Logo
Ramadan 2026 का 28वां रोज़ा 18 मार्च को रखा जाएगा। जानें दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, भोपाल, पटना समेत भारत के प्रमुख शहरों में सेहरी और इफ्तार का समय। साथ ही शब-ए-क़द्र की अहमियत भी पढ़ें।

माह-ए-रमज़ान का पाक और बरकतों से भरा मुक़द्दस महीना अब अपने आखिरी दौर में पहुंच चुका है। बुधवार 18 मार्च 2026 को रोज़ेदार रमज़ान का 28वां रोज़ा रखेंगे। रमज़ान के आखिरी दस दिन इस्लाम में बेहद अहम और फ़ज़ीलत वाले माने जाते हैं।

इन दिनों में मुसलमान ज़्यादा से ज़्यादा इबादत, दुआ, कुरआन की तिलावत और तहज्जुद की नमाज़ अदा करते हैं, क्योंकि माना जाता है कि इन दिनों में अल्लाह की रहमत और मग़फिरत के दरवाज़े खुले रहते हैं।

29वीं रात को आ सकती है शब-ए-क़द्र
खास बात यह है कि 28वें रोज़े के दिन यानी 18 मार्च की इफ्तार के बाद शब-ए-क़द्र की 29वीं रात आने की उम्मीद है।

इस्लाम में शब-ए-क़द्र (लैलतुल क़द्र) को बेहद मुक़द्दस रात माना जाता है। कुरआन में इसे हज़ार महीनों से बेहतर रात बताया गया है।

मान्यता है कि इस रात अल्लाह की खास रहमत और बरकत नाज़िल होती है। इसलिए रोज़ेदार इफ्तार के बाद पूरी रात नमाज़, तस्बीह, कुरआन की तिलावत और दुआ में गुज़ारते हैं।

18 मार्च 2026: भारत के प्रमुख शहरों में सेहरी और इफ्तार का समय
नीचे भारत के कुछ प्रमुख शहरों के लिए अनुमानित सेहरी और इफ्तार टाइम दिए गए हैं (Hanafi फिक्ह के अनुसार):

शहर    

सेहरी का समय    

इफ्तार का समय

नई दिल्ली     सुबह 05:08   शाम 06:32
मुंबई     सुबह 05:23     शाम 06:53
कोलकाता     सुबह 04:27     शाम 05:48
बेंगलुरु    सुबह 05:14     शाम 06:31
चेन्नई     सुबह 05:04   शाम 06:20
हैदराबाद     सुबह 05:16     शाम 06:38
लखनऊ     सुबह 04:55     शाम 06:17
जयपुर     सुबह 05:15     शाम 06:38
भोपाल     सुबह 05:11     शाम 06:32
पटना     सुबह 04:37     शाम 05:59
इंदौर     सुबह 05:17     शाम 06:38

यह समय उस अवधि को दर्शाते हैं जब रोज़ेदार सुबह फज्र से पहले सेहरी करते हैं और सूर्यास्त के बाद इफ्तार से रोज़ा खोलते हैं।

ध्यान रखें

  • ये समय अनुमानित हैं और शहर के अलग-अलग इलाकों में 1–2 मिनट का फर्क हो सकता है।
  • Shia (Jafria) फिक्ह में सेहरी थोड़ी पहले खत्म की जाती है और इफ्तार थोड़ा बाद में होता है।
  • सटीक समय के लिए स्थानीय मस्जिद, मौलाना या विश्वसनीय ऐप जैसे IslamicFinder आदि से जानकारी लें।

सेहरी और इफ्तार क्या होते हैं?
रमज़ान के दौरान रोज़े में दो खास भोजन होते हैं- सेहरी और इफ्तार। सेहरी (सुहूर) वह भोजन है जो सुबह फज्र की नमाज़ से पहले खाया जाता है। इससे रोज़े की शुरुआत होती है और इसे सूर्योदय से पहले खत्म करना जरूरी होता है।

वहीं इफ्तार सूर्यास्त के बाद किया जाता है, जब रोज़ा खोला जाता है। आम तौर पर मुसलमान खजूर और पानी से रोज़ा खोलते हैं फिर मग़रिब की नमाज़ के बाद खाना खाते हैं।

रमज़ान में रोज़े का महत्व
रमज़ान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है। यह महीना आध्यात्मिक सुधार, सब्र और इबादत का महीना माना जाता है।

इस दौरान लोग:

  • कुरआन की तिलावत करते हैं।
  • अतिरिक्त नमाज़ें पढ़ते हैं।
  • गरीबों और ज़रूरतमंदों की मदद करते हैं।
  • दान-पुण्य और सदका करते हैं।

इफ्तार का समय अक्सर परिवार और समुदाय के लोगों को साथ लाने का मौका भी बन जाता है।
जैसे-जैसे रमज़ान अपने आखिरी दिनों की ओर बढ़ रहा है, पूरे भारत में मुसलमान सेहरी से लेकर इफ्तार तक रोज़ा रखकर इबादत में लगे हुए हैं और सदियों पुरानी परंपराओं को निभा रहे हैं।

रमज़ान मुबारक!
आपके रोज़े कबूल हों और दुआएं मंज़ूर हों।

7