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Why gold prices are down: सोने की कीमतों में हालिया गिरावट, लेकिन यह सामान्य करेक्शन माना जा रहा। मजबूत डॉलर और मुनाफावसूली ने दबाव बनाया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गिरावट में खरीदारी का मौका है और फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं।

Why gold prices are down: सोने की कीमतों में हाल के दिनों में आई गिरावट ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। जहां एक ओर वैश्विक तनाव के बीच सोना तेजी से चमका था, वहीं अब मुनाफावसूली और मजबूत डॉलर के दबाव में इसकी चमक थोड़ी फीकी पड़ती दिख रही। सवाल यही है कि क्या यह गिरावट खतरे की घंटी है या निवेश का मौका?

पिछले 20 दिनों में सोने की कीमतों में करीब 1.6% की गिरावट दर्ज की गई। 27 फरवरी को 10 ग्राम सोने का दाम 159097 रुपये था, जो 17 मार्च तक घटकर 156600 रुपये पर आ गया। हालांकि इस दौरान कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला।

युद्ध के बीच सोने की चमक क्यों फीकी पड़ी?

2 मार्च को सोना 167471 रुपये के स्तर तक पहुंच गया था, जो इस अवधि का सबसे ऊंचा स्तर रहा। यह उछाल अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव के चलते बढ़ी वैश्विक अनिश्चितता और सेफ हेवन डिमांड की वजह से आया था। लेकिन यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाई।  4 मार्च को कीमत 162548 रुपये तक फिसल गई और 5 से 11 मार्च के बीच यह करीब 160000 रुपये के आसपास ही बनी रही। बीच-बीच में हल्की रिकवरी जरूर दिखी, लेकिन ओवरऑल ट्रेंड कमजोर ही रहा।

डॉलर की मजबूती से सोने की कीमतें हो रहीं प्रभावित
अब सवाल उठता है कि आखिर सोना गिर क्यों रहा है? इसकी सबसे बड़ी वजह मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड मानी जा रही। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा जल्द ब्याज दर कटौती की उम्मीद कम होना भी एक बड़ा कारण है। 2025 में सोना करीब 75% तक चढ़ चुका है, ऐसे में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली भी स्वाभाविक है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वाइस प्रेसिडेंट अक्षया कम्बोज का कहना है कि यह गिरावट किसी बड़े बियर मार्केट की शुरुआत नहीं, बल्कि एक सामान्य करेक्शन है। उनके मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीद और महंगाई जैसे फैक्टर लंबे समय में सोने को सपोर्ट देते रहेंगे। मजबूत तेजी के बाद 10-15% का करेक्शन सामान्य बात है। यह गिरावट निवेशकों के लिए मौका हो सकती है, जहां वे धीरे-धीरे सोने में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं।

तो निवेशकों को क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि घबराकर बेचने की जरूरत नहीं। बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है और लंबी अवधि के निवेशकों को इसे अवसर के रूप में देखना चाहिए। एकमुश्त निवेश के बजाय थोड़ा-थोड़ा करके निवेश करना बेहतर रणनीति मानी जा रही है।

आखिर में, सोना आज भी महंगाई और वैश्विक संकट के खिलाफ एक मजबूत हेज बना हुआ है। इसलिए पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखना और अनुशासित निवेश करना ही समझदारी है।

(प्रियंका कुमारी)

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