मिडल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष ने दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में हलचल मचा दी है। जहां एक ओर शेयर बाजारों में भारी गिरावट और तेल-गैसे की कीमतों में उछाल की आशंका थी, वहीं सराफा बाजार से बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं।
आमतौर पर युद्ध के समय सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में इस बार भारी गिरावट देखी जा रही है। पिछले 25 दिनों के भीतर सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब 54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है, जबकि चांदी की कीमतें तो अपने रिकॉर्ड हाई से लगभग आधी रह गई हैं।
युद्ध की शुरुआत के बाद सोने की कीमतों में आई ऐतिहासिक गिरावट
ईरान पर अमेरिका और इजरायल की स्ट्राइक शुरू होने के बाद से मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के दाम लगातार टूट रहे हैं। युद्ध शुरू होने से ठीक एक दिन पहले यानी 27 फरवरी को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 1,62,104 रुपये दर्ज की गई थी, जो अब गिरकर 1,38,743 रुपये के स्तर पर आ गई है।
इस तरह महज 25 दिनों के भीतर सोने की कीमत में 23,361 रुपये की बड़ी कमी आई है। यदि इसकी तुलना 29 जनवरी के ऑल टाइम हाई लेवल (1,93,096 रुपये) से की जाए, तो वर्तमान में सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से 54,353 रुपये सस्ता मिल रहा है, जिसने निवेशकों और आम खरीदारों को हैरत में डाल दिया है।
चांदी के बाजार में बड़ी हलचल और आधी हुई कीमतें
चांदी की कीमतों में आई गिरावट सोने से भी कहीं अधिक तेज और व्यापक रही है। 29 जनवरी को चांदी ने भारतीय इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये का स्तर पार करते हुए 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था।
हालांकि, युद्ध शुरू होने के बाद से चांदी की चमक फीकी पड़ती गई और अब तक इसकी कीमत में 58,434 रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। ताजा व्यापारिक सत्रों के दौरान चांदी का भाव गिरकर 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के भी नीचे चला गया है, जो इसके उच्चतम स्तर से करीब 50 प्रतिशत तक कम है। इस भारी गिरावट ने उन निवेशकों को तगड़ा झटका दिया है जिन्होंने ऊंचे दामों पर चांदी की खरीदारी की थी।
वैश्विक हालातों और लिक्विडिटी क्राइसिस का उल्टा असर
आमतौर पर अनिश्चितता और युद्ध के माहौल में सोने को सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार मिडल ईस्ट जंग का असर इसके उलट पड़ा है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक शेयर बाजारों में मची भगदड़ के कारण बड़े निवेशकों को भारी घाटा हुआ है।
इस घाटे की भरपाई और नकदी की जरूरत को पूरा करने के लिए निवेशकों ने अपनी गोल्ड और सिल्वर होल्डिंग्स को बेचना शुरू कर दिया है। बाजार में अचानक बढ़ी इस बिकवाली (Sell-off) और डॉलर की मजबूती ने कीमती धातुओं की कीमतों पर भारी दबाव बनाया है, जिससे मांग कम हुई और दाम तेजी से नीचे गिर गए।
निवेशकों के लिए भविष्य के संकेत और बाजार का रुख
सोने और चांदी की कीमतों में आए इस बड़े 'क्रैश' के बाद अब हर किसी की नजर आने वाले दिनों के बाजार रुख पर टिकी है। वर्तमान में एमसीएक्स पर अप्रैल की एक्सपायरी वाला सोना काफी आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध है, जो लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का एक अवसर बन सकता है।
हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि जब तक ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के हालात स्पष्ट नहीं हो जाते, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। यदि युद्ध और भीषण रूप लेता है, तो आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने से कीमतों का ट्रेंड किसी भी समय बदल सकता है, इसलिए फिलहाल बाजार में फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह दी जा रही है।










