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विदेश मंत्री आज संसद के दोनों सदनों में ईरान-इजरायल युद्ध और भारत के रुख पर बयान देंगे।

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में पैदा हुआ संकट भारतीय संसद के मौजूदा सत्र में छाया रह सकता है। इस संवेदनशील वैश्विक मुद्दे पर भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट करने के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज दोनों सदनों में बयान देंगे। जहाँ सरकार इस मामले में बेहद संतुलित और सावधानी भरा रुख अपनाए हुए है, वहीं विपक्षी दल भारत की ऊर्जा जरूरतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में हैं।

​संसद के दोनों सदनों में विदेश मंत्री का संबोधन

​विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट पर भारत की स्थिति स्पष्ट करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वह सुबह 11 बजे राज्यसभा में और दोपहर 12 बजे लोकसभा में अपना आधिकारिक बयान देंगे। जयशंकर ने पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कहा है कि भारत सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने का पक्षधर है और मौजूदा तनावपूर्ण हालातों का समाधान केवल बातचीत के जरिए ही निकाला जाना चाहिए।

​विपक्ष की रणनीति: ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई पर घेराव

​कांग्रेस सहित प्रमुख विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को संसद में जोर-शोर से उठाने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन के अनुसार, पार्टी संसद में वेस्ट एशिया संकट के कारण भारत की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव का मुद्दा उठाएगी। विपक्ष का तर्क है कि इस युद्ध की वजह से तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर पड़ेगा।

​सरकार की चुप्पी पर तीखी आलोचना

​विपक्षी नेताओं ने इस संकट पर केंद्र सरकार की कथित चुप्पी की कड़ी आलोचना की है। विपक्ष की मांग है कि सरकार को इस संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मामले पर अधिक स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाना चाहिए। हालांकि, सरकार का मानना है कि इस इलाके में भारत के बड़े रणनीतिक हित और लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जुड़ी हुई है, इसलिए किसी भी पक्ष पर बयानबाजी करने के बजाय एक संतुलित रुख बनाए रखना राष्ट्रीय हित में है।

​ईरान के वॉरशिप को कोच्चि पोर्ट पर डॉक करने की अनुमति

​भारत ने मानवीय आधार पर एक बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के वॉरशिप 'IRIS लवन' को कोच्चि पोर्ट पर डॉक करने की अनुमति दी है। सरकार का यह निर्णय मानवीय चिंताओं और खाड़ी क्षेत्र के साथ भारत के पुराने रणनीतिक संबंधों को दर्शाता है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है और वहां लाखों भारतीय श्रमिक भी काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

​जम्मू-कश्मीर और अन्य मुद्दे भी गर्माएंगे

​वेस्ट एशिया संकट के अलावा, कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह संसद में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग भी उठाएगी। इसके साथ ही ग्रेट निकोबार आइलैंड को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के हालिया आदेश, बढ़ती बेरोजगारी और डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्पीकर के खिलाफ भी वोट करने के संकेत दिए हैं।

​खड़गे का तीखा हमला: ट्रम्प को बताया 'तानाशाह'

​कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वेस्ट एशिया संकट और रूसी तेल सप्लाई पर अमेरिका के प्रभाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कार्यशैली की आलोचना करते हुए उन्हें 'तानाशाह' तक कह डाला। खड़गे ने सवाल उठाया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच अपनी स्वतंत्र नीति को कैसे बनाए रखेगा।

​सरकार का मंत्रियों को निर्देश: 'बयानबाजी में बरतें संयम'

​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपने सभी नेताओं और मंत्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि मिडल ईस्ट संकट पर कोई भी आधिकारिक बयान देते समय अत्यधिक संयम बरता जाए, ताकि भारत के रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों पर कोई विपरीत असर न पड़े। सरकार की कोशिश सभी पक्षों से संवाद बनाए रखने की है।

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