What should Investors Do: भारत के शेयर बाजार में 8 अप्रैल 2026 को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कई दिनों की गिरावट और कमजोर माहौल के बाद बाजार ने जोरदार वापसी की। सेंसेक्स करीब 2919 अंक यानी 3.91% चढ़कर 77535 पर पहुंच गया जबकि निफ्टी 868 अंक यानी 3.76% की छलांग लगाकर 23992 के स्तर पर पहुंच गया। यह निफ्टी का लगभग 11 महीनों का उच्च स्तर है, जो आखिरी बार मई 2025 में देखा गया था।
इस तेज उछाल की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच घोषित सीजफायर रहा। इससे वैश्विक स्तर पर तनाव कम हुआ और निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखा। ब्रेंट क्रूड करीब 13.24% गिरकर 94.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो भारत जैसे आयातक देश के लिए सकारात्मक संकेत है।
एशियाई बाजार भी हरे निशान में रहे
इसके साथ ही वैश्विक बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली। एशियाई बाजार हरे निशान में रहे और भारत में रुपया भी मजबूत हुआ। रुपया 50 पैसे बढ़कर 92.56 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जिससे निवेशकों का भरोसा और बढ़ा।
रिजर्व बैंक ने भी रेपो रेट स्थिर रखी
घरेलू स्तर पर भी अच्छी खबर आई। भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा और महंगाई दर 3.21% पर रहने से आर्थिक स्थिति स्थिर नजर आई। इन सभी फैक्टर्स ने मिलकर बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया। हालांकि, विशेषज्ञ इस तेजी को लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह उछाल फिलहाल राहत वाली रैली हो सकती है, न कि लंबी अवधि की स्थायी तेजी।
निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं
निवेश विशेषज्ञ निलेश डी नाइक के मुताबिक, ऐसे तेज उतार-चढ़ाव लंबे समय में ज्यादा मायने नहीं रखते और निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। वहीं, आनंद राठी वेल्थ के भरत राठौड़ का कहना है कि निवेशकों को शॉर्ट टर्म खबरों पर प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए और अपने लंबे समय के लक्ष्यों पर ध्यान रखना चाहिए। उनका मानना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव इवेंट आधारित हैं, न कि फंडामेंटल बदलाव के कारण।
पोर्टफोलियो के हिसाब से समीक्षा कर फैसला करें
विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशक इस समय अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें और जरूरत के हिसाब से संतुलन बनाएं। एसआईपी निवेशकों के लिए खास सलाह है कि वे अपनी निवेश योजना जारी रखें। SIP के जरिए लागत औसत करने का फायदा मिलता है और लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिल सकता है।
एकमुश्त निवेश के बजाए धीरे-धीरे लगाएं
नए निवेश के लिए भी जल्दबाजी से बचने की सलाह दी गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे 30-35% रकम लगाएं और बाकी रकम अगले 6-8 हफ्तों में निवेश करें। इसके अलावा पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट का संतुलन (जैसे 80:20) बनाए रखना बेहतर रहेगा। कुल मिलाकर, बाजार में आई यह तेजी राहत जरूर दे रही है, लेकिन निवेशकों को सोच-समझकर और धैर्य के साथ फैसले लेने की जरूरत है।
(प्रियंका कुमारी)










