Women Health: 40 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं। इस दौरान शरीर की जरूरतें भी बदलने लगती हैं और कई बीमारियों का खतरा धीरे-धीरे बढ़ सकता है। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि महिलाएं इस उम्र के बाद नियमित हेल्थ चेकअप जरूर कराएं, ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।
अक्सर महिलाएं परिवार और काम की जिम्मेदारियों में अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन समय पर कराए गए कुछ जरूरी टेस्ट न केवल गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान कर सकते हैं, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जीने में भी मददगार साबित होते हैं। आइए जानते हैं 40 की उम्र के बाद महिलाओं को कौन-कौन से 5 जरूरी टेस्ट जरूर कराने चाहिए।
इन 5 हेल्थ टेस्ट को ज़रूर कराएं
ब्लड प्रेशर टेस्ट
40 के बाद हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ सकती है। कई बार इसके लक्षण स्पष्ट नहीं दिखाई देते, इसलिए इसे “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है।
नियमित रूप से ब्लड प्रेशर चेक कराने से दिल की बीमारियों, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी समस्याओं के खतरे को समय रहते पहचाना जा सकता है। डॉक्टर आमतौर पर साल में कम से कम एक बार ब्लड प्रेशर जांच कराने की सलाह देते हैं।
ब्लड शुगर टेस्ट
उम्र बढ़ने के साथ टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है। खासतौर पर जिन महिलाओं का लाइफस्टाइल कम एक्टिव है या परिवार में डायबिटीज का इतिहास रहा है, उन्हें नियमित रूप से ब्लड शुगर टेस्ट कराना चाहिए।
फास्टिंग और पोस्ट-प्रांडियल ब्लड शुगर टेस्ट से यह पता लगाया जा सकता है कि शरीर में शुगर का स्तर सामान्य है या नहीं।
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मैमोग्राफी टेस्ट
मैमोग्राफी महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण जांच मानी जाती है। यह टेस्ट ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों का पता लगाने में मदद करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार 40 साल के बाद महिलाओं को समय-समय पर मैमोग्राफी करवानी चाहिए। इससे ब्रेस्ट में होने वाले छोटे बदलावों का भी जल्दी पता चल सकता है और समय पर इलाज संभव हो जाता है।
बोन डेंसिटी टेस्ट
उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में हड्डियों की मजबूती कम होने लगती है। मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के कमजोर होने का खतरा और बढ़ जाता है।
बोन डेंसिटी टेस्ट से हड्डियों की मजबूती का पता लगाया जाता है। अगर समय पर इसकी जांच हो जाए तो कैल्शियम और विटामिन-डी की मदद से हड्डियों को मजबूत रखा जा सकता है।
थायरॉइड टेस्ट
महिलाओं में थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा देखने को मिलती हैं। थायरॉइड गड़बड़ी होने पर वजन बढ़ना, थकान, बाल झड़ना और मूड स्विंग जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
40 साल की उम्र के बाद समय-समय पर थायरॉइड टेस्ट कराना जरूरी होता है। इससे हार्मोन लेवल का पता चलता है और जरूरत पड़ने पर इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)










