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खुशखबरी! डॉक्टरों को अब मिलेगा दोगुना अलांउस, बस करना होगा ये काम

छत्तीसगढ़ के ऐसे सरकारी डॉक्टर जो निजी प्रेक्टिस नहीं करते, उन्हें मिलने वाला नॉन प्रेक्टिस अलांउस अब पहले के मुकाबले दोगुना मिलेगा

खुशखबरी! डॉक्टरों को अब मिलेगा दोगुना अलांउस, बस करना होगा ये काम

छत्तीसगढ़ के ऐसे सरकारी डॉक्टर जो निजी प्रेक्टिस नहीं करते, उन्हें मिलने वाला नॉन प्रेक्टिस अलांउस अब पहले के मुकाबले दोगुना मिलेगा। सरकार के वित्त विभाग ने इस संबंध में नया निर्देश जारी कर कहा है कि इन्हें अब छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के तहत अव्यवसायिक भत्ता दिया जाएगा।

राज्य सरकार ने चिकित्सा शिक्षकों एवं चिकित्सकों की निजी प्रेक्टिस पर प्रतिबंध एवं अव्यवसायिक भत्तों की पात्रता के संबंध में छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम 2009 के तहत निर्देश जारी किए थे।

इसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग के ज्ञापन के आधार पर 1 मई 2018 को निजी प्रेक्टिस की छूट के संबंध में संशोधित दिशा निर्देश जारी किए गए थे।

अब राज्य शासन ने इस मामले में विचार करने के बाद निर्णय लिया है कि छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के अंतर्गत अव्यवसायिक भत्ते की दर संशोधित की जाएगी।

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ये हुआ बदलाव

अव्यवसायिक भत्ता की दर छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 में मूल वेतन के 20 प्रतिशत के समान होगी, बशर्ते कि मूल वेतन और अव्यवसायिक भत्ते की कुल राशि 2 लाख 37 हजार 500 से अधिक न हो।

पुनरीक्षित वेतन संरचना में मूल वेतन का मतलब छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के नियम-3(क) में जिस तरह परिभाषित किया गया है। यानि पुनरीक्षित वेतन संरचना में मूल वेतन, वेतन मैट्रिक्स, बताए गए लेवल में आहरित मूल वेतन होगा, लेकिन इसमें किसी अन्य प्रकार का वेतन जैसे विशेष वेतन शामिल नहीं होगा।

अव्यवसायिक भत्ता महंगाई भत्ता की गणना के लिए मूल वेतन का ही भाग माना जाएगा। इसमें यह बात भी शामिल है कि अव्यावसायिक भत्ता सेवानिवृत्ति परिलाभों की गणना के लिए भी वेतन का मूल भाग माना जाएगा। लेकिन इसके साथ यह शर्त है कि पूरे सेवाकाल में कम से कम पांच साल यह भत्ता लिया गया हो।

इन पदों पर लागू होगा भत्ता

सरकार ने यह भी साफ किया है कि अव्यवसायिक भत्ते की पात्रता केवल पूर्णकालिक चिकित्सा (क्लीनिकल) पदों तक सीमित होगी। जिसके लिए आवश्यक योग्यता इंडियन मेडिकल कौंसिल एक्ट 1956, इंडियन मेडीसिन सेंट्रल कांउसिल एक्ट 1970, होम्योपैथी सेंट्रल कौंसिल एक्ट 1973, या डेंटिस्ट एक्ट 1948 के अंतर्गत प्राधिकृत चिकित्सा उपाधि है। पुनरीक्षित दर से अव्यावसायिक भत्ते की पात्रता 1 जनवरी 2018 से लागू होगी।

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मिलेगा सातवें वेतनमान के अनुरूप

अब तक नॉन प्रेक्टिस अलाउंस छठवें वेतनमान के हिसाब से दिया जा रहा था। नए निर्देश के बाद सातवें वेतनमान के अनुरूप दिए जाने से करीब दो गुना अधिक भत्ता मिलेगा।

इसका लाभ ऐसे चिकित्सकों को मिलेगा, जो चिकित्सा शिक्षा की पढ़ाई कराने वाले शिक्षक हैं, जो निजी प्रेक्टिस नहीं करते हैं। भारत सरकार ने जिस दर से बढ़ोत्तरी की है, उसी दर से राज्य में भी यह भत्ता दिया जाएगा।

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