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आधे से ज्यादा लोगों को है डिप्रेशन और ब्लड प्रेशर की समस्या, जानें वजह

बदलती लाइफस्टाइल और रोज की भागदौड़ के कारण ज्यादातर लोग तनाव में रहते हैं और उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है। लोग इसे रोज की थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर आप अपने दिमाग को कंट्रोल नहीं रख पाते हैं और छोटी-छोटी बात पर आपको गुस्सा आ जाता है, तो इसके लिए आप डॉक्टर से संपर्क करें।

आधे से ज्यादा लोगों को है डिप्रेशन और ब्लड प्रेशर की समस्या, जानें वजह

बदलती लाइफस्टाइल और रोज की भागदौड़ के कारण ज्यादातर लोग तनाव में रहते हैं और उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है। लोग इसे रोज की थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर आप अपने दिमाग को कंट्रोल नहीं रख पाते हैं और छोटी-छोटी बात पर आपको गुस्सा आ जाता है, तो इसके लिए आप डॉक्टर से संपर्क करें।

ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसा होना हाई ब्लड प्रेशर के कारण हो सकता है। 90% तक हाई बीपी के मरीजों में लक्षण नहीं दिखते हैं, लेकिन वह इसका शिकार होते हैं। एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिहनमुंबई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने इसकी जानकारी दी है कि लोग सबसे ज्यादा हाई बीपी और तनाव से ग्रसित हैं।

ये है आंकड़ें

BMC की रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2015 से लेकर सितंबर 2017 के बीच शहर के प्रमुख अस्पतालों का निरीक्षण किया गया। प्रमुख अस्पतालों में कुल 5.59 लाख मरीज आए, जिसमें से 1.74 लाख मरीज (तकरीबन 31%) मानसिक समस्याओं से परेशान हैं। वहीं 1.27 लाख मरीज (तकरीबन 23%) हाई बीपी की समस्या से जूझ रहे हैं।

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टेंशन और हाई बीपी का कारण

इस मामले में विशेषज्ञों ने बताया कि रोज की बदलती लाइफस्टाइल और मेंटल प्रेशर के कारण ज्यादातर लोगों में ये दो समस्याएं तेजी से फैल रही हैं। बॉम्बे हॉस्पिटल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल शर्मा ने इस मामले पर कहा कि हाई बीपी की बीमारी पूरी तरह से लाइफस्टाइल पर निर्भर करती है। इन दिनों यह इतनी तेजी से बढ़ रही है कि हर तीसरा व्यक्ति इससे परेशान है।

हाई बीपी का पता समय पर नहीं चल पाता है। रोज की टेंशन और खान-पान (अधिक नमक, स्पाइसी खाना) के कारण यह समस्या ज्यादा बढ़ रही है। हाई बीपी होने पर सबसे ज्यादा असर दिल, दिमाग और किडनी पर पड़ता है।

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