Shortness of Breath: क्या आप कुछ कदम चलने या सीढ़ियां चढ़ने भर से ही हांफने लगते हैं? अगर हां, तो इसे सिर्फ थकान समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। सांस फूलना कई बार शरीर का अलार्म सिग्नल होता है, जो अंदर चल रही किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार सांस फूलना दिल, फेफड़ों या खून से जुड़ी बीमारियों का शुरुआती लक्षण हो सकता है। समय रहते जांच और सही इलाज से बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है। आइए जानते हैं कि थोड़ी मेहनत में सांस फूलना किन बीमारियों का संकेत हो सकता है।
6 बीमारियों के हो सकते हैं लक्षण
एनीमिया (खून की कमी)
जब शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है, तो ऑक्सीजन पूरे शरीर तक सही तरह नहीं पहुंच पाती। इससे हल्का काम करने पर भी थकान और सांस फूलने लगती है। महिलाओं और बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
अस्थमा
अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न और खांसी की शिकायत रहती है। मौसम बदलने, धूल या एलर्जी के कारण लक्षण बढ़ सकते हैं। शुरुआती दौर में हल्की मेहनत में ही सांस फूलना शुरू हो सकता है।
हार्ट डिजीज
अगर दिल सही तरह से खून पंप नहीं कर पा रहा है, तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती। यह स्थिति हार्ट फेल्योर या अन्य हृदय रोगों का संकेत हो सकती है। साथ में सीने में दर्द या सूजन भी दिख सकती है।
फेफड़ों की बीमारी
क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज में सांस की नलियां संकरी हो जाती हैं। धूम्रपान करने वालों में यह समस्या ज्यादा पाई जाती है। धीरे-धीरे चलने में भी सांस फूलने लगती है।
मोटापा
अत्यधिक वजन भी सांस फूलने का बड़ा कारण है। ज्यादा वजन के कारण दिल और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हल्की एक्टिविटी में भी थकान महसूस होती है।
चिंता और पैनिक अटैक
कई बार सांस फूलना शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक कारणों से होता है। तनाव, घबराहट या पैनिक अटैक के दौरान भी व्यक्ति को तेज सांस आने लगती है।
(Disc।aimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी डॉक्टर/विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।)
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