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पर्यावरण और सेहत को नुकसान पहुंचाए थर्मोकोल

घर और बाहर थर्मोकोल के पिलो और मैट्रेसेस के बजाय परंपरागत रूई के बने गद्दे यूज में लाकर हम इसके बुरे प्रभाव से बच सकते हैं।

पर्यावरण और सेहत को नुकसान पहुंचाए थर्मोकोल

नई दिल्ली. हमारी रोजर्मरा की जिंदगी में कई चीजें ऐसी हैं, जिन्हें हम अंजाने में शामिल कर लेते हैं, बगैर यह सोचे कि इसका हमारी सेहत पर ही नहीं पर्यावरण पर भी कितना बुरा असर पड़ता है। थर्मोकोल ऐसा ही पदार्थ है। इस बारे में अवेयर रहना बहुत जरूरी है।

हमें हर गली, नुक्कड़ में थर्मोकोल से बने कप और प्लेट तथा गिलास इधर-उधर बिखरे दिखाई देते हैं। चीजों की पैकेजिंग हो या तीज-त्योहार के मौकों पर की जाने वाली सजावट या फिर सोने के लिए इस्तेमाल में आने वाले बेड मैट्रेसेस, पिलो, बीन बैग्स, कप और प्लेटें दवाइयों को एक साथ से दूसरे स्थान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल में होने वाले बॉक्स या बड़े सामान को सुरक्षित रखने के लिए थर्मोकोल का इस्तेमाल होता है।
वातावरण करे प्रदूषित
थर्मोकोल का हमारे दैनिक जीवन में बढ़ता उपयोग नदियों, झीलों और समुद्र के पानी पर भी बुरा असर डाल रहा है। पर्यटन स्थलों पर स्थित फूड प्वाइंट्स में इनका बेतहाशा इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि आज समुद्र के पानी में थर्मोकोल के छोटे-छोटे टुकड़े हवा की लहरों में तैरते उतराते देखे जाते हैं। क्या आपने कभी इस बारे में गंभीरता से सोचा है? आप कभी ये कल्पना नहीं कर सकते कि थर्मोकोल आज पर्यावरणविदों के लिए ही नहीं बल्कि समूची पृथ्वी के लिए भी एक बड़ा चिंता का विषय साबित हो रहा है। थर्मोकोल चूंकि बायोडिग्रेडेबल नहीं है, जिसके कारण यह जहां कहीं भी कूड़े के रूप में फेंका जाता है, इसके छोटे छोटे टुकड़े जमीन, वायु और समुद्र को प्रदूषित करने का एक बड़ा कारण बन रहे हैं। जिससे मनुष्य ही नहीं बल्कि जानवरों के भी स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ रहा है।
थर्मोकोल बनाने में कई ऐसे ठोस उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है, जो पानी में घुलनशील नहीं होते। इसके अलावा इसे बनाने में इसमें मिलाए जाने वाले तेल, ग्रीस, सल्फाइट और अन्य कई रासायनिक उत्पादों जैसे लेड, मरकरी, आयरन और एल्युमिनियम का इस्तेमाल किया जाता है। यह पानी में घुलनशील तत्व नहीं होते और यह नदियों और नालों को प्रदूषित करने के साथ नालियों में भी अवरोध पैदा करते हैं। प्लास्टिक की तरह थर्मोकोल ज्वलनशील नहीं है। इसे जलाने के दौरान इससे पैदा होने वाला धुआं पूरे वायुमंडल को प्रदूषित करता है। समुद्र के पानी में थर्मोकोल के छोटे-छोटे तैरने वाले टुकड़े समुद्री जीव जंतुओं के लिए नुकसानदेह साबित हो रहे हैं। यह उन्हें अपना भोजन समझकर खाते हैं, जिसके कारण समुद्र में प्रदूषण तो फैल ही रहा है, इसके अलावा इसमें मौजूद रसायनिक तत्व समुद्री जीव जंतुओं के लिए भी एक खतरा साबित हो रहे हैं।
खाद्य बनते हैं हानिकारक
थर्मोकोल बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स का जब कंटेनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है तो यह खाने वाली चीजों को विषाक्त बनाते हैं। इतना ही नहीं यदि इनमें भोजन का लंबे समय तक संग्रहित किया जाता है, तो यह केमिकल स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन जाते हैं। इसके अलावा थर्मोकोल वायुमंडल में ओजोन परत की क्षमता पर भी बुरा असर डालता है। थर्मोकोल के उत्पादन के दौरान इससे रिसने वाली गैस के कारण ओजोन परत पर इसका बुरा असर होता है। चूंकि इसे बनाने में टेरीन/पोलीस्ट्रिन का इस्तेमाल होता है, जिसके वजह से इसे बनाने के बाद इसका कूड़ा भी न केवल हमारे वायुमंडल को प्रदूषित करता है बल्कि जलाने से पैदा होने वाला धुआं ग्लोबल वार्मिंग के साथ हवा को भी विषैला बनाता है।
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