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​प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा से विदा हो रहे 37 सांसदों के योगदान की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से मल्लिकार्जुन खड़गे और शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेताओं के संसदीय अनुभव को नए सांसदों के लिए एक बड़ी पाठशाला बताया।

नई दिल्ली: बुधवार को राज्यसभा में एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब सदन से रिटायर हो रहे 37 सांसदों को विदाई दी गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए विदा होने वाले सदस्यों के योगदान की सराहना की।

पीएम ने विशेष रूप से विपक्ष के दिग्गज नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे, शरद पवार और पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा का जिक्र करते हुए कहा कि नए सांसदों को इन वरिष्ठ नेताओं के लंबे संसदीय जीवन से बहुत कुछ सीखना चाहिए।

​'सदन एक बड़ी ओपन यूनिवर्सिटी': शिक्षा और दीक्षा का केंद्र 
प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा को एक 'ओपन यूनिवर्सिटी' करार दिया। उन्होंने कहा, "यह सदन अपने आप में सीखने का एक बड़ा केंद्र है। यहां बिताए गए छह साल राष्ट्र जीवन के साथ अपने जीवन को भी गढ़ने का अवसर देते हैं। यहाँ हमारी जो शिक्षा-दीक्षा होती है, वह भविष्य के लिए एक बड़ी स्मृति बन जाती है।" उन्होंने कहा कि विदा हो रहे सदस्यों का योगदान राष्ट्र निर्माण में हमेशा बना रहेगा और उनकी कमी सदन को खलेगी।

​वरिष्ठों का अनुभव: नए सांसदों के लिए मार्गदर्शिका 
पीएम मोदी ने विदा हो रहे सदस्यों के लंबे अनुभव की सराहना करते हुए कहा, "मैं कहूँगा कि आदरणीय देवगौड़ा जी, खड़गे जी और शरद पवार जी जैसे लोग हैं, जिनके जीवन की आधी से ज्यादा उम्र संसदीय कार्यप्रणाली में रही है।

इतने लंबे अनुभव से नए सदस्यों को सीखना चाहिए कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को कैसे निभाया जाता है।" पीएम ने कहा कि संसदीय प्रणाली में 'अनुभव' ही वह विरासत है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती है।

​संकट के साथी उपसभापति हरिवंश - नरेन्द मोदी  
भाषण के दौरान पीएम ने उपसभापति हरिवंश जी की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, "हमारे उपसभापति हरिवंश जी मृदुभाषी हैं, लेकिन संकट के समय सारा काम उन्हीं के जिम्मे आता है कि 'जरा आप संभाल लेना'।" इसके साथ ही उन्होंने सदन के खुशनुमा पलों को याद करते हुए कहा कि मीडिया की दुनिया में जहाँ हर कोई सचेत रहता है, वहां सदन में 'हास्य विनोद' और व्यंग्य की परंपरा चर्चाओं को समृद्ध करती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी।

​निर्णय प्रक्रिया में 'सेकंड ओपिनियन' का महत्व

संसदीय प्रणाली की खूबसूरती पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन में या सामाजिक जीवन में जब भी कोई बड़ा फैसला लेना होता है, तो हम 'सेकंड ओपिनियन' तलाशते हैं।

उन्होंने कहा, "संसदीय प्रणाली में राज्यसभा 'सेकंड ओपिनियन' की तरह काम करती है। यह बहस को नया आयाम देती है और हमारी निर्णय प्रक्रिया को अधिक समृद्ध बनाती है।" उन्होंने विश्वास जताया कि जो नए सांसद आएंगे, उन्हें वरिष्ठों से मिली यह विरासत आगे बढ़ने में मदद करेगी।

​लोकसभा अपडेट: 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन हटा 
इसी बीच संसदीय कार्यवाहियों से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई। लोकसभा में पिछले बजट सत्र के दौरान निलंबित किए गए 8 विपक्षी सांसदों का सस्पेंशन हटा दिया गया है। इनमें कांग्रेस के 7 और लेफ्ट का 1 सांसद शामिल है। इन सांसदों पर स्पीकर की कुर्सी की ओर कागज फेंकने का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें 4 फरवरी को निलंबित किया गया था।

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