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छत्तीसगढ़ का 'शिमला’ कहे जाने वाले मैनपाट के दूरस्थ कुनिया से मुसाखोल तक बन रही प्रधानमंत्री जनमन सड़क योजना की सड़क निर्माण शुरू होते ही उखड़ने लगी है।

आशीष गुप्ता- बतौली। छत्तीसगढ़ के 'शिमला' कहे जाने वाले मैनपाट से एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां दूरस्थ कुनिया से मुसाखोल तक बन रही प्रधानमंत्री जनमन सड़क योजना की सड़क निर्माण शुरू होते ही उखड़ने लगी है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण इसे 'सड़क नहीं, रोटी' बता रहे हैं, जिसे हाथ लगाते ही तोड़ा जा सकता है।

करीब 455.5 करोड़ रुपये की लागत से बन रही 8.16 किलोमीटर सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से खुलेआम घटिया निर्माण किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी “कुंभकरण की नींद” में सोए हुए हैं। 

हाथ से उखड़ रही सड़क का वीडियो वायरल
मुसाखोल गांव में सैकड़ों ग्रामीणों ने जब नई बनी सड़क की जांच की तो चौंकाने वाला सच सामने आया। जहां डामर की सड़क हाथ से ही उखड़ने लगी, नीचे सिर्फ मिट्टी नजर आई। इस पूरे मामले का वीडियो अब सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है।

मिट्टी डालकर बना दी सड़क
ग्रामीणों का कहना है कि जहां मुरम और पत्थर की जरूरत थी, वहां सिर्फ मिट्टी का चूरा डालकर सड़क बना दी गई। बिना बारिश के ही सड़क उखड़ने लगी, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

समय सीमा नजदीक, इसलिए जल्दबाजी में किया जा रहा घटिया काम
इस सड़क का निर्माण 20 जनवरी 2025 से 19 जनवरी 2026 तक पूरा होना था। लेकिन साईं कंस्ट्रक्शन द्वारा काम समय पर पूरा नहीं हो पाया, जिसके चलते अब जल्दबाजी में घटिया निर्माण किया जा रहा है।यह सड़क उन दूरस्थ क्षेत्रों के लिए बनाई जा रही थी जहां पहाड़ी कोरवा समुदाय आज भी सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है। वर्षों बाद मिली इस सुविधा को भी भ्रष्टाचार ने निगलना शुरू कर दिया है।

विधायक की चेतावनी भी बेअसर
सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो पहले ही अधिकारियों को गुणवत्ता को लेकर चेतावनी दे चुके थे। इसके बावजूद उनके निर्देशों को दरकिनार कर घटिया निर्माण जारी है। 

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ कहा कि, ऐसी सड़क नहीं बनने देंगे। जरूरत पड़ी तो उग्र आंदोलन करेंगे। साथ ही उन्होंने ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है और विधायक से शिकायत करने की बात कही है।

सवालों के घेरे में विभाग 
ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि, करोड़ों खर्च होने के बावजूद अगर सड़क हाथ से उखड़ जाए, तो जिम्मेदार कौन? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर संगठित भ्रष्टाचार का बड़ा खेल? अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है या फिर यह सड़क भी भ्रष्टाचार की धूल में दफन हो जाएगी।

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