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आजकल कार टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है। अगर आपकी ड्राइविंग ज्यादातर शहर में है और चार्जिंग सुविधा उपलब्ध है, तो इलेक्ट्रिक कार बेहतर और किफायती विकल्प है। वहीं, लंबी दूरी और अनियमित यात्रा के लिए हाइब्रिड कार अधिक व्यावहारिक साबित होती है।

Car Comparison: आज के समय में बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों और पर्यावरण को लेकर जागरूकता के कारण लोग इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत में 2026 तक EV मार्केट तेज़ी से ग्रो कर रहा है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी लागत अब भी चर्चा का विषय है। ऐसे में सवाल उठता है—इलेक्ट्रिक कार बेहतर है या हाइब्रिड?

Electric Cars के फायदे और नुकसान

  • इलेक्ट्रिक कारें पूरी तरह बैटरी पर चलती हैं और जीरो टेलपाइप एमिशन देती हैं। भारत में बिजली की औसत कीमत करीब ₹8 प्रति यूनिट है, जिससे प्रति किलोमीटर खर्च लगभग ₹1–2 तक आता है। मेंटेनेंस भी कम होता है क्योंकि इंजन ऑयल या क्लच जैसी चीजें नहीं होतीं।
  • सरकारी सब्सिडी और 5% GST के कारण EV खरीदना पहले से ज्यादा किफायती हुआ है। Tata Nexon EV और MG ZS EV जैसे मॉडल 300–400 किमी तक की रेंज देते हैं, जो शहर के लिए पर्याप्त है। हालांकि, 8–10 साल बाद बैटरी बदलवाना महंगा हो सकता है। चार्जिंग नेटवर्क अभी मुख्य रूप से शहरों तक सीमित है। ग्रामीण इलाकों में EV चलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है और रीसेल वैल्यू भी हाइब्रिड से कम रहती है।

Hybrid Cars के फायदे और नुकसान
हाइब्रिड कारें पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर का संयोजन होती हैं। ये बेहतर माइलेज देती हैं और लंबी दूरी के लिए सुविधाजनक रहती हैं। Toyota Innova Hycross और Maruti Grand Vitara जैसे मॉडल लगभग 27–28 किमी/लीटर तक का माइलेज देते हैं। इनमें रेंज की चिंता नहीं रहती क्योंकि पेट्रोल पंप हर जगह उपलब्ध हैं। बैटरी छोटी होने से रिप्लेसमेंट लागत कम होती है और रीसेल वैल्यू बेहतर रहती है। हालांकि, ये EV से महंगी हो सकती हैं और पूरी तरह उत्सर्जन-मुक्त नहीं होतीं।

अगर आपकी ड्राइविंग ज्यादातर शहर में है और चार्जिंग सुविधा उपलब्ध है, तो इलेक्ट्रिक कार बेहतर और किफायती विकल्प है। वहीं, लंबी दूरी और अनियमित यात्रा के लिए हाइब्रिड कार अधिक व्यावहारिक साबित होती है।
(मंजू कुमारी)

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