Middle East Crisis: ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत में ऊर्जा संकट की आशंकाओं पर केंद्र सरकार ने बड़ा बयान दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है और आने वाले 4-5 दिनों में चार नए जहाज़ भारत पहुंचने वाले हैं।
बुधवार को सर्वदलीय बैठक में सरकार ने विपक्ष को भरोसा दिलाया कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बनी हुई है।
सर्वदलीय बैठक में क्या हुआ
करीब 1 घंटे 45 मिनट तक चली इस अहम सर्वदलीय बैठक में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के भारत पर संभावित असर को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बताया कि सभी दलों ने अपनी-अपनी चिंताएं खुलकर रखीं, लेकिन अंत में एकजुटता का संदेश दिया। विपक्षी दलों ने भी स्पष्ट कहा कि इस संवेदनशील समय में सरकार जो भी रणनीतिक फैसले लेगी, उसमें पूरा सहयोग दिया जाएगा।
सरकार का बड़ा दावा: ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित
सरकार ने बैठक में साफ तौर पर कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल पूरी तरह मजबूत स्थिति में है। देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सप्लाई चेन को लेकर कोई तत्काल खतरा नहीं है।
इसके अलावा, सरकार ने पहले से ही एडवांस बुकिंग कर रखी है और वैकल्पिक स्रोतों से आयात सुनिश्चित करने के लिए कई देशों के साथ लगातार बातचीत चल रही है। अधिकारियों के अनुसार, सरकार ने अपने अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का दायरा भी बढ़ाया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में सप्लाई प्रभावित न हो।
4-5 दिन में पहुंचेंगे 4 जहाज़
होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर उठ रही आशंकाओं पर सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि फिलहाल सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ा है। सरकार के मुताबिक, अगले 4 से 5 दिनों के भीतर चार बड़े तेल और गैस से जुड़े जहाज़ भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाले हैं।
इससे देश में ऊर्जा आपूर्ति और अधिक स्थिर होगी और किसी भी संभावित संकट को टाला जा सकेगा। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि लॉजिस्टिक्स और सप्लाई नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय है और स्थिति लगातार मॉनिटर की जा रही है।
PM का संदेश: युद्ध खत्म होना चाहिए
बैठक के दौरान विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई हालिया बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री का रुख बिल्कुल स्पष्ट था- यह युद्ध सभी देशों के लिए नुकसानदायक है और इसे जल्द से जल्द खत्म किया जाना चाहिए।
भारत ने हमेशा से शांति और स्थिरता की नीति का समर्थन किया है और इस बार भी वही रुख अपनाया गया है। सरकार का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार दोनों पर गंभीर असर डाल सकता है।
पाकिस्तान पर सरकार का रुख
पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थता को लेकर उठे सवालों पर सरकार ने साफ किया कि यह कोई नई बात नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, 1980 के दशक से ही अमेरिका, ईरान के साथ संवाद बनाए रखने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल करता रहा है।
हालांकि, भारत इस तरह की भूमिका निभाने में विश्वास नहीं रखता। विदेश मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अपनी स्वतंत्र और स्वाभिमानी विदेश नीति पर चलता है और “हम कोई दलाल देश नहीं बन सकते।” इस बयान के जरिए सरकार ने अपनी कूटनीतिक स्थिति को भी साफ कर दिया।
ईरान पर हमले की वजह क्या?
विपक्षी नेताओं ने बैठक में ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों के पीछे की वजह पर सवाल उठाए। इसके जवाब में विदेश सचिव ने बताया कि ईरान ने पहले आश्वासन दिया था कि वह परमाणु परीक्षण नहीं करेगा, लेकिन हालिया गतिविधियां इस दिशा में आगे बढ़ती हुई नजर आ रही थीं।
इसी आशंका के चलते अमेरिका और इज़राइल ने सैन्य कार्रवाई की। सरकार ने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम पर भारत लगातार नजर बनाए हुए है और अपने हितों को प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।