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खामेनेई के निधन और सैन्य हमलों के बाद भारत ने 24 घंटे में तीन बार ईरानी नेतृत्व से संपर्क कर शांति की वकालत की है।

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत और ईरान के शीर्ष राजनयिकों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। राजधानी दिल्ली में आयोजित 'रायसीना डायलॉग 2026' के इतर शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के उप-विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। पिछले 24 घंटों में दोनों देशों के बीच यह तीसरा बड़ा कूटनीतिक संपर्क है, जिसे क्षेत्र में शांति बहाली की कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है।

​रायसीना डायलॉग में वैश्विक चुनौतियों पर मंथन

​नई दिल्ली में गुरुवार से शुरू हुए तीन दिवसीय 'रायसीना डायलॉग' के 11वें संस्करण में वैश्विक नेताओं, नीति निर्माताओं और रणनीतिक विशेषज्ञों का जमावड़ा लगा हुआ है। इस मंच पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न केवल ईरान, बल्कि यूरोपीय देशों जैसे फ्रांस, जर्मनी और तंजानिया के प्रतिनिधियों से भी द्विपक्षीय मुलाकातें की हैं। जयशंकर और ईरानी उप-विदेश मंत्री खतीबजादेह की इस बैठक का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देना रहा।

​28 फरवरी के हमलों के बाद बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता

​यह कूटनीतिक सक्रियता 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद काफी बढ़ गई है। उन हमलों का मुख्य उद्देश्य तेहरान की मिसाइल क्षमता और सैन्य बुनियादी ढांचे को कमजोर करना था, जिसमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ नेता मारे गए थे। इसके जवाब में तेहरान ने भी अमेरिकी संपत्तियों और क्षेत्रीय सहयोगियों को निशाना बनाकर ड्रोन व मिसाइल हमले किए हैं, जिससे भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं।

​विदेश सचिव की शोक संवेदना और फोन पर वार्ता

​सईद खतीबजादेह से मुलाकात से पहले, गुरुवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर लंबी बातचीत की थी। उसी दिन भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का दौरा किया और दिवंगत सुप्रीम लीडर खामेनेई के निधन पर भारत सरकार की ओर से आधिकारिक शोक संवेदना व्यक्त की। भारत लंबे समय से ईरान के साथ मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए हुए है, इसलिए इस संकट में भारत की भूमिका अहम मानी जा रही है।

​शांति और संवाद पर भारत का अडिग स्टैंड

​इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर ने लगातार क्षेत्र में शांति की अपील की है। भारत का स्पष्ट मानना है कि किसी भी जटिल समस्या का समाधान केवल सैन्य टकराव से संभव नहीं है। रायसीना डायलॉग के मंच से भी यह संदेश दिया गया कि संवाद और कूटनीति के रास्ते ही किसी भी युद्ध को रोका जा सकता है और स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।

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