आरोप हैं, जिसके चलते वे लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं।
STORY | 2020 Delhi riots: Court grants 10-day interim bail to Sharjeel Imam
— Press Trust of India (@PTI_News) March 9, 2026
A Delhi court on March 9 granted 10-day interim bail to activist Sharjeel Imam, an accused in the 2020 Delhi riots case, for attending his brother's wedding.
Additional Sessions Judge Sameer Bajpai was… pic.twitter.com/3buh6ighkM
शाहीन बाग धरना और दिल्ली दंगों में भूमिका के आरोप
दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में दावा किया था कि साल 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ शाहीन बाग में हुए सबसे लंबे धरने की रूपरेखा शरजील इमाम ने ही तैयार की थी।
पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों की साजिश रची गई थी। स्पेशल सेल के अनुसार, शरजील ने अल्पसंख्यक संगठनों के बैनर तले छात्रों को एकजुट किया और ओखला व निजामुद्दीन जैसे इलाकों में हजारों पर्चे बंटवाए थे।










