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आखिर मां ना बन पाने के लिए महिलाएं ही दोषी क्यों?

इन्फर्टिलिटी एक ऐसी दिक्कत है जो महिला पुरुष दोनों को हो सकती है तो फिर बच्चा ना होने की जिम्मेदार सिर्फ महिला ही क्यों? ऐसे में ससुराल वालों को अपनी सोच बदलने की बहुत आवश्यकता है। ताने मारने से बेहतर है कि किसी में कमी है तो उसका तुरंत इला जा करवाएं।

आखिर मां ना बन पाने के लिए महिलाएं ही दोषी क्यों?मां ना बन पाने के लिए महिलाएं ही दोषी क्यों (फाइल फोटो)

यह तो हम सालों से देखते हुए आ रहे हैं कि गलती कोई भी हो जिम्मेदार सिर्फ लड़की को ही ठहराया जाता है। लड़की को कोई छेड़ दे तो लड़की को यह बोल कर चुप करवा दिया जाता है कि तुम वहां क्यों गई, लड़की की शादी नहीं हो रही है तो भी गलती लड़की की ही है। वहीं शादी के बाद अगर कपल को औलाद का सुख न मिले तो भी दोषी सिर्फ महिला ही है। जिसके लिए उसके कई खरी खरी सुनाई जाती है। शादी होते ही सब उससे गुड न्यूज यानि बच्चे होने की खुशी की खबर की उम्मीदें रखना शुरू कर देते हैं। वहीं मां न पाने का दोष उसे ही ठहरा दिया जाता है।

पूरा समाज लड़की को जिम्मेदार ठहरा देता है

वहीं अगर शादी के कुछ साल हो गए हैं महिला मां नहीं बनी है तो इसका यह मतलब नहीं है कि उसमें कोई कमी है या फिर वो मां नहीं बन सकती है। ऐसा भी हो सकता है कि लड़के में ही कोई कमी हो। वहीं मां न बन पाने के लिए पूरा समाज लड़की को जिम्मेदार ठहरा देता है और ससुराल में रहना दुश्वार कर देता है। वहीं अगर धोखे से लड़की बोल दे कि कमी उसमें नहीं उसके पति में है तो पूरी फैमिली उसे बुरी नजरों से देखने लगती है।

महिलाएं इस दर्द को चुपचाप सहती हैं

जिसके बाद ससुराल के लोगों से लेकर पड़ोस के लोग भी ताना मारना शुरू कर देते हैं। वहीं ज्यादातर महिलाएं इस दर्द को चुपचाप सहती हैं क्योंकि उन्हें पता होता है को वो कितनी भी अपनी बात की सफाई देदें, आखिर में दोषी उन्हें की करार दिया जाएगा और सच कोई भी स्वीकार नहीं करेगा।

च्चा ना होने की जिम्मेदार सिर्फ महिला ही क्यों

बच्चे न होने पर फैमिली की चिंता होना लाजमी है, लेकिन इसके लिए सिर्फ महिला को जिम्मेदार ठहराना कहां का इंसाफ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन्फर्टिलिटी एक ऐसी दिक्कत है जो महिला पुरुष दोनों को हो सकती है तो फिर बच्चा ना होने की जिम्मेदार सिर्फ महिला ही क्यों? ऐसे में ससुराल वालों को अपनी सोच बदलने की बहुत आवश्यकता है। ताने मारने से बेहतर है कि किसी में कमी है तो उसका तुरंत इला जा करवाएं। नहीं तो बच्चा अडोप करने में भी कोई बुराई नहीं है। नहीं तो आप IVF की भी मदद ले सकते हैं।

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डिप्रेशन का भी शिकार हो जाती हैं

आपको बता दें कि आपके ऐसा करने से लड़की को कितनी तकलीफ होती है। एक तरफ औलाद न होने का दुख दूसरी तरफ ससुराल वालों के ताने। ऐसे में महिलाएं अंदर ही अंदर घुटने लगती है। वहीं कुछ महिलाएं तो डिप्रेशन का भी शिकार हो जाती हैं। वहीं अगर आप ऐसे वक्त में उनकी परेशानी समझकर उनका साथ नहीं दे सकते तो उनके दुख का कारण भी न बनिए।

Shagufta Khanam

Shagufta Khanam

Jr. Sub Editor


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